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मैं हरमू नदी हूं

Bhola Tiwari May 15, 2019, 6:33 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

हरमू नदी रांची शहर के इर्द गिर्द बहती है । हरमू नदी के कारण हीं गर्मियों में रांची शहर की ठंडक बरकरार रहती है । बिहार राज्य का कभी रांची शहर ग्रीष्म कालीन राजधानी हुआ करता था । कारण था यहां की खुशनुमा ठंडक और हरियाली । हरमू नदी न केवल ठंडक पहुंचाती थी , बल्कि गाती भी थी । कल कल छल छल करती यह नदी 40 किलोमीटर दूर स्वर्ण रेखा नदी से निकलकर आती थी । किनारों से टकराती यह नदी गुलजार के " छई छपाक " का भान कराती थी । इसीलिए यह " दुरंग दुह " ( गाती हुई नदी ) कही जाती थी । यह नदी अपने रास्ते में पड़ने वाले सभी बाग वन को सींचते , वातावरण को हरियाली प्रदान करते और प्राणियों की प्यास बुझाते हुए रांची पहुंची थी । रांची शहर को हरा भरा व ठंडा रखने में इस नदी का बहुत बड़ा हाथ है । इसलिए हरमू नदी को रांची की जीवन रेखा भी कहते हैं ।

रांची की इस जीवन रेखा पर कालांतर में अतिक्रमण होता रहा । नदी को पाटकर दूकानें और घर बनते रहे । नतीजा 40 मीटर चौड़ी पाटों वाली यह नदी कहीं कहीं 10 फीट पर सिमट गयी । कभी लोग इसका पानी पीते थे । अब तो पीना क्या लोग इसके पानी से हाथ धोना भी गैरमुनासिब समझते हैं । हरमू नदी बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है ।इसमें पूरे शहर का सीवेज प्रवाहित होता है । पेड़ कटने से बारिश में भी कमी आ गयी है । हरमू का जल स्तर साल के चार महीने हीं ठीक रहता है । पहले बारिश इतनी होती थी कि भूमिगत पानी भी उससे चार्ज होता रहता था । हरमू नदी के किनारों पर लगे पेड़ कटते रहे हैं , जिससे किनारे टूटते रहे । किनारे टूटने से नदी में काफी सिल्टिंग होती रही । इससे नदी की गहरायी में भी काफी फर्क पड़ा है । प्लास्टिक व कूड़ा कचरा हरमू नदी की जान लेने पर उतारु हैं ।

बैक्टिरिया और दूसरे आर्गेनिक प्रदूषणों के चलते हरमू के पानी से पेट और आंत की बहुत सी बीमारियां हो रही हैं । हरमू नदी पर निकट भविष्य में आबादी का बहुत दबाव बढ़ेगा । फिर तो हरमू नदी को हरमू नाला बनने से कोई भी रोक नहीं सकता । यह मृत्यु की कगार पर खड़ी है । यदि यह नदी से नाला बनीं तो इसकी मातृ उद्गम स्वर्ण रेखा पर भी असर पड़ेगा । हालांकि अब सीवरेज का पानी ट्रीटमेण्ट कर हरमू में डाला जा रहा है , परन्तु अब भी 80 से ऊपर ऐसे नाले हैं , जिनका पानी बिना ट्रीटमेण्ट के इस नदी में डाला जा रहा है । हरमू नदी का पानी अब भी साफ नहीं किया जा सका है । इसका पानी अब भी काला है । नालों के पानी को भी ट्रीटमेण्ट करने की जरुरत है । 

सुना है अब नदी के किनारों का सौन्दर्यीकरण हो रहा है । पेड़ लगाए जा रहे हैं । अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं । किनारों का जीर्णोद्धार का काम भी जोरों पर है । इस साल के अक्टूबर तक काम पूरा हो जाएगा । अगर ऐसा सम्भव हो गया तो लाखों साल से बहती यह हरमू नदी बच जाएगी । यह फिर प्राणियों के लिए जीवनदायिनी हीं रहेगी । और रांची के लिए जीवन रेखा बनी रहेगी ।

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