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महात्मा गांधी के बाद अब मोदी का कलम

Bhola Tiwari May 18, 2019, 7:39 AM IST टॉप न्यूज़
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प्रवीण झा

जब स्वदेशी-विलायती हुआ तो सबसे बड़ी समस्या तो यह हुई कि लिखेंगे कैसे? कलम तो विदेश से आता था। गांधी जी ने बाँस और लकड़ी के करची कलम से लिखना शुरू किया, लेकिन बात नहीं बनी। फिर एक राजमुंदरी के जौहरी थे, उनको गांधी जी ने कहा कि इतना गहना बनाते हो, एक कलम नहीं बना सकते? तो कस्तूरी रत्नम जी कलम बनाने में लग गए। आखिर बना के लाए कि गांधी जी! कलम तैयार है। गांधी जी घुमा-फिरा कर कलम को देखे, फिर बोले कि इसका निब तो बिदेसी लगता है। अब कस्तूरी जी फिर से कलम में लग गए, दो साल बाद फिर गांधी जी के पास आए। इस बार कहा कि निब भी देशी है। गांधी जी! किसी को भेजिए कि कंपनी में देख कर आए। अंत में जब पक्का हो गए, तो उस कलम से लिखना शुरु किए। फिर उसके बाद सबको एक-एक स्वदेशी कलम खरीदवाए। नेहरु जी, पटेल जी, और जो जो थे, सब एक-एक स्वदेशी कलम खरीद लिए और लिखने लगे। हालिया पता लगा कि मोदी जी भी उसी कंपनी (अब रत्नमसन्स) का कलम बनवाए, जिसके निब में उनका नाम भी लिखा है। 

जब इधर स्वदेशी कलम बन रहा था तो हंगरी में एक यहूदी थे-बीरो। उनको लगा कि इस कलम का इंक बहुत ढबकता है। वह एक अखबार कंपनी में काम करते थे। वहाँ देखे कि अखबार में लगने वाला इंक तुरंत सूख जाता है। वह उस इंक को लेकर कलम में डाल दिए लेकिन कलम नहीं चला। फिर उनके भाई उसमें पानी वगैरा डाल के थोड़ा पतला किए, और बीरो निब की जगह पर एक बॉल लगा दिए। तो इस तरह बना बॉल-पेन। यह बॉल-पेन इंग्लैंड का एयर-फोर्स प्रयोग करने लगा। लेकिन तभी हिटलर यहूदी लोगों को धकियाना शुरु कर दिया। बीरो को अपना कंपनी सस्ता में बेच कर अर्जेंटीना भागना पड़ा।

हालांकि बीरो का कोई भेदिया अमेरिका के रेनॉल्ड्स को यह तकनीक बता दिया, और वह भी एक कामचलाऊ बॉल पेन बना लिए। जिस तरह बीरो का बॉल-पेन आकाश में वायु सेना प्रयोग करता थी, रेनॉल्ड्स का बॉल-पेन नौसेना प्रयोग करने लगी। जमीन पर अब भी फाउंटेन-पेन ही था।

जब 1960 तक भारत में हवाई-जहाज और छोटा-मोटा मिसाइल बनने लगा, लेकिन बॉल-पेन का इंक नहीं बनता, तब आखिर अमरीका से सहयोग मांगा गया। गुजरात में बॉल-पेन बनना शुरु हुआ। लेकिन उस वक्त भी ‘मनी-ऑर्डर’ वगैरा पर बॉल-पेन से साइन करना मना था। उसका वैल्यू नहीं था। यह तो बहुत बाद में जब जालान साहब का लिंक कंपनी खुला कि घर-घर में दुटकिया लिंक पेन आ गया।

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