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रोजगार और नौकरी में अंतर

Bhola Tiwari May 07, 2019, 5:46 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि बेरोजगारी की समस्या का समाधान हर किसी को नौकरी देकर नहीं किया जा सकता।उन्होंने आगे कहा कि रोजगार और नौकरी में अंतर है।नौकरियों की सीमाएं हैं और इसीलिए रोजगार का सृजन किसी भी सरकार की आर्थिक नीतियों का अहम हिस्सा होता है।

नितिन गड़करी का कहना बिल्कुल वाजिब है,इतने बड़े देश में सभी बेरोजगारों को नौकरी नहीं दी जा सकती, हमें रोजगार के लिए संशाधन तलाशने होंगे।लघु एवं कुटीर उद्योग जो जीएसटी के कारण हासिये पर लग गए हैं उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे।सिर्फ कागजों पर ये घोषणा कर देना कि सरकार ने लघु एवं कुटीर उद्योगों के बढावे के लिए बैंकों को ऋण देने के लिए कह दिया है, इतने भर से कुछ न होगा।सभी जानते हैं बैंकों से ऋण लेने की प्रक्रिया कितनी जटिल है।स्थानीय बैंकों को गाँवों, कस्बों में चौपाल लगाकर बेहद सरल तरीकों से बेरोजगारों को आसानी से ऋग देने का प्रावधान करना होगा।

विभिन्न समय में विभिन्न सरकारें बस घोषणा कर चुप बैठ जाती हैं, योजना का लाभ सही व्यक्ति को मिल रहा है या नहीं देखने की फुरसत न तब थी न हीं अब है।

सही मायने में वास्तविक विकास तब हीं संभव है जब देश के युवा जो हमारे देश की शक्ति हैं वे नौकरी या स्वरोजगार में लगें।आप जम्मू कश्मीर की हालत देख लिजिए, वहाँ आतंकवाद के विभिन्न कारणों में बेरोजगारी भी एक प्रमुख कारण है।केन्द्र और राज्य सरकारों ने समय समय पर वहाँ के बेरोजगारों को मुख्यधारा में वापस लाने की तमाम कोशिशें की हैं मगर आतंकियों के आका और पाकिस्तानी रहनुमा जानते हैं कि अगर कश्मीर के युवा नौकरी या स्वरोजगार में लग गये तो उनकी मुहिम दम तोड देगी,यही वजह है कि अब आतंकवादी सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को मार रहे हैं और उनके भय से कई लोग जो जम्मू कश्मीर पुलिस में हैं या मिलेट्री में हैं,बड़े पैमाने पर त्यागपत् दे रहें हैं।

केन्द्र और राज्य सरकार दोनों को सरकारी क्षेत्र में,अर्द्धसरकारी क्षेत्र में,प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के अवसर बढाने होंगे और साथ साथ स्वरोजगार योजना को और प्रभावी बनाना होगा।लघु एवं कुटीर उद्योगों को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए सार्थक प्रयास करने होंगे।

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