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जाने वाले तू हमें याद बहुत आएगा

Bhola Tiwari May 10, 2019, 7:06 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

नैनो कार रतन टाटा की ड्रीम प्रोजेक्ट था । वे चाहते थे कि स्कूटर पर बैठने वाले भी कार में बैठें । यह कार सही रुप में मध्यम वर्ग के लिए बनायी गयी थी । इसीलिए इसका नाम लखटकिया पड़ा । इसमें मध्यम वर्ग के बजट का ध्यान रखा गया था । नैनो कार ने अपने जीवन के शुरुआत में हीं कई उतार चढ़ाव देखे हैं । पहले इसका निर्माण पश्चिम बंगाल के सिंगूर में किया जाना था । इस उद्देश्य के लिए 997 एकड़ भूमि भी अधिगृहित कर ली गयी थी । लेकिन किसान इसका जम कर विरोध कर रहे थे । अधिग्रहण से पहले सिंगूर की इस जमीन में धान की खेती हुआ करती थी । अधिग्रहण हो जाने के पश्चात किसान अपने को ठगा सा महसूस करने लगे । उनके बच्चों के मुंह का निवाला छीन गया था । किसानों का विरोध उग्र हो गया । हार कर रतन टाटा को नैनों का कारवाँ गुजरात लाना पड़ा ।

नैनो कार बनाने की घोषणा रतन टाटा ने 18 मई 2006 को की थी । मध्यम वर्ग में खुशी की लहर दौड़ गयी । दुपहिया वाहनों की अपेक्षा यह कम प्रदूषण फैलाती । लोगों को आस बंधी कि उन्हें कार में बैठने का मौका मिलेगा । मार्च 23 , 2009 को इसका पहला माॅडल लांच किया गया । कार बहुत क्यूट थी । यह बहुत हीं सुविधा जनक कार थी । इसकी कुल कीमत 1 , 67 , 000 के लगभग बतायी गयी । लोगों में इसका बहुत क्रेज था । धनाढ्य लोग भी इसे खरीदने लगे । इसकी लुक बड़ी शानदार थी । अरुणांचल के राज्यपाल के पास भी यह कार हमने देखी थी । वे इसे केवल इटानगर शहर में हीं घुमाते थे । जिधर देखो नैनो का हीं जलवा था । गुजरात पहुँचने के बाद इसके उत्पादन में और बढोत्तरी हुई । एक तरह से नैनो स्टेट्स सिम्बल बनकर उभरी ।

नैनो को मिली रिस्पांस से रतन टाटा उत्साहित हो गये । उन्होंने दुनिया की इस सस्ती कार को दुनिया की सबसे महंगी कार बनाने की सोची । उन्होंने 23 करोड़ की एक कार लांच की । यह कार 80 किलो सोना , 15 किलो चांदी और तरह तरह की मीनाकारी से सजी संवरी थी । सोना भी खरा 22 कैरेट का था । यह 2011 की सबसे महंगी कार थी । उन दिनों केवल दो माॅडल x-t और x-e बाजार में उतारने की कवायद की गयी थी । इन दोनों माॅडलों को बनाने में मात्र 8 माह का समय लगा था। अब नैनो सस्ती के साथ साथ महंगी भी हो गयी थी । इसे अब शान की सवारी माना जाने लगा । नैनो अब हर दिल अजीज बन गयी । इसे पाने के लिए लोग टाटा मोटर्स के दफ्तर का चक्कर काटने लगे थे ।

जो चीज जितनी जल्दी ऊपर चढ़ती है , उतनी हीं जल्दी नीचे भी आती है । नैनो के कद्रदान घटने लगे । अब नैनो कार भारतीयों की पहली पसंद नहीं रह गयी । इसकी खरीद में कमी आ गयी । इसके उत्पादन लागत के बढ़ जाने के कारण यह मध्यम वर्ग की सवारी नहीं रह गयी थी । उत्पादन लागत बढ़ने का मूल कारण उत्सर्जक नियमों में आया बदलाव था । 2020 में और उत्सर्जक नियम (BS- 6 ) आने वाले हैं । इन नियमों के पालन करने में नैनो की उत्पादक लागत और बढ़ेगी । रतन टाटा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में अब नए निवेश की कोई गुंजाइश नहीं है । कभी मध्यम वर्ग के दिलों पर राज करने वाली यह कार अब अपने पहचान की मोहताज बनकर रह गयी है । टाटा मोटर्स इसे 2020 में बंद करने जा रही है ।

अलविदा नैनो , तुमको हम कभी भूल नहीं पाएंगे । नैनो की विदाई की इस बेला में " उबैदुल्लाह अलीम " का एक शे'र अर्ज है -

आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगा ,

जाने वाले तू हमें याद बहुत आएगा ।

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