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घाना की बातें घना

Bhola Tiwari May 05, 2019, 6:50 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

आज से एक हजार वर्ष पहले पश्चिमी सूडान के घाना क्षेत्र से कुछ लोग पश्चिम अफ्रीका में आए थे । यहां आकर इन लोगों ने इसका नाम भी घाना रख दिया । घाना शब्द का मतलब है - लड़ाकू राजा । 15वीं शताब्दी में पुर्तगालियों ने व्यापार के लिए यहां डेरा डाला । 1874 में अंग्रेज भी यहां पधारे । उसी समय यहां सोने की खानें मिलीं थीं । इसलिए अंग्रेजों ने इस जगह का नाम घाना की बजाय गोल्ड कोस्ट रख दिया । कुछ दिनों के बाद गोल्ड कोस्ट में अंग्रेजों का उपनिवेश स्थापित हो गया । समय बदला । 1957 में गोल्ड कोस्ट आजाद हुआ । पूरे गोल्ड कोस्ट को दुबारा "घाना " नाम मिला ।

ग्लोबल पीस इंडेक्स द्वारा घाना को अफ्रीका के सबसे शांतिपूर्ण देश का दर्जा मिला है । घाना में सभी धर्मों के लोग मिल जुलकर रहते हैं । इसमें विभिन्न धर्म के मतावलम्बी इस तरह से हैं-  

ईसाई- 71•2%

मुस्लिम- 23▪6%

अन्य- 5•2 %

यहां हिन्दू धर्म के मतावलम्बी भी हैं, जो अन्य कैटेगरी में आते हैं । यहाँ की कुल आबादी ढाई करोड़ के लगभग है, जिनमें 15 हजार हिन्दू हैं । ताज्जुब की बात यह है कि इन 15 हजार हिंदुओं में से केवल ढाई हजार हीं भारतीय मूल के हैं । शेष अफ्रीकी मूल के हैं । अफ्रीकी मूल के लोगों को हिन्दू धर्म की तरफ आकर्षित कराने का श्रेय स्वामी घनानंद सरस्वती को जाता है । स्वामी घनानंद सरस्वती खुद अफ्रीकी मूल के हैं । इनको हिन्दू धर्म के बारे में जानने की उत्कट इच्छा हीं इन्हें भारत के ऋषिकेश खींच ले आई । वहां इन्होंने एक आश्रम में हिंदू धर्म की दीक्षा ली और स्वामी घनानंद सरस्वती के नाम से मशहूर हुए । घाना में हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार में हरे कृष्ण सम्प्रदाय का भी अहम हाथ है ।

घाना में महात्मा गांधी के विचारों को मानने वाले बहुत से लोग हैं । महात्मा गांधी 20वीं शताब्दी की महान हस्तियों में से एक हैं । 2016 में घाना की एक यूनिवर्सिटी में भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महात्मा गांधी की एक मूर्ति का अनावरण किया था । बड़े दुःख का विषय है कि 14 दिसम्बर 2018 को यह मूर्ति कुछ सिरफिरों द्वारा हटा ली गयी है । उनका कहना है कि गांधी एक नस्लभेदी थे । उनका यह भी कहना है कि गांधी के बदले में स्थानीय नायकों की मूर्तियाँ लगानी चाहिए । गांधी ने जो अफ्रीका वासियों के लिए किया , वह अतुलनीय है । उनके पासंग में भी कोई स्थानीय नायक खड़ा नहीं हो सकता । गांधी का कृत्य अफ्रीका वासियों के लहू में विद्यमान है । इसे लाख चाहकर भी अलग नहीं किया जा सकता ।

किताब -ए- जीस्त से मुझे मिटा न पाओगे, 

वरक वरक पे मेरा इक्तिवास रहता है ।

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