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आखिरकार बाबा रामदेव ने नोटबंदी को दबीजुबान में फेल बताया

Bhola Tiwari May 05, 2019, 6:42 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

आपको नोटबंदी तो याद हीं होगा भला कोई उसे कैसे भूल सकता है।एक बादशाह के सनक से पूरा हिंदुस्तान बैंक और एटीएम के सामने खड़ा था।किसी के घर में शादी थी किसी के घर श्राद्ध लेकिन आम लोग जिसने अपनी मेहनत की कमाई पाई पाई इकठ्ठा कर बैंकों में जमा कर रखी थी कि वह पैसा उसके जरूरत पर काम आएगा उसके लिए लंबी लाईनों में खड़ा होना पड़ता था।जब गरीब का नंबर आता था तो कैश खत्म हो जाता था, बहुत से लोग लंबी लाईन में लगने के कारण बीमार हो गए, कई मौत तो हार्टअटैक से हो गईं लेकिन शहंशाह इस बात पर अपनी पीठ ठोक रहा था कि मैंने कुछ अलग कर दिया है जो अभी तक नहीं हुआ है।गरीब की सुबह और शाम बैंक और एटीएम के सामने बीतता था लेकिन क्या आपने किसी उद्योगपति,अमीर और नेता को लाईन में लगते देखा?वो कभी लाइन में नहीं लगे फिर उनके पास रोजमर्रा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कैश कहाँ से आता था?मनन और चिंतन करने की जरूरत है।नोटबंदी से ठीक पहले अमित शाह के बेटे जय शाह ने कई करोड रूपये का संदिग्ध लेनदेन किया था, बीजेपी ने कुछ जगह आँफिस बनाने के लिए नगद में भुगतान किया था जो उस समय हर अखबारों की सुर्खियां बनीं थी लेकिन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया गया।

इन सभी मुद्दों पर पतंजलि योगपीठ के उद्योगपति बाबा रामदेव ने लोकसभा चुनाव के चार चरण बीत जाने पर अपना मुँह खोला है।बाबा रामदेव ने "द क्विंट" के संजय पुगलिया को दिए एक साक्षात्कार में नोटबंदी पर सनसनीखेज खुलासा किया है,उन्होंने कहा कि,"मोदीजी ने भी नहीं सोचा होगा कि बेईमान निकलेंगे बैंकवाले।मुझे तो ऐसा लगता है कि हजारों नहीं, शायद लाखों करोड़ रुपए बना लिए बैंकवालों ने।इसमें तीन से पाँच लाख करोड़ रूपये का घोटाला निकलेगा।"

उन्होंने साफ कहा कि रिजर्व बैंक के कर्मचारियों ने मौके का फायदा उठाकर खूब लूटपाट की।सरकार बेबस थी क्योंकि उसने जल्दबाजी में ये फैसला लिया था, जब तक सरकार संभलती लाखों करोडों का घोटाला हो चुका था।उन्होंने ये भी कहा कि एक सीरीज के दो नोट छपे हुए मिले,यह देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा कलंक है।नोटबंदी के समय कैश की कमी नहीं थी बल्कि सारा का सारा कैश बेईमानों को दे दिया गया।

बाबा रामदेव ने कहा कि कालाधन पर हमने तीन बातें कहीं थीं।पहली बड़ी करेंसी वापस लो,दूसरी कैशलेस ट्रांजेक्शन की व्यवस्था बनाओ और ट्रांजेक्शन टैक्स लगाओ।तीसरा पार्टिशिपेटरी और प्रोमिसरी नोट,और बैंक की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने को भी कहा था लेकिन सरकार ने सिर्फ एक बात मानी।

बैंक को उच्चाधिकारियों ने कमीशन लेकर बडे पैमाने पर नोटों की अदला बदली की।सरकार इनपर अंकुश लगाने में बुरी तरह विफल रही थी।

आपको तो याद हीं होगा पिछले लोकसभा चुनाव में बाबा रामदेव ने भाजपा की सरकार बनाने में कड़ी मेहनत की थी।जब तक भाजपा की सरकार नहीं बनीं वो अपने आश्रम नहीं गए।बाबा रामदेव नरेंद्र मोदी की तरह बेहद महत्वाकांक्षी हैं,वो चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें भी जीत का श्रेय दें लेकिन प्रधानमंत्री और अमित शाह ठहरे खांटी नेता।दोनों सार्वजनिक रूप से कभी भी बाबा रामदेव को जीत का श्रेय नहीं दिया, जब भी मौका आया नरेंद्र मोदी और अमित शाह एक दूसरे को हीं जीत का श्रेय देते रहें हैं और ये बात अतिमहत्वाकांक्षी बाबा रामदेव को खटक गई है।बाबा को उम्मीद थी कि सरकार उनसे समय समय पर सलाह लेगी जिससे उनका वजन बढ़ता रहेगा मगर चतुर सुजान मोदी ने उन्हें दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेक दिया है।ये सभी जानते हैं कि बाबा रामदेव और नरेंद्र मोदी में संवाद नहीं होता।दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारण कालाधन वापस लाने पर मोदी सरकार बुरीतरह असफल रही है,बाबा ने सरकार को बिन मांगे बहुत से सुझाव दिए थे जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, फिर भी बाबा रामदेव ने जो मुद्दे उठाए हैं वो जनता की पीडा को प्रर्दशित करते हैं।नोटबंदी सनकी बादशाह का एक फितूर था जो बुरीतरह असफल रहा।

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