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संगम के पूरे हुए 55 साल

Bhola Tiwari May 05, 2019, 6:57 AM IST टॉप न्यूज़
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 एस डी ओझा

संगम फिल्म में दो इण्टरवल थे । 238 मिनट लम्बी यह फिल्म त्रिकोणीय प्यार पर आधारित थी । इस फिल्म में दो दोस्त एक हीं लड़की के प्यार में गिरफ्तार होते हैं । लड़की (बैजयन्ती माला ) राजेन्द्र कुमार को चाहती है । राज कपूर को मुगालता है कि बैजयन्ती माला उसे चाहती है । असलियत राजेन्द्र कुमार को पता है , पर वह अपने दोस्त राज कपूर की वजह से अपना प्यार कुर्बान कर देता है । बैजयन्ती माला भी अपने प्यार राजेन्द्र कुमार के कहने पर अपना प्यार छुपा लेती है । वह बड़े बेमन से राज कपूर की हो जाती है । इस पूरे प्रकरण में बैजयन्ती माला के किरदार को कोई अहमियत नहीं दी गयी कि आखिर वह क्या चाहती है ? राजेन्द्र कुमार ने त्याग किया तो वह राज कपूर की हो गयी । जब राज कपूर पर इस राज का खुलासा हुआ तो वह राजेन्द्र कुमार के लिए त्याग करने लगे । वह बैजयन्ती व राजेंद्र को एक दूजे के साथ रहने और उनके सुखद जीवन की दुआ करने लगे । गोया वह औरत न होकर वह कोई वस्तु हो । उसका काम केवल पेण्डुलम की भांति इस पाले से उस पाले में घूमना भर रह गया हो ।

जैसा कि त्रिकोणीय प्यार में अक्सर होता है । एक को दुनियां छोड़नी पड़ती है । राजेन्द्र कुमार को भी दुनियां छोड़नी पड़ी । दर्शकों की सहानुभूति राजेन्द्र कुमार के साथ रही । वैसे राजेन्द्र कुमार का अभिनय भी शानदार था । उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के पुरस्कार का नामांकन मिला था । बैजयंती माला का भी अभिनय मंजा हुआ था । उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब मिला । राज कपूर को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामित किया गया था , पर वे फिल्म के निर्देशक भी थे । इसलिए वे अपने अभिनय के साथ वांछित न्याय नहीं कर पाए । राज कपूर को केवल सर्व श्रेष्ठ निर्देशक के पुरस्कार से हीं संतोष करना पड़ा था ।सर्व श्रेष्ठ गायक के पुरस्कार का नामांकन मुकेश की झोली में गिरा । उनका गाया गाना " दोस्त दोस्त ना रहा ,,, " भावना प्रधान गीत था । इस गीत के लिए शैलेंद्र को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का नामांकन मिला था । इस फिल्म के संगीत के लिए शंकर जयकिशन को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार नहीं मिल पाया । उसी साल दोस्ती फिल्म भी आई थी । इस फिल्म में संगीत कार लक्ष्मीकांत प्यारे लाल की जोड़ी थी । लक्ष्मीकांत प्यार लाल को दोस्ती फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार की उपाधि से नवाजा गया था ।

1964 में बनी संगम फिल्म साल की सबसे कमाई करने वाली फिल्म बनी थी । यह राज कपूर की पहली रंगीन फिल्म थी । संगम से हीं विदेशों में शूटिंग करने की परम्परा चली थी । संगम के बाद विदेशों में शूटिंग की हुई फिल्मों की लाइन लग गयी थी - एन ईवनिंग इन पेरिस , लव इन टोकियो , एराऊण्ड दि वर्ल्ड आदि । इस फिल्म को राज कपूर 40 के दशक में हीं बनाना चाहते थे । फिल्म का नाम भी तय हो गया था - घरौंदा । राज कपूर , नर्गिस और दिलीपकुमार जैसै सितारों का चयन भी हो 

चुका था । किसी कारण वश यह फिल्म नहीं बन सकी । 1962 में राज कपूर ने इस थीम पर फिर काम करना शुरू किया । फिल्म का नाम रखा " संगम " । उस समय तक नर्गिस ने अपना घर बसा लिया था । उन्होंने फिल्मों को अलविदा कह दिया था । दिलिप कुमार ने इस फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया , जब कि राजकपूर ने कहा था कि वो कोई भी मन माफिक रोल ले सकते हैं । फिर देवानंद से सम्पर्क किया गया । देवानंद ने भी दिलीपकुमार की छोड़ी हुई इस फिल्म में काम करने से मना कर दिया । अंततोगत्वा यह रोल राजेन्द्र कुमार की झोली में आ गिरा । संगम ब्लाॅक बस्टर हिट हुई ।


                                           - क्रमशः

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