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हवाई चप्पल चोरी होना शुभ होता है

Bhola Tiwari May 18, 2019, 7:02 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

हाल हीं में प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी योजना की घोषणा की है , जिसमें हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई यात्रा कर सकेंगे । हालांकि इस योजना को मूर्त रुप देने का समय अभी नहीं आया है , पर लोग धड़ाधड़ हवाई चप्पल खरीदने लगे हैं । क्या पता जिन लोगों ने हवाई चप्पल न पहना हो , उन्हें पाॅयलट हवाई जहाज से जमीन पर उतार दे । हवाई चप्पलों की धड़ाधड़ विक्री से चप्पल विक्रेताओं की चांदी हो गयी है । वे पुराना माल भी नये के भाव बेच रहे हैं । उनका रिजेक्टेड पुराना स्टाॅक भी खत्म होने के कगार पर है । मंदिरों से दूसरे चप्पलों की बजाय हवाई चप्पल खूब चोरी हो रहे हैं । इसमें चुराने वाला का तो फायदा हो ही रहा है साथ में जिनकी चोरी हो रही है , उनका भी फायदा हो रहा है । कहते हैं कि जिनका चप्पल चोरी होता है , उनका गृह दोष स्वतः हीं दूर हो जाता है । न हींग लगे न फिटकरी , रंग बने चोखा ।

हवाई चप्पल हवा की तरह हल्का होता है , इसलिए इसे हवाई चप्पल कहते हैं । कुछ लोग आपको बरगला सकते हैं । कह सकते हैं कि इसका नाम हवाई चप्पल इसलिए पड़ा कि इसका फैब्रीक अमेरिका के हवाई द्वीप से लिया गया था । हवाई द्वीप का फेब्रीक है तो इसका नाम हवाई चप्पल तो पड़ेगा हीं । वैसे एक दावा और भी है । ब्राजील की एक शू ब्रांड है हवाइनाज । हवाइनाज ने फ्लिप फ्लाॅप चप्पलें बनाईं थीं । हवाइनाज के चलते इस चप्पल को फ्लिप फ्लाप न कह भारत में हवाई चप्पल कहा जाने लगा । फैब्रिक हवाई का , डिजाइन जापान का और टेक्निक ब्राजील के हवाइनाज का तो बन गया न हवाई चप्पल । हवाई चप्पल अक्सर कमरे के अंदर पहना जाता है । मंदिर जाते वक्त भी लोग अक्सर इसे पहनते हैं ताकि चोरी हो जाने पर भी गम न हो । सस्ती जो ठहरी । जमीन सफेद और उस पर नीला स्ट्रेप पड़ जाय तो बन जाता है हवाई चप्पल । आजकल रंग विरंगे डिजाइनदार हवाई चप्पल भी मिलते हैं । मेरे विचार से ऐसे चप्पलों को हवाई चप्पलों की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए । आखिर मानदण्ड भी तो कोई चीज होती है ।

आम तौर पर हवाई चप्पल दो तीन साल तक चल जाती है , क्योंकि इसका इस्तेमाल बहुत कम होता है । बाहर निकलने पर दूसरे मंहगे किस्म के चप्पलों की जरुरत पड़ती है । मंहगे किस्म के चप्पलों की दो तीन जोड़ी चहिए होती है । यदि आप अमुक जोड़ी पहनकर अमुक साहब की शादी में गए हैं तो दूसरे के मुंडन में वही जोड़ी पहन कर नहीं जा सकते । आपकी नाक कट जाएगी । यदि आपकी नाक सही सलामत बच जाती है तो आपकी श्रीमती जी की नाक जरुर कट जाएगी । उनकी सहेलियां उनके नाक में दम कर देंगी । सबसे कहती फिरेंगी कि इसका पति एक हीं चप्पल में शादी , बर्थ डे और अन्य सभी पार्टियां अटेण्ड करता है । उस समय उनकी सहेलियां यह नहीं देखेंगी कि श्रीमती जी का वार्डरोब दर्जनो चप्पलों से भरा पड़ा है । आपको भी दो तीन जोड़ी डिजाइनदार बढ़िया किस्म की चप्पल लेनी हीं पड़ेगी । हवाई चप्पल तो आपका घर में जब भी जाएंगे स्वागत करता हुआ मिलेगा ।

हमारे जमाने में हम हवाई चप्पल पहनकर बाहर भी खेलते थे । ऐसे में चप्पल के स्ट्रेप अक्सर टूट जाते थे । स्ट्रेप लगाने में हम सिद्धहस्त हुआ करते थे । ऊपर वाली स्ट्रेप को लगाने में आसानी होती थी , पर नीचे वाली दो स्ट्रेप नाकों चना चबवा देती थी । साबुन या सुतली का इस्तेमाल हम किया करते थे । अब तो कोई स्ट्रेप लगाने की जहमत नहीं उठाता । स्ट्रेप टूटा नहीं कि चमचमाती हुई नई हवाई चप्पल आपके पास हाजिर हो जाती है । हमारे टाइम की बात हीं कुछ और थी । उस समय इतने पैसे भी नहीं होते थे । वैसे भी लोग केवल स्ट्रेप के चलते नयी चप्पल लाना पैसे का दुरुपयोग समझते थे । हवाई चप्पल एक तुरत फुरत पहनने वाली चरण पादुका है । बाजार से दूध सब्जी लाना हो , दवा लानी हो या मेहमान के लिए पान की गिलौरी लानी हो ; हवाई चप्पल पहनिए बाईक स्ट्राट कीजिए और आनन फानन में वांछित सामान हाजिर कीजिए । इसमें फीता बांधने व खोलने का झंझट भी नहीं है । इसे उच्च , मध्यम और फटीचर वर्ग भी शान से पहन सकता है ।

पहले कभी कवि सम्मेलनों और नेताओं के भाषणों से बोर होने पर देश का फटीचर वर्ग इसका इस्तेमाल करता था । अब टमाटर और अण्डों को हवाई चप्पल का विकल्प बना दिया गया है । लचीला होने के कारण यह सड़क छाप मजनुओं और शोहदों की पिटाई के लिए भी उपयुक्त होता है । अब रंग विरंगी हवाई चप्पलों ने अपना डेरा जूतों की दूकानों में जमा रखा है । सफेद जमीन व नीले स्ट्रेप वाली हवाई चप्पलों की अब कोई कद्र ही नहीं रही । इस हवाई चप्पल का इतिहास बड़ा पुराना है । इसकी यह बेकद्री इसके फैन कभी बरदाश्त नहीं करेंगे । मुझे भी बहुत दुःख होता है ।

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