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मियाँ नहीं असमियाँ

Bhola Tiwari May 04, 2019, 9:09 AM IST टॉप न्यूज़
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दिनेश मिश्रा

असम आज सुर्ख़ियों में है . मुझे याद आता है कि1988 में असम में अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ आई थी और सौभाग्यवश मुझे वहां बाढ़ पीड़ितों के बीच काम करने का मौका मिला. उन दिनों मेरा काफी समय मरिगांव जिले में बीतता था। 

एक दिन मरिगाँव (उन दिनों मरिगांव नगांव जिले का हिस्सा हुआ करता था ) की एक सड़क से गुज़र रहा था कि दूसरी तरफ मेरे एक मुसलमान मित्र दिखाई पड़े. मैंने उन्हें आवाज़ दी “ आरिफ (शायद उनका यही नाम था) मियां, किधर जा रहे हैं’? उन्होनें मेरी तरफ देखा भी नहीं और चलते चले गए. दो दिन बाद उनसे फिर मुलाकात हुई तो मैंने उनसे पूछा कि उस दिन मैंने उन्हें आवाज़ दी थी मगर कोई जवाब नहीं मिला, क्यों? उत्तर बड़ा मजेदार था. उन्होंने कहा कि मैंने उनके नाम के साथ मियां लगा दिया था इस लिए वो चुप रह गए थे और मेरी अनदेखी कर के चले गए. मैंने कहा कि यह तो सम्मान सूचक शब्द है और हमारे यहाँ तो इस तरह का संबोधन आम बात है . इसमें बुरा लगने कि क्या बात है ? उनका कहना था कि असम में किसी को मियां कहने का मतलब होता है बंगलादेशी मुसलमान जिसे स्थानीय लोग मियां मुस्लिम कहते हैं. इसीलिए वह मेरी ओर न देखते हुए आगे बढ़ गए थे. वह नहीं चाहते थे कि उनकी पहचान सरेआम मियां यानी वहां के मुताबिक बांग्लादेशी मुसलमान से हो.

 मेरा उनसे सवाल था कि हमारे यहाँ तो मुसलमान दिन भर में दस मर्तबा अल्ला मियां से दुआ माँगते होंगे. वहां तो मियां के शब्द के इस्तेमाल पर किसी को ऐतराज़ नहीं है. वही अल्ला मियां यहाँ असम में आकर बंगलादेशी मुसलमान कैसे हो जाते हैं ? मुझे उनके उत्तर का आज भी इंतज़ार है.

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