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आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना

Bhola Tiwari May 11, 2019, 6:23 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

भेड़ियों के बारे में प्रसिद्ध है कि इन्हें पालतू नहीं बनाया जा सकता , लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आज से 15/20 हजार साल पहले कुत्ते भी भेड़िये थे ।भेड़िये हीं आज कुत्ते बन हमारे घर आंगन में ऊधम मचा रहे हैं । इसका मतलब यह हुआ कि कुत्तों के पूर्वज भेड़िये थे । जब भेड़िये कुत्ते बन हमारी सुरक्षा कर सकते हैं तो भेड़िये भेड़िये रहकर हमारी सुरक्षा क्यों नहीं कर सकते ? वैसे भी भेड़ियों की आदतें इंसानों से मिलतीं हैं । इनमें भी इंसानों की तरह ही पति पत्नी और बच्चे का कम्विनेशन होता है । अंतर इतना होता है कि इनमें पति पत्नी के साथ "वो " का कांसेप्ट नहीं होता । ये मिल जुलकर शिकार करते हैं । मिल बांट कर खाते हैं । बच्चों का खाना उनकी मांद तक पहुंचा दिया जाता है ।

कजाखस्तान में लोगों ने अपनी सुरक्षा के लिए भेड़िये पाल रखे हैं । इन्हें जंजीरों से नहीं बांधा जाता । इनका खुल्लम खेल फर्रुखाबादी होता है । ये खुले तौर पर घर आंगन में घूमते रहते हैं । एक भेड़िये का बच्चा 500 डालर में मिल जाता है । एक बात पते कि यह है कि ये कुत्तों से ज्यादा खाना खाते हैं । इसलिए इन्हें पालने वाले मोटे आसामी होते हैं जो इनका खर्च आसानी से वहन कर लेते हैं । इन भेड़ियों की दोस्ती पड़ोसी कुत्तों से हो रही है , जो कि सर्व धर्म समभाव का द्योतक है । इतना सब कुछ होते हुए भी विशेषज्ञ इसे ठीक नहीं मानते । उनका कहना है कि भेड़िये कभी भी अपने भेड़ियेपन पर उतर सकते हैं । ऐसे में उनकी इंसानों से दोस्ती का रिश्ता तार तार हो जाएगा । पालतू कुत्ते भी कुछ नहीं कर पाएंगे । उन पर भेड़िये उन्नीस की बजाए बीस पड़ेंगे । 

भेड़िये कभी अफ्रीका, अमेरिका और पूरे यूरेशिया में होते थे । जैसे जैसे जंगल कटते गये और मानव आबादी बढ़ती गयी भेड़िये घने जंगलों में सिमटते गये । हालत यह हुई कि जर्मनी भेड़िया विहीन हो गया । बहुत सालों बाद खबर मिली कि भेड़िये जर्मनी लौट आए हैं । अब वे जर्मनी के सैन्य ठिकानों के आस पास अपनी कालोनियां बसा रहे हैं । जब सैन्य अभ्यास के दौरान सैनिकों की गोलियां चलतीं हैं तो भेड़िये बेफिकर रहते हैं । उन्हें पता होता है कि ये गोलियाँ उन्हें टारगेट कर नहीं चलाईं जा रही हैं । कभी कभार भेड़िये आस पास के गाँवों पर आक्रमण कर देते हैं । वे ग्रामीणों के मवेशियों को मारकर खा जाते हैं । भेड़ियों के शिकार पर वैन है । इसलिए लोअर कोर्ट ने यह आदेश किया है कि जो भेड़िया 40 से ज्यादा मवेशियों को मार चुका है तो उसे मारा जा सकता है , लेकिन इसमें भी एक पेच है । आपको यह साबित करना होगा कि आपने जिस भेड़िये को मारा है उस पर 40 कत्ल का वाकई में इल्जाम था । 

निक जोंस एक अलास्कन वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर व लेखक हैं । उन्होंने अपनी पत्नी के साथ घने जंगल के करीब अपनी रिहाइश बनायी थी । उनके साथ उनकी प्यारी कुतिया भी थी । इस कुतिया का एक जंगली भेड़िये से इश्क हो गया । वह भेड़िया उस कुतिया से मिलने रोज आने लगा । दोनों साथ साथ रहते । खेलते कूदते । जब मन भर जाता तो भेड़िया घने जंगलों में लौट जाता । निक जोंस ने उस भेड़िये का नाम रोमियो रख दिया था । वैसे रोमियो अपनी जुलियट से मिलने आता है यह बात सारी दुनिया को मालूम हो गयी थी । आस पास के कुत्ते भौंकने लगे । लेकिन इन दोनों का मिलन कोई रोक नहीं पाया । हारकर इन कुत्तों ने भी इन रोमियो जूलियट से दोस्ती कर ली । सब गवाह हो गये इनके प्यार के । इनका प्यार छः साल तक चला । एक दिन वह भेड़िया मरा हुआ मिला । किसी ने उसके सिर में गोली मारी थी । आदमी इंसान से भेड़िया बन गया था ।


 बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना ,

आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना ।

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