ब्रेकिंग न्यूज़
BIG NEWS : सर्दी के मौसम में लद्दाख में मोर्चाबंदी के लिए सेना पूरी तरह तैयार          “LAC पर चीन को भारत के साथ मिलकर सैनिकों की वापसी प्रक्रिया पर काम करना चाहिए” :  विदेश मंत्रालय प्रवक्ता         BIG NEWS : जम्मू कश्मीर पहुंचे सेनाध्यक्ष ने सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा, उपराज्यपाल से भी की मुलाकात         BIG NEWS : 'मैं भी मारा जाऊंगा'         एक ऐसा मंदिर जहां पार्वतीजी होम क्वारैंटाइन में और महादेव कर रहे हैं इंतजार         अदृश्य भक्त करता है रोज भगवान शिव की आराधना , कौन है वो ?         BIG NEWS : सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ठिकाना ढूंढ निकाला, भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद         BIG NEWS : “भारत बड़ा और कड़ा क़दम उठाने के लिए तैयार”: राजनाथ सिंह         BIG NEWS : श्रीनगर एनकाउंटर में तीन आतंकियों को मार गिराया         इलाहाबाद में एक मंदिर ऐसा, जहां लेटे हैं हनुमान जी         यहां भगवान शिव के पद चिन्ह है मौजूद         BIG NEWS : दोनों देशों की सेनाओं के बीच 20 दिन में तीन बार हुई फायरिंग         BIG NEWS : मॉस्को में विदेश मंत्रियों की मुलाकात से पहले पैंगोंग सो झील के किनारे चली थी 100-200 राउंड गोलियां- मीडिया रिपोर्ट         BIG NEWS : पाकिस्तानी सेना ने सुंदरबनी सेक्टर में की गोलाबारी, 1 जवान शहीद         CBI को दिशा सलियान की मौत की गुत्थी सुलझाने वाले कड़ी की तलाश !         हर साल बढ़ जाती है इस शिवलिंग की लंबाई, कहते हैं इसके नीचे छिपी है मणि         कलयुग में यहां बसते हैं भगवान विष्णु...         BIG NEWS : देश से बाहर प्याज निर्यात पर प्रतिबंध         BIG NEWS :  LAC पर हालात बिल्कुल अलग, हम हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार : राजनाथ सिंह          BIG NEWS : गांदरबल में हिज्बुल मॉड्यूल का पर्दाफाश, हथियारों के साथ 3 हिज्बुल आतंकी गिरफ्तार         भाषा के सवाल को अनाथ छोड़ दिया गया है ...         कैलाश पर्वत श्रृंखला के पहाडि़यों पर कब्जा करने के बाद उमंग में नहा गए सेना के जवान         शिव के डमरू से बंधे हैं स्वरनाद और सारे शब्द          BIG NEWS : कैलाश पर्वत-श्रृंखला पर भारत का कब्जा         BIG NEWS : चीन कर रहा भारत की जासूसी, लिस्ट में पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई बड़ी हस्तियों के नाम शामिल         सुरंगों के जरिए आतंकवादी कर रहे हैं घुसपैठ, हथियार सप्लाई के लिए पाकिस्तान कर रहा ड्रोन का इस्तेमाल : डीजीपी दिलबाग सिंह         BIG NEWS : दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद गिरफ्तार         भगवान शिव के कैलाश पर्वत पर आज भी होती है ॐ’ की प्रतिध्वनि          BIG NEWS : हजारीबाग सेंट्रल जेल से म्यांमार का कैदी मोहम्मद अब्दुल्ला फरार          बस पढ़िए खूब पढ़िए, जहाँ पाइए वहां पढ़िए, अध्ययन का कोई विकल्प नहीं          अफसोस में दम घुट गया एक राजनीति का...         BIG NEWS : रघुवंश प्रसाद की मौत पर लालू दुखी, बोले- "प्रिय रघुवंश बाबू ! ये आपने क्या किया?          BIG NEWS : नहीं रहे रघुवंश प्रसाद सिंह, दिल्‍ली के ऐम्स में ली अंतिम सांस         BIG NEWS : कश्मीर में POK से आतंकी संगठन भेज रहे हैं हथियार, पुंछ में 2 OGWS गिरफ्तार         शिव के पास तीन खास अस्त्र...        

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी!

Bhola Tiwari Aug 15, 2020, 4:23 PM IST कॉलमलिस्ट
img


हिमकर श्याम  

रांची : 15 अगस्त 1947 के पहले राजनीतिक दृष्टिकोण से भारतीय साम्राज्य भारत की प्राकृतिक सीमाओं से बाहर कई स्थानों में फैला हुआ था। उसमें न केवल किरथार पर्वतमाला के उस पार बलूचिस्तान भी सम्मिलित था, बल्कि बंगाल की खाड़ी में स्थित कुछ छिटपुट छोटे-छोटे भूभाग भी थे। भारत की संस्कृति और परम्पराओं का प्रभाव पड़ोसी देशों एवं अन्य देशों की सभ्यता पर भी दृष्टिगोचर होता है। चीन, बर्मा, थाईलैंड, सुमात्रा, कम्बोडिया, श्रीलंका आदि कई देशों की सभ्यता पर भारत की संस्कृति की झलक मिलती है। अखंड भारत या वृहत्तर भारत, प्राचीन समय के भारत के अविभाजित स्वरूप को कहा जाता है। अखंड या वृहत्तर भारत देश की भौगोलिक एकता का ही परिचायक नहीं अपितु जीवन के भी भारतीय दृष्टिकोण का परिचायक है, जो अनेकता में एकता का दर्शन कराता है। 

महाकाव्यों तथा पुराणों में सम्पूर्ण देश का नाम भारतवर्ष दिया गया है। इसके निवासियों को भारती संतति कहा गया है। इंडिया, हिन्दू, हिंदुस्तान, भारत, अजनाभवर्ष आदि नामों से पुकारे जानेवाले देश का एक नाम कुमारिकाद्वीप भी था। पुराणों में तो स्पष्टतः इसे कुमारिकाद्वीप कहा गया है, और शेष वृहत्तर भारत को अर्थात वर्तमान हिंदेशिया, मलय, वियतनाम, कम्पूचिया, सियाम और वर्मा तथा शेष पूर्वीद्वीप समूह को द्वीपांतर कहा गया है। ये द्वीप परस्पर सिंधु मार्ग से जुड़े हैं। द्वीपांतर भारत के आठ द्वीप इन्द्रद्वीप(अंडमान), ताम्रपर्णी(लंका), नागद्वीप(मलय), सौम्य(सुमात्रा). वारूण(कम्बोजिया), गान्धर्व(बाली), भस्ति और गभस्तिमान(सूर्यद्वीप) हैं। सिन्धु नदी के दोनों तटों पर गांधार जनपद था। इसके दो मुख्य नगर तक्षशिला (जिला रावलपिंडी में) और पुष्करावती (पेशावर का चारसद्दा) थे। विष्णुपुराण कहता है कि समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में जो वर्ष स्थित है उसका नाम भारत है और उसकी सन्तान को भारतीय कहते हैं।  

ऐसा कहा जाता है कि भारतवर्ष जम्बूद्वीप का एक भाग है। जम्बूद्वीप सात संकेन्द्र महाद्वीपों का अंतरतम भाग है। जम्बूद्वीप के प्रथम राजा मनु थे। बाद में उनके पुत्र राजा प्रियवृत इसके शासक बने। मौर्य सम्राट अशोक सम्पूर्ण जम्बूद्वीप के राजा थे। आज भी हमारे संकल्प मन्त्र में जम्बूद्वीपे, भारतखंडे, भारतवर्षे, आर्यावर्ते जैसे नामों का जिक्र होता है। बौद्धों ने भारत शब्द का प्रयोग अत्यल्प किया है और जम्बूद्वीप का ज्यादा। बौद्ध दृष्टि अंतर्राष्ट्रीय भी थी और वे गांधार, सिंहल, रत्नद्वीप(वर्मा), सुवर्णद्वीप(मलय), महाचीन(तिब्बत और भूटान) को भी स्वदेश ही मानते थे और इसी से भारत के लिए जम्बूद्वीप शब्द का प्रयोग करते थे। पांचवीं शती तक भारतीय राष्ट्रीयता को भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक आधार प्राप्त हो चुका था। बौद्ध धर्म के माध्यम से भारतीय लिपि तथा भाषा का मध्य एशिया में प्रवेश हुआ। ब्राह्मी लिपि को वहाँ के राज्यों ने अपनाया तथा कुलीन वर्ग के लोगों ने संस्कृत भाषा को ग्रहण किया। विभिन्न स्थानों से संस्कृत में लिखी हुई बौद्ध रचनाओं की प्रतिलिपियाँ भी प्राप्त होती हैं। 

अखंड या वृहत्तर भारत : पुराणों में भारत की सीमाओं की निश्चित व्याख्या, उसके आकार का वर्णन, उसकी नदियां, पर्वतों एवं जनपदों की सूचियाँ दी गई हैं। अखंड या वृहत्तर भारत से तात्पर्य भारत से बाहर उस विस्तृत भूखण्ड से है जहाँ भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार हुआ तथा जिसमें प्राचीन भारतीयों ने अपने उपनिवेशों की स्थापना की। पाश्चात्य विश्व के साथ भारत का सम्पर्क मुख्यतः व्यापार-परक था किन्तु उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व के देशों में न केवल भारतीय सभ्यता का पूर्ण प्रचार हुआ, अपितु उनमें से अनेक में प्राचीन भारतीयों ने अपने राज्य भी स्थापित कर लिये थे। इस प्रकार वृहत्तर भारत का जन्म हुआ। 

प्राचीन भारत में 16 महाजनपद थे। इन महाजनपदों का समयकाल 600 ईसा पूर्व से लेकर 325 ईसा पूर्व तक माना जाता है। यह महाजनापद भारत में बिहार से लेकर अफ़ग़ानिस्तान तक फैले हुए थे। बौद्ध और जैन धर्म के प्रारंम्भिक ग्रंथों में महाजनपद नाम के सोलह राज्यों का विवरण मिलता है। मल्ला, वज्जि, कम्बोज और कुरु गणतांत्रिक राज्य थे जबकि मगध, कोशल, वत्स, अवन्ती, अंग, काशी, गांधार, शूरसेना, चेदि और मत्स्य स्वभाव से एकतांत्रिक थे। गांधार की राजधानी तक्षशिला थी। गांधार में पाकिस्तान के पश्चिमी भाग और पूर्वी अफ़गानिस्तान भी समाविष्ट थे। कम्बोज (कदाचित आधुनिक अफ़गानिस्तान) की राजधानी आधुनिक कश्मीर के राजपुरा में थी। इस राज्य में हिंदकुश समाविष्ट था।

वृहत्तर भारत के देशों का विभाजन दो भागों में कर सकते हैं। प्रथम भाग में मध्य एशिया, तिब्बत तथा चीन को रखा जा सकता है जबकि द्वितीय भाग के अन्तर्गत हिन्द-चीन तथा पूर्व द्वीप-समूहों की गणना की जा सकती है। मध्य एशिया के उत्तर में कूची तथा दक्षिण में खोतान भारतीय संस्कृति के प्रमुख केन्द्र थे जहां से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। मध्य एशिया के दक्षिणी राज्यों तथा भारत के उत्तरी-पश्चिमी भाग के बीच व्यापारिक सम्पर्क होने के कारण वहाँ भारतीय उपनिवेशों की स्थापना हुई। शीघ्र ही व्यापार का स्थान धर्म-प्रचार ने ग्रहण कर लिया। मौर्य शासक अशोक के धर्म-प्रचार ने भारतीय संस्कृति को मध्य एशिया में फैला दिया। उत्तरी-पश्चिमी सीमा से हिन्दूकुश पारकर अनेक भारतीय बौद्ध प्रचारक मध्य एशिया में जा पहुँचे। गुप्तकाल के प्रारम्भ तक बौद्ध धर्म मध्य एशिया के सभी भागों में पूरी तरह प्रतिष्ठित हो गया था।

सिकुड़ती गई सीमा : इतिहासकारों ने माना है कि 15 अगस्त, 1947 का विभाजन पहला और अंतिम विभाजन नहीं है। भारतीय सीमाओं का संकुचन उसके काफी पहले शुरू हो चुका था। प्राचीन काल में भारत बहुत विस्तृत था जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा, थाइलैंड आदि शामिल थे। कुछ देश जहाँ बहुत पहले के समय में अलग हो चुके थे वहीं पाकिस्तान (बांग्लादेश सहित) अंग्रेजों से स्वतन्त्रता के काल में अलग हुए। 1857 से 1947 के बीच अंग्रेजों ने भारत को सात बार विभाजित किया। 1857 में भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी था। वर्तमान भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किमी है।

तिब्बत को वेद और पुराणों में त्रिविष्टप कहा है जहां सबसे प्राचीन मानव रहते थे। प्राचीनकाल में तो तिब्बत सांस्कृतिक भारत या तत्कालीन हिंदू राष्ट्र का अंग था। तिब्बत स्थित कैलाश मान सरोवर भारत के अभिन्न अंग रहे हैं। तिब्बती साहित्य में भारतीय शासकों की एक लम्बी सूची मिलती है। भूटान सभ्यता की दृष्टि से भारत का ही अंग है। पाणिनि, गांधारी के समय अफगानिस्तान भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग था। यह गुप्त वंश, मौर्य वंश, कनिष्क, लगभग संपूर्ण मुग़लकाल, और महाराज रणजीत सिंह के समय भारत का अंग भी रह चुका है। अंग्रेजों के समय में सिख राज्य की समाप्ति के बाद अफ़गानिस्तान राजनैतिक रूप से भारत से अलग हो गया। 

बर्मा भी भारत का हिस्सा रहा है। बर्मा को ’म्यांमार’ के नाम से जाना जाता है। 1937 तक यानी भारत की आज़ादी के दस साल पहले तक ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और भारत की आज़ादी के चार महीने पहले तक भारत का रिज़र्व बैंक ही बर्मा का केन्द्रीय बैंक था। 1937 से, ब्रिटिश लोग बर्मा को भारत से अलग करके एक अलग उपनिवेश के रूप में शासन करने लगे। बर्मा ने 1948 में एक गणतंत्र के रूप में स्वतंत्रता प्राप्त की।

पाक अधिकृत कश्मीर : देश के बंटवारे के समय ही पाकिस्तानी सेना ने कबायलियों के साथ मिलकर हमला कर दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया। लगभग आधे कश्मीर पर आज भी पाकिस्तान का कब्जा है। इसे पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) कहते हैं। कश्मीर का क्षेत्रफल 36,315 वर्ग किमी है जबकि, इसके 13,297 वर्ग किमी का इलाका पाकिस्तान के कब्जे में है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जम्मू को डुग्गर प्रदेश कहा जाता था। 

अक्साई चीन : अक्साई चीन, जम्मू-कश्मीर का उत्तर-पूर्वी हिस्सा है और पूरे प्रदेश के क्षेत्रफल का करीब 20 प्रतिशत भाग है। यह क्षेत्र 1950 से चीन के कब्जे में है। चीन ने इसे प्रशासनिक रूप से शिनजियांग प्रांत के काश्गर विभाग के कार्गिलिक जिले का हिस्सा बनाया है। इसका क्षेत्रफल 37,244 वर्ग किलोमीटर है, जो स्विट्जरलैंड के बराबर है। लद्दाख का हिस्सा रहे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट पर भी चीन ने कब्जा कर रखा है।

भारत के लम्बे इतिहास के अंदर, भारत ऐसा देश बन गया जिसके दरवाजे सबके लिए खुले रहे। यहाँ अनेकानेक मानव-प्रजातियों का संगम हुआ। प्राक आर्य, भारतीय आर्य, यूनानी, शक, हूण और तुर्क आदि अनेक प्रजातियों ने भारत को अपना घर बनाया। भौगोलिक सीमाओं के सिकुड़ने के बावजूद भारत ही एक ऐसा देश है, जिसका अतीत कभी मरा नहीं। इस देश का अतीत कल भी जीवित था, आज भी जीवित है और कदाचित आगे भी जीवित रहेगा।

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links