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पूर्वी उत्तर प्रदेश अब तय करेगा दिल्ली का बादशाह कौन

Bhola Tiwari May 11, 2019, 6:53 AM IST पॉलिटिकल
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अजय श्रीवास्तव

पूर्वी उत्तर प्रदेश में अब दो चरण के चुनाव बचे हैं जिसमें गठबंधन का भाजपा से कडा मुकाबला होगा।पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में शानदार सफलता हासिल की थी।पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुल 27 सीटें हैं जिसमें बसपा 17 सीटों पर और सपा 10 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 

अधिकांश ग्रामीण सीटों पर बसपा चुनाव लड़ रही है तो शहरी सीटों पर सपा ताल ठोक रही है।अब अखिलेश यादव के सामने ओबीसी वोटों को बसपा के खाते में ट्रांसफर कराने का समय है,मायावती ने तो अपना वोट सहजतापूर्वक सपा के खाते में स्थांतरण करा दिया है।बसपा के उदय से हीं ओबीसी और दलितों में संघर्ष होता आया है और पिछले चुनाव तक ये बदस्तूर जारी था।इस बार सपा-बसपा गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है,अब ये जिम्मेदारी अखिलेश यादव पर है कि वो कैसे खासकर यादव मतदाता को बसपा के लिए वोटिंग कराने के लिए तैयार करते हैं।अगर खुदा न खास्ता ओबीसी वोट बसपा को ट्रांसफर नहीं हुआ तो ये गठबंधन की भविष्य पर बडा प्रश्नचिन्ह लगाएगा।सभी जानते हैं मायावती कभी घाटे का सौदा नहीं करतीं।

मायावती ने सार्वजनिक मंच से मुलायम सिंह यादव को पिछडों का सबसे बड़ा नेता कह ओबीसी वोटों को साधने की कोशिश की थी।मुलायम सिंह यादव ने भी गठबंधन को वोट देने की अपील की थी।यही 27 सीट भाजपा और गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन सीटों के दम पर हीं दिल्ली में प्रधानमंत्री पद का फैसला होगा।भाजपा ने भी अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है क्योंकि पिछली बार अधिकांश सीटें उनके पास हीं थी।

गठबंधन का भविष्य और दिल्ली में नरेंद्र मोदी की दावेदारी पूर्वी उत्तर प्रदेश की ये 27 सीटें तय करेगी,इसमें किसी को शक नहीं होनी चाहिए।

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