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दशरथ मांझी - माउंटेन कटर

Bhola Tiwari May 13, 2019, 7:13 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा    

कैसे आकाश में सुराख नही हो सकता ,

एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों .

  जी हाँ ! असंभव को संभव कर दिया था दशरथ मांझी ने . 22 सालों की अथक परिश्रम के बाद माझी ने पहाड़ काटकर 360 ft लम्बी व 30 ft चौड़ी सड़क का निर्माण कर दिया था . सन् 1934 में जन्मे ,विहार के गया जिले स्थित गहनौर निवासी दशरथ मांझी की पत्नी एक बार पहाड़ से पानी लाते वक्त गिर गयीं, घड़ा फुट गया . दशरथ को तभी पानी लाने वाले स्थान तक रास्ता बनाने की सूझी और वे इस नेक काम में जुट गए .पिता समझाते इस काम से पेट नही भरने वाला .पत्नी खेतों में काम करने को कहती , किन्तु दशरथ मांझी अपने धुन के पक्के ठहरे . उनका कहना था कि कमाना , खाना और मर जाना -ये अब तक का दस्तूर रहा है . दस्तूर से अलग हटकर कुछ किया तो आपकी जिंदगी सुफल है .

 जुनूनी मांझी ने पानी के स्रोत तक पहाड़ काट कर रास्ता बना हीं दिया . काल चक्र के क्रूर हाथों उनकी पत्नी का देहान्त हो गया. गाँव की खराब चिकित्सा व्यवस्था व शहर तक सड़क न होने के कारण ही उनकी पत्नी का देहान्त हुआ था . अब उन्हें गाँव को शहर से जोड़ने का उन्माद शुरू हुआ . फिर जूनूनी मांझी शुरू हो गए और उन्होने 80 km के रास्ते को 3 km में सिमटा दिया .मुख्य मंत्री नितीश कुमार ने इनको अपनी कुर्सी पर बैठा कर सम्मानित किया थाड़ . राष्ट्र पति ने उन्हें मिलने के लिए दिल्ली बुलाया . वे राष्ट्रपति से मिलने गया से दिल्ली तक पैदल हीं गए थे ।

ऐसे उन्मादी दशरथ मांझी की मृत्यु 17 अगस्त सन् 2007 को कैंसर से जूझते हुए हुई थी . मृत्यु के हाथों इनके जूनून को आखिरकार हारना पड़ा . एक विनम्र श्रद्धांजलि :-  

जो सुमन बीहड़ों में, वन में खिलते हैं

वो माली के मोहताज नही होते .

जो दीप उम्र भर जलते हैं ,

वे दिवाली के मोहताज नहीं होते .

श्री मांझी अपने पीछे एक विकलांग पुत्र व एक विधवा पुत्री छोड़ गए हैं . विहार सरकार की तरफ से इन्हें 6 लाख रुपया व 5 एकड़ जमीन देने की घोषणा हुई थी, जो आज तक नहीं मिली है . विकलांग बेटे व बेवा बेटी का गुजारा कैसे होगा ? यह यक्ष प्रश्न है .

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