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आज केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील पर जवाबी हलफनामा दाखिल किया

Bhola Tiwari May 05, 2019, 6:45 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

पिछले मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट में केन्द्र सरकार की तरफ से पेश अटार्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से चार हफ्ते का समय मांगा था लेकिन कोर्ट ने सख्ती करते हुए कहा कि हर हाल में शनिवार तक जवाब दाखिल करना होगा।इससे पहले सुप्रीमकोर्ट ने केन्द्र सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया था, जिसमें गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार खारिज करने की माँग की गई थी।

आज यानी सुप्रीमकोर्ट की तय की गई तारीख का आखिरी दिन था।केन्द्र सरकार ने आज जवाबी हलफनामा दाखिल किया जिसमें कहा गया है कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के इस तरह सार्वजनिक खुलासे से देश के अस्तित्व पर खतरा है।सुप्रीमकोर्ट के राफेल सौदे के गोपनीय दस्तावेजों के परीक्षण के फैसले से रक्षाबलों की तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त सुचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गई है।आगे केन्द्र सरकार का कहना है कि राफेल पुनर्विचार याचिकाओं के जरिए सौदे की चलती फिरती जाँच की कोशिश की गई।मीडिया में छपे तीन आर्टिकल लोगों के विचार हैं ना कि सरकार का अंतिम फैसला।ये तीन लेख सरकार के पूरे आधिकारिक रूख को व्यक्त नहीं करते हैं।सीलबंद नोट में सरकार ने कोई गलत जानकारी सुप्रीमकोर्ट को नहीं दी।सीएजी ने राफेल के मूल्य संबंधी जानकारियों की जाँच की है और कहा है कि यह 2.86% कम है।हलफनामे में कहा गया है कि राफेल डील से संबंधित जो भी कागजात सुप्रीमकोर्ट मांगेगी वह प्रस्तुत करने के लिए सरकार तैयार है।राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं में कोई आधार नहीं है, इसलिए सारी याचिकाएं खारिज होनी चाहिए।

मुझे समझ नहीं आ रहा जब पुनर्विचार याचिकाओं में कोई दम नहीं है तो सुप्रीमकोर्ट क्यों सुनवाई के लिए तैयार हो गई है।क्या अब केन्द्र सरकार फैसला करेगी कि सुप्रीमकोर्ट में क्या सुनवाई हो?केन्द्र सरकार को अब चाहिए कि सुप्रीमकोर्ट जो भी कागजात माँग रहा है वह तुरंत प्रस्तुत करे अन्यथा माननीय उच्च न्यायालय वाजिब कार्रवाई कर सकता है।

इससे पहले सुप्रीमकोर्ट ने फैसले सुनाते हुए कहा था कि वो "द हिंदू" में छपे रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेजों पर भरोसा कर उनके आधार पर सुनवाई करेगा।आपको याद होगा द हिंदू वरिष्ठ पत्रकार एन.राम ने रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी की चिठ्ठी को अपने अखबार में छापा था जिसमें कहा गया था कि पीएमओ फ्रांस सरकार से पैरलर निगोसिएशन कर रहा है जिससे सौदों के लिए गठित टीम की विश्वसनीयता खतरे में पड़ गई है।पीएमओ का रक्षा सौदों में इस प्रकार हस्तक्षेप करना गलत है।

दो और चिठ्ठियों को सार्वजनिक किया गया जिससे राफेल सौदा संदिग्ध हो गया है।जिस तरह आनन फानन में अनिल अंबानी को ठेका देकर उपकृत किया गया वो बेहद संदिग्ध है।फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि भारत सरकार के कहने पर हीं अनिल अंबानी को ठेका मंजूर किया गया जो इस सौदे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है।सुप्रीमकोर्ट से गुजारिश है कि वह तह में जाकर इस मामले की जाँच करे जिससे दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ सके।

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