ब्रेकिंग न्यूज़
..विधायक बंधू तिर्की और प्रदीप यादव आज विधिवत कांग्रेस के हुए         मरता क्या नहीं करता !          14 साल बाद बाबूलाल मरांडी की घर वापसी, जोरदार स्वागत         जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी भाजपा में हुए शामिल, अमित शाह ने माला पहनाकर स्वागत किया         भारत में महिला...भारत की जेलों में महिला....          अनब्याही माताएं : प्राण उसके साथ हर पल है,यादों में, ख्वाबों में         कराची में हिंदू लड़की को इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग         बेतला राष्ट्रीय उद्यान में गर्भवती मादा बाघ की मौत !अफसरों में हड़कंप         बिहार की राजनीति में हलचल : शरद यादव की सक्रियता से लालू बेचैन          सीएम गहलोत की इच्छा, प्रियंका की हो राज्यसभा में एंट्री !         अनब्याही माताएं : गीता बिहार नहीं जायेगी          तेंतीस करोड़ देवी-देवताओं के देश में यही होना है...         केजरीवाल माँडल अपनाकर हीं सफलता प्राप्त कर सकतीं हैं ममता बनर्जी         28 फरवरी को रांची आएंगे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद         सत्ता पर दबदबा रखनेवाले जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर से लेकर तमाम शंकराचार्यों की जमात कहां हैं?          यही प्रथा विदेशों में भी....         इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया..         जालसाजी : विधायक ममता देवी के नाम पर जालसाज व्यक्ति कर रहा था शराब माफिया की पैरवी         वार्ड पार्षदों ने नप अध्यक्ष के द्वारा मनमानी किए जाने की शिकायत उपायुक्त से की         पुलवामा हमले की बरसी पर इमोशनल हुआ बॉलीवुड, सितारों ने ऐसे दी शहीदों को श्रद्धांजलि         बड़ी खबर : प्रदीप यादव के कांग्रेस में शामिल होते ही झारखंड की सरकार गिरा देंगे : निशिकांत         क्या सरदार पटेल को नेहरू ने अपनी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाने से मना कर दिया था?एक पड़ताल         वैलेंटाइन गर्ल की याद !         राजनीति में अपराधियों की एंट्री पर सुप्रीमकोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और याचिकाकर्ता को दिये जरूरी निर्देश         राजनीतिक पार्टियों को सुप्रीम कोर्ट का.निर्देश : उम्मीदवारों का क्रिमिनल रेकॉर्ड जनता से साझा करें         सभ्य समाज के मुँह पर तमाचा है दिल्ली की "गार्गी काँलेज" और "लेडी श्रीराम काँलेज" जैसी घटनाएं         पूर्वजो के शब्द बनते ये देशज शब्द         हिंदी पत्रकारिता में सॉफ्ट हिंदुत्व और संतों में लीन सम्पादक..         कांग्रेस में घमासान : प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को अपनी दुकान बंद कर देना चाहिए : शर्मिष्ठा मुखर्जी          एलपीजी सिलेंडर में बड़ा इजाफा : बिना सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर 144.5 रुपए महंगा         बैल-भैंस की नींद बनाम घोड़े की हिनहिनाहट          'मुफ्तखोरी' बनाम कल्याणकारी राज्य        

कम होते जा रहे हैं बांज के पेड़

Bhola Tiwari May 12, 2019, 7:09 AM IST टॉप न्यूज़
img

एस डी ओझा

मसूरी पोस्टिंग के दौरान मुझे अपने कैम्प का ब्रिटिश कालीन फोटो देखने को मिला था । इस कैम्प और आज के कैम्प में जमीन आसमान का अंतर है । ब्रिटिश कालीन फोटो में बहुत ऐसी जगहें हैं जहां पेड़ बिल्कुल भी नहीं हैं । इन खाली जगहों में आज कैम्प के भवन खड़े हैं । फिर भी बहुत से ऐसे खाली स्थान रह गये , जहां कोई भवन नहीं बने थे । ऐसी जगहें आज बांज के जंगलों से पूरी तरह से आच्छादित हो गयीं हैं । यह चमत्कार आई टी बी पी की वजह से हुआ है । हमने कभी किसी पेड़ को अनावश्यक नहीं काटा । कैम्प में तार बाड़ होने के कारण कोई बाहरी आदमी यहां पेड़ काटने नहीं आया । नतीजा सबके सामने है । हमारा पूरा कैम्प बांज के पेड़ों से लहलहा रहा है । जमीन अधिग्रहण के समय कैम्प में जितने बांज के पेड़ थे , उससे कहीं ज्यादा आज के दिन उनकी बढ़त हो गई है ।

बांज के पेड़ की ऊंचाई सौ से एक सौ पचास फुट तक हो सकती है । इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है । यह फर्नीचर और इमारतों में प्रयुक्त होता है । बांज के पेड़ों की लाइफ 200 से 300 साल तक होती है । पहाड़ी लोगों का विश्वास करें तो बांज के पेड़ हजार साल तक भी जीते हैं । ये पेड़ धीरे धीरे बढ़ते हैं । 20 साल बाद इनमें फल लगने शुरू होते हैं । ये फल मीठे या कड़वे दोनों तरह के होते हैं । मीठे फलों के पावडर से केक बनाया जाता है जो सुअरों को खिलाने के काम आता है । बांज का पेड़ पर्यावरण को दुरुस्त रखता है । बारिश का पानी इसकी जड़ों के माध्यम से भूमिगत होता रहता है । यह पानी जमीन के अंदर के भू स्तर को ऊंचा कर देता है , जिससे नदियाँ सदानीरा बनीं रहतीं हैं । बांज की पत्तियाँ जमीन पर फैल जातीं हैं , जिनके अंदर कई तरह के खेती के मित्र कीट आश्रय पातें हैं । जब इन पत्तियों पर पानी पड़ता है तो ये पत्तियाँ सड़कर खाद तैयार करतीं हैं ।

बांज की पत्तियों के माध्यम से भी बारिश का पानी भूमिगत होता रहता है , जो जल के भू स्तर को बढ़ाता है । बांज की पत्तियाँ गऊशाले में भी बिछाई जाती हैं , जहां पशुओं के मल मूत्र से ये खाद में परिवर्तित हो जातीं हैं । यह खाद किसान खेतों में उपयोग करतें हैं । बांज की जड़ें जमीन के अंदर दूर तक फैली होतीं हैं । ये जड़ें मिट्टी को कसकर पकड़ लेतीं हैं , जिससे मिट्टी का कटान नहीं होता है । बांज की हरी पत्तियाँ पशुओं के लिए चारा का काम करतीं हैं । ये पत्तियाँ पौष्टिकता से भरपूर होतीं हैं । बांज की सूखी लकड़ी ईंधन में प्रयुक्त होती है । बांज की लकड़ी से खेती के अनेकानेक औजार तैयार किए जाते हैं । इससे कुदाल , दरांती , गैंती के हत्थे और हल का फल तैयार किये जाते हैं । इसकी बहु उपयोगिता को देखते हुए इसे पहाड़ का हरा सोना भी कहतें हैं । बांज को अंग्रेजी में ओक कहा जाता है । यह अमेरिका , फ्रांस में राष्ट्रीय पेड़ घोषित किया जा चुका है । बांज पर कीट और फफूंद का असर नहीं होता है , इसलिए इसकी लकड़ी भवन निर्माण में प्रयुक्त होती है । इसकी सुंदरता को देखते हुए इसे पार्कों व घरों में लगाया जाता है ।

बांज अब जंगलों से धीरे धीरे गायब होता जा रहा है । ईंधन और चारे के नाम पर इसका बेजां इस्तेमाल हो रहा है । बार बार इसकी पत्तियाँ और टहनियां काटे जाने से ये पुनः पनप नहीं पाते और मात्र ठूंठ बनकर रह जाते हैं । ब्रिटिश काल में भी बांज के पेड़ों का बहुत नुकसान हुआ है । अंग्रेजों ने चीड़ के पेड़ लगवाए । हालाँकि चीड़ के पेड़ों की व्यावसायिकया पर मैं कोई प्रश्न चिन्ह नहीं खड़ा कर रहा हूँ , पर इससे बांज के पेड़ निराश्रित हो कर रह गये । रही सही कसर सरकारी महकमों ने पूरी कर दी । बांज के पेड़ों से कोयला उत्पादन होने लगा । कोयला सरकारी दफ्तरों को निर्गत किया जाने लगा ठंड से निजात पाने के लिए । अब बांज के जंगल काटकर चाय व फलों के बाग लगाए जाने लगे हैं । मैंने कुमाऊँ के बेरीनाग में चाय , आलू और सेब की खेती होते देखा है । खेती करनी अच्छी बात है , पर इसे बांज की लाश पर नहीं की जानी चाहिए । बांज पहाड़ी संस्कृति का हिस्सा रह चुका है । पहाड़ी औरतों ने इसकी उपयोगिता बहुत पहले समझ ली थी । वे गातीं हैं - 

नी काटा , नी काटा , झुमराली बांजा ;

बजांनी धुरो ठंडा पानी ।

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links