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डॉ निशिकांत दुबे और प्रदीप यादव की जाति समीकरण डॉ आशा बिगाड़ सकती है ।जाने कौन सा समीकरण भारी पड़ेगा?

Bhola Tiwari May 09, 2019, 5:00 PM IST टॉप न्यूज़
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 रिपोर्ट : अजय कुमार 

 रांची : संथाल का गोड्डा लोकसभा प्रदेश बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। सियासत के कई दिग्गज नामों की मौजूदगी से यहां की बिसात एक बार फिर बेहद दिलचस्प हो गई है। वैसे आजादी के बाद से ही हर चुनाव में इस इलाके की भूमिका बेहद रोचक रही है। सियासत में कहावत है कि राजनीत में कोई नीत नहीं होती गोड्डा सीट कांग्रेस, बीजेपी के बीच टक्कर रही है। 1962 ऑर 1967 के चुनाव में कांग्रेस के प्रभु दयाल जीते थे। 1971 ओर 1977 के चुनाव में के नेता जगदीश मंडल जीते 1977 चुनाव में भारतीय लोकदल से लड़े चुनाव जीते । 1980, 1984 मे इस सीट से मौलाना समीउद्दीन जीत दर्ज की थी 1989 में इसी सीट से बीजेपी के उम्मीदवार जनार्दन यादव ने चुनाव जीती वही 1991 में आम चुनाव में जेएमएम के नेता सूरज मंडल ने कांग्रेस और बीजेपी को धूल चटा दी । इसके बाद फिर बीजेपी की वापसी 1996 और 1998 , 1999 के चुनाव में बीजेपी जगदंंबी प्रसाद यादव लगातार चुनाव जीत दर्ज की, 2000 के चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार प्रदीप यादव ने जीत हासिल की थी 2004 में कांग्रेस इस सीट पर फुरकान अंसारी ने कब्जा जमाया। 2009 और 2014 के चुनाव में बीजेपी नेता डॉ निशिकांत दुबे ने सीट कब्जा किया लगभग हर चुनाव में वही दो ही पार्टियां सत्ता में काबिज हुई या लेकिन लगातार चुनाव में बीजेपी किंग मेकर साबित हुई है जिसमे पिछड़ी जातियों का अपार समर्थन मिला। वेसे तो संतालपरगना जेएमएम का गढ़ माना जाता है ऎसे में गोड्डा लोकसभा बीजेपी के किला है निशीकांत दुबे तीसरी बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं।, महागठबंधन के प्रत्याशी प्रदीप यादव बीजेपी को चुनौती दी है। वहीं डॉ आशा साहू (माकड़े) पिछड़ा समाज पार्टी यूनाइटेड से चुनाव लड़ रही है वे भी इसी इलाके में पूरा दमखम लगा रही हैं। एनडीए, महागठबंधन के खिलाफ खड़ी है अब यहां से अटकलें लगाई जा रही डॉ आशा साहू निशिकांत दुबे और प्रदीप यादव की पूरी समीकरण बिगाड़ देगी । अबकी बार मुकाबला सबसे दिलचस्पः गोड्डा सीट की अहमियत सभी जानते हैं। इसीलिए पिछले दस सालों में संसदीय क्षेत्र में डॉ निशिकांत दुबे ने कई कार्य किए हैं महागठबंधन, देवघर ब्राह्मण समाज बगावत निशीकांत दुबे को कड़ी चुनौती मिल रही है मौके की नजाकत को देखते हुए पिछड़ा समाज पार्टी से यूनाइटेड डॉक्टर आशा साहू शतरंज की चाल चली चुनाव के मैदान में उतरी है उनका मानना है कि गोड्डा लोकसभा क्षेत्र वैश्य समाज से सभी पार्टियों ने दूरी बनाई है उसे सिर्फ वोट बैंक का इस्तेमाल किया है उन्हे उभरने का मौका नहीं दिया है उनका कहना है कि अगर मैं जीती हूं अत्यंत पिछड़ी जाति, आदिवासियों एवं महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करेंगी महिलाओं को सभी सेक्टर में 50% का आरक्षण की लड़ाई लडूंगी। इस क्षेत्र को कृषि औद्योगिक दर्जा देने का प्रयास होगा। गोड्डा लोकसभा सीट पिछड़ी जातियों और मुस्लिम वोटरों का दबदबा है अनुसूचित जनजाति 11% और अनुसूचित जनजाति 12% है पिछड़ी जातियों को गोलबंदी के कारण बीजेपी यहां से अच्छा प्रदर्शन करने मे सफल हुई है डॉ आशा साहू पिछड़ी जाति, वैश्य समाज से आती है अगर चुनाव में पिछड़ी जातियों एवं अल्पसंख्यक वोटरों का समर्थन मिला तो निशीकांत दुबे प्रदीप यादव का समीकरण बिगाड़ सकती है दूसरी तरफ गिले-शिकवे भुलाकर अल्पसंख्यक एवं पिछड़ी जाति एवं आदिवासी समर्थन के लिए वोट मांग है डॉ आशा पर मतदाताओं का भरोसा मुकाबले को सबसे दिलचस्प बना देगा। 

क्या कहते हैं यहां के जातिगत समीकरणः

वैसे तो देश के अधिकांश इलाकों में राजनीति में जातिगत समीकरण खासे मायने रखते हैं। लेकिन बिहार के बाद झारखंड में भी जातियों की गोलबंदी का सबसे ज्यादा चलन गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में देवघर मधुपुर जामताड़ा दुमका महागामा आदि क्षेत्रों में दलितों-मुस्लिमों का प्रभाव सवर्ण-ओबीसी से ज्यादा है इस समीकरण पर सभी की निगाहें टिकी हुई है।

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