फिर भी कांग्रेस को समझना होगा

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अजय श्रीवास्तव 
प्रियंका गांधी की राजनीति में धमाकेदार इंट्री वाकई कांग्रेस का नये साल का पहला “मास्टरस्ट्रोक” है।प्रियंका को आँल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने पार्टी का “महासचिव” नियुक्त किया गया है और वो ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी भी बनीं हैं।
प्रियंका गांधी का राजनीति में आना एकाएक नहीं हुआ है,पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता वर्षों से ये मांग करते आएं हैं।अभी तीन महीने पहले प्रियंका इलाहाबाद आयीं थीं,आनंद भवन में पार्टी के कुछ सक्रिय सदस्यों ने प्रियंका से राजनीति में आने का विशेष अनुरोध किया था तो वो एक सदस्य के कान में कुछ कहीं थीं शायद उन्होंने अपनी सक्रिय भागीदारी के बारे में हीं कुछ कहा होगा।वो कार्यकर्ता खुशी से उछल पड़ा था,तभी से ये कयास लगाये जा रहे थे कि प्रियंका की इंट्री सन्निकट है।
प्रियंका के राजनीति में आने को व्यापक परिपेक्ष्य में देखना होगा।मैं नहीं समझता उसके आने से 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्यादा फर्क पड़ेगा मगर उसके बाद भी दूनिया है।प्रियंका को संगठन का माहिर खिलाड़ी माना जाता है,अमेठी और रायबरेली के चुनाव में लोगों ने देखा भी है।वो मृतप्राय हो चुके संगठन में जान फूंकेगी ये तो तय है।मेरा मानना है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इसका परिणाम भी दिखने लगेगा।
हाँ एक और बात,प्रियंका गांधी रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं किसी को शंका नहीं होनी चाहिये।सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति से अपने आप को दूर कर रहीं हैं क्योंकि स्वास्थ्य उनका साथ नहीं दे रहा।
कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव बनाकर संगठन में उत्साह का संचार कर दिया है।प्रियंका गांधी के सामने अनेकों चुनौतियां हैं मगर इंदिरा गांधी की तरह दिखने वाली इस नेत्री ने अपने आप को रायबरेली और अमेठी में कई बार सिद्ध भी किया है।उनका राजनीति में आना राहुल गांधी के लिए बहुत कारगर साबित होगा क्योंकि वे अमेठी और रायबरेली प्रियंका को सौंपकर देश भर में पार्टी का चुनाव प्रचार सकून से कर पाएंगे।
प्रियंका को नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ से मुकाबला करना है ये उन्हें अच्छी तरह से पता है।यद्यपि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है लेकिन अभी भी वो देश के सबसे लोकप्रिय लीडर हैं।भाजपा, सपा और बसपा का प्रदेश में मजबूत संगठन है उनसे मुकाबला करना है।उत्तर प्रदेश में लोग जाती-धर्म में बँटे हैं उनको कैसे कांग्रेस की विचारधारा से जोडा जाय ये प्रयास महत्वपूर्ण होंगे।बहुत सी चुनौतियों को पार करने पर हीं लक्ष को पाया जा सकता है।
राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दे को गरमा दिया है उसकी अलख प्रदेश के किसानों तक कैसे पहुँचेगी मनन करना होगा।बेरोजगारी पर युवाओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरे होने वाले वायदे करने होंगे।ये वायदा साल में दो करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने से अलहदा होना चाहिए नहीं तो मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे परिणाम होंगे ये तो तय है।
प्रियंका गांधी के पास कोई जादू की छडी नहीं है ये कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को समझना होगा।कभी कभी अति उत्साह भी मामले को बिगाड़ देती है।प्रियंका गांधी के पास अभी बहुत समय है और बेहद लोकप्रिय नेत्री सबकुछ ठीक कर लेगी यही सबकी उम्मीद भी है।