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आई सी 814 के अपहरण का सच

Bhola Tiwari May 03, 2019, 5:35 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

शशि भूषण सिंह तोमर नेपाल के भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे । वे राॅ के अधिकारी थे । उनके मातहत काम करने वाले यू बी सिंह ने उन्हें एक गोपनीय सूचना दी - "अगले कुछ दिनों में नेपाल से भारतीय हवाई जहाज का अपहरण हो सकता है "। शशि भूषण सिंह तोमर ने यू बी सिंह को खबर की सत्यता फिर से जांचने को कहा । खबर सही थी । यू बी सिंह ने खबर की सत्यता पर फिर मुहर लगा दी । अब शशि भूषण सिंह के सब्र का पैमाना छलक गया । वे यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि नेपाल की धरती से कोई भारत विरोधी गतिविधि भी कर सकता है । उन्होंने यू बी सिंह को डांट दिया । उनसे इस तरह की अफवाह न फैलाने की सलाह दी ।

कुदरत का कहर शशि भूषण सिंह तोमर पर ही बरपा । वे काठमांडू से जिस आई सी 814 में सवार हुए थे , उसका ही अपहरण हो गया । विमान में ईंधन भरने के लिए उसे अमृतसर में लैण्ड करवाया गया । तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी उस समय किसी आधिकारिक दौरे पर भारतीय वायु सेना के विमान में थे । त्वरित तौर पर मीटिंग बुलाई गयी । मीटिंग की अध्यक्षता उस समय बाजपेयी जी के सबसे ताकतवर सेक्रेटरी एन के सिंह कर रहे थे । तय हुआ था कि ईंधन भरते समय हवाई जहाज के टायरों को पंचर कर दिया जाएगा , ताकि हवाई जहाज फिर उड़ान न भर सके । एन एस जी के कमाण्डों बुलाए गये । एन एस जी समय से नहीं पहुँच सकी । नतीजतन हवाई जहाज को जाने दिया गया । बाजपेयी जी को कोई सूचना नहीं दी गयी । उन्हें सूचना जमीन पर लैण्ड करने के बाद दी गयी । उस समय जहाज उड़ चुका था ।

आई सी 814 लाहौर , दुबई होता हुआ कांधार पहुँचा । अफगानिस्तान उस दौर में तालिबानों की गिरफ्त में था । उन्होंने भारत सरकार की कोई मदद नहीं की । उल्टे भारत पर दबाव बनाया कि वह इस मसले को जल्द से जल्द निपटा ले , बरना वे इस जहाज को वहां से रवाना कर देंगें । भारत सरकार को आज के जैश ए मुहम्मद सरगना को छोड़ना पड़ा । उसे छोड़ने के लिए खुद जसवंत सिंह को जाना पड़ा । आज वही मौलाना मसूद अजहर आतंक का पर्याय बना हुआ है , जो 14 फरवरी 2019 को श्रीनगर से 20 किलोमीटर दूर पुलवामा में हमारे 42 जवानों को मौत के घाट उतार चुका है ।

इस पूरे फसाने में कहीं भी शशिभूषण सिंह तोमर का नाम नहीं आया । जब पाकिस्तान सरकार ने उनका नाम लिया तो सबको जानकारी मिली कि उस जहाज में तोमर भी यात्रा कर रहे थे । पाकिस्तान सरकार तो एक कदम और आगे बढ़ गयी । उसने आरोप लगाया कि शशि भूषण तोमर ही आतंकवादियों को निर्देश दे रहे थे । ज्ञातव्य हो कि शशि भूषण सिंह एन के सिंह के बहनोई थे । जिस एन एस जी ने कार्रवाई करनी थी उसके तत्कालीन निदेशक भी एन के सिंह के बहनोई थे । इसलिए एन एस जी कार्रवाई नहीं कर सकी । समय रहते पहुँच न सकी और यह मामला रिश्तेदारी निभाने के चक्कर में पेचीदा हो गया था ।

इस असफल कार्रवाई में शामिल लोगों को बाद में प्रोन्नतियां भी मिलीं थीं ।

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