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BIG NEWS : जवानों ने लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के किनारे 14 हजार फुट की ऊंचाई पर फहराया तिरंगा

Bhola Tiwari Aug 15, 2020, 12:17 PM IST टॉप न्यूज़
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टोनी पाधा

लद्दाख : आज पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है। जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ है। 


भारतीय-तिब्बत सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने लद्दाख क्षेत्र में स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट पैंगोंग त्से झील के किनारे झंडोत्तोलन कर एक महत्वपूर्ण संदेश सभी भारतीय नागरिकों को दिया है।


क्यों प्रसिद्ध है पैंगोंग त्सो झील

लद्दाखी भाषा में पैंगोंग का अर्थ है समीपता और तिब्बती भाषा में त्सो का अर्थ है झील। पैंगोंग त्सो लद्दाख हिमालय में 14,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित एक लंबी संकरी, गहरी, एंडोर्फिक (लैंडलॉक) झील है।

गौरतलब है कि इसी वर्ष जून के महीने में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पैंगोंग त्सो झील के समीप लद्दाख में तनाव की स्थिति देखने को मिली थी। लगभग दो साल पहले भी पूर्वी लद्दाख के क्षेत्र में इसी तरह की एक घटना हुई थी। इसकी वजह इस क्षेत्र में वास्तविक रूप से LAC कहां है, इसे लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। LAC के संबंध में अलग-अलग धारणाएं हैं। 

पैंगोंग त्सो का पश्चिमी छोर लेह के दक्षिण-पूर्व में 54 किलोमीटर दूर स्थित है। 135 किलोमीटर लंबी यह झील बुमेरांग (Boomerang) के आकार में 604 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है और अपने सबसे विस्तारित बिंदु पर यह 6 किलोमीटर चौड़ी है। खारे पानी की यह झील शीत ऋतु में जम जाती है। यह आइस स्केटिंग (Ice Skating) और पोलो के लिये सबसे अच्छा स्थान है। इसका जल खारा होने के कारण इसमें मछली या अन्य कोई जलीय जीवन नहीं है, लेकिन यह कई प्रवासी पक्षियों के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल है।


पैंगोंग त्सो झील का राजनीतिक महत्व

LAC यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पैंगोग त्सो झील के मध्य से होकर गुजरती है, लेकिन भारत और चीन इसकी सटीक स्थिति के विषय में सहमत नहीं हैं। इस झील का 45 किलोमीटर लंबा पश्चिमी भाग भारतीय नियंत्रण में, जबकि शेष चीन के नियंत्रण में आता है। दोनों भारत और चीन की सेनाओं के बीच अधिकांश झड़पें झील के विवादित हिस्से में होती हैं। हालांकि इसके इतर झील का कोई विशेष सामरिक महत्त्व नहीं है, लेकिन यह झील चुशूल घाटी के मार्ग में आती है। यह एक मुख्य मार्ग है जिसका चीन द्वारा भारतीय-अधिकृत क्षेत्र में आक्रमण के लिये उपयोग किया जा सकता है। साल 1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहां से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था। भारतीय सेना ने चुशूल घाटी (Chushul Valley) के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेज़ांग ला (Rezang La) से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था।

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