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बड़बोले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को शाह और ओवैसी ने "आईना" दिखाया

Bhola Tiwari May 11, 2019, 7:36 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

हिंदी फिल्म जगत के मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और एआईएमआईएम के संयोजक असुदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को करारा जवाब दिया है।चंद दिनों पहले वजीरेआजम पाकिस्तान ने एक जलसे में कहा था कि नसीरुद्दीन शाह ने मुस्लिमों के बारे में जो कहा,वह मोहम्मद अली जिन्ना बहुत पहले कह चुके थे।भारत में मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जाता है।वह प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी)को बताएंगे कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।

दरअसल इस बहस की शुरुआत अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक व्यक्तव्य से हुई,जिसमें उन्होंने देश में पनप रहे असहिष्णुता पर चिंता जताई थी।उन्होंने कहा था कि,"कई इलाकों में हम देख रहें हैं कि एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत से ज्यादा एक गाय की मौत को अहमियत दी जा रही है।ऐसे माहौल में मुझे अपनी औलाद के बारे में सोचकर फ्रिक होती है।"

नसीरुद्दीन शाह

आपकी चिंता जायज है नसीरुद्दीन शाह साहब,आप इस देश के सम्मानित नागरिक हैं और एक स्वस्थ लोकतंत्र में सभी को बोलने का अधिकार है साथ हीं साथ शांतिपूर्वक विरोध करने का भी अधिकार हमें संविधान द्वारा दिया गया है।आपके व्यक्तव्य पर खूब चर्चा हुई,कुछ ने आपके पक्ष में लिखा तो कुछ ने विरोध में।ये हमारा आंतरिक मामला है और हम आपस में मिल बैठकर इसे निपटा लेंगे मगर इस मामले में किसी दूसरे देश के शीर्ष नेता की दखलंदाजी कहाँ तक जायज है ये बड़ा सवाल है।

इसका जवाब स्वयं नसीरुद्दीन शाह साहब ने बड़े जोरदार ढ़ंग से दिया है।उन्होने पाकिस्तान के वजीरेआजम इमरान खान को नसीहत देते हुए कहा कि,"मुझे लगता है कि मिस्टर खान को सिर्फ उन मुद्दों पर हीं बात करनी चाहिए जो उनके देश से संबंधित है, न कि उन मुद्दों पर जिनका उनसे वास्ता ही नहीं है।हम पिछले 70 सालों से एक लोकतंत्र हैं और जानते हैं कि हमें अपनी देखभाल कैसे करनी है।"

नसरुद्दीन शाह

इसी तरह एआईएमआईएम के संयोजक असुद्दीन ओवैसी ने इमरान खान को सलाह दी है कि,"इमरान खान को सिर्फ उन्हीं मुद्दों पर बोलना चाहिए, जिसका उनसे कोई वास्ता हो।वहाँ एक मुस्लिम हीं राष्ट्रपति बन सकता है लेकिन भारत में कई अल्पसंख्यक समुदाय से राष्ट्रपति बन चुके हैं।ये बिल्कुल सही समय है खान साहब हमसे हमारी विविधता और अल्पसंख्यकों को अधिकार देने के तरीके से कुछ सीखने का।"

इमरान खान

इमरान खान साहब पहले अपने मुल्क की हालात तो देख लें,1947 में जब पाकिस्तान बना था तब वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी 23% थी जो दुर्भाग्यवश आज घटकर 2.5% रह गई है।पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ शुरू से ज्यादती की जाती रही है,हिंदू लड़कियों को जबरन साजिशन धर्मपरिवर्तन कराया जाता है।हिंदू देवी-देवताओं के असंख्य मंदिरों को तोड़ा गया है।ईशनिंदा का झूठा इल्जाम लगाकर वहाँ के दबंग अल्पसंख्यकों के जमीनों पर जबरन कब्जा करते हैं।

इमरान खान को ये भी सोचना चाहिए कि क्यों पाकिस्तान से अल्पसंख्यकों का पलायन हुआ है और आज भी जारी है।सवाल उठाने पर इसका भी जवाब देना आपका दायित्व बनता है और मुझे उम्मीद है कि आप जवाब देंगे।खान साहब जब आप प्रधानमंत्री बने थे तो भारत ने बड़ी उम्मीदें आपसे रखीं थीं मगर लगता है आप भी "लकीर के हीं फकीर" हैं।जो प्रोपेगैंडा आपके पूर्वर्ती शासक करते आएं हैं आप भी उसी रास्ते पर चल पड़ें हैं।हुजूर हमारे यहाँ देश के सर्वोच्च पदों पर योग्यता के अनुसार लोग पहुँचते हैं न कि केवल एक धार्मिक समुदाय के लोग।

आज भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी लगातार बढ़ रही है जो ये दर्शाती है कि यहाँ वे सुरक्षित हैं, आपको या किसी दूसरे मूल्कों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं।हमारा मसला है और हम इसे सुलझा लेंगे खान साहब।

नसरुद्दीन शाह की चिंता बिल्कुल वाजिब है और मैं अक्षरतः सहमत हूँ मगर आपको भीडतंत्र की हिंसा के पिछे का कारण भी ढूंढना होगा।अधिकांश घटनाओं में भीड़ द्वारा हिंसा "गोमांस" के लिए होती है,कुछ सिरफिरे प्रतिबंधित गोमांस का व्यापार करते हैं और हिंदू गाय को अपनी माता और भगवान मानता है।मेरी गुजारिश है अल्पसंख्यक समुदाय के बुद्धिजीवियों से कि वे एक अपील जारी करें कि सभी गोमांस का सेवन बंद कर दें,शायद उनके अपील का असर दिखे।नसीरुद्दीन शाह से मेरी केवल एक हीं शिकायत थी कि वे भीडतंत्र की हिंसा के पिछे कारण तो खोजते और एक जोरदार अपील करते कि जो भी गोमांस का व्यापार कर रहें हैं या खा रहें हैं वो बंद कर दें।

आपको बता दें दक्षिण भारत, नार्थईस्ट में तो खूलेआम गोमांस खाया जाता है बेचा जाता है, मगर उत्तर भारत और मध्यभारत में ये जानवर को काटना,गोमांस का व्यापार प्रतिबंधित है, कम से कम यहाँ तो ये बंद होना हीं चाहिए।इसी वजह से अनूमन यहाँ माँबलिचिंग होती है।कभी कभी बेकसूर भी इसका शिकार हो जाते हैं जो दुखद है।भीडतंत्र द्वारा धटनास्थल पर दिया गया न्याय गलत है और सभी को इसकी निंदा करनी चाहिए।

कुछ लोगों ने नसीरुद्दीन शाह को पाकिस्तान जाने की सलाह दी है मेरी उनसी गुजारिश है कि वे स्वंय चले जाएं।जितना ये आपका देश है उतना हीं नसीरुद्दीन शाह का भी है।वे भारत के सम्मानित नागरिक हैं और उन्हें अपनी चिंता व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।

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