ब्रेकिंग न्यूज़
केंद्र सरकार ने "भीमा कोरेगांव केस" की जाँच महाराष्ट्र सरकार की अनुमति के बगैर "एनआईए" को सौंपा, महाराष्ट्र सरकार नाराज         तेरा तमाशा, शुभान अल्लाह..         आर्यावर्त में बांग्लादेशियों की पहचान...         जंगलों का हत्यारा, धरती का दुश्मन...         लुगू पहाड़ की तलहटी में नक्सलियों ने दी फिर दस्तक         आज संपादक इवेंट मैनेजर है तो तब वो हुआ करता था बनिये का मुनीम या मंत्र पढ़ता पंडत....         किसी को होश नहीं कि वह किसे गाली दे रहा है...          जेवीएम विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से की मुलाकात         नीतीश का दो टूक : प्रशांत किशोर और पवन वर्मा जिस पार्टी में जाना चाहे जाए, मेरी शुभकामना         लोहरदगा में कर्फ्यू :  CAA के समर्थन में निकाले गए जुलूस पर पथराव, कई लोग घायल         पेरियार विवाद : क्या तमिल सुपरस्टार रजनीकांत की बातें सही हैं जो उन्होंने कही थी ?         पत्‍थलगड़ी आंदोलन का विरोध करने पर हुए हत्‍याकांड की होगी एसआईटी जांच, सीएम हेमंत सोरेन दिए आदेश         एक ही रास्ता...         अब तानाजी के वीडियो में छेड़छाड़ कर पीएम मोदी को दिखाया शिवाजी         सरकार का नया दांव : जनसंख्या नियंत्रण कानून...         हम भारत के सामने बहुत छोटे हैं, बदला नहीं ले सकते : महातिर मोहम्मद         तीस साल बीतने के बावजूद कश्मीरी पंडितों की सुध लेने वाला कोई नहीं, सरकार की प्राथमिकता में कश्मीर के अन्य मुद्दे         हेमंत सोरेन को मिला 'चैम्पियन ऑफ चेंज' अवॉर्ड         जेपी नड्डा भाजपा के नए अध्यक्ष, मोदी बोले-स्कूटर पर साथ घूमे         नए दशक में देश के विकास में सबसे ज्यादा 10वीं-12वीं के छात्रों की होगी भूमिका : मोदी         CAA को लेकर केरल में राज्यपाल और राज्य सरकार में ठनी         इतिहास तो पूछेगा...         सेखुलरी माइंड गेम...         अफसरों की करतूत : पत्नियों की पिकनिक के लिए बंद किया पतरातू रिजाॅर्ट         गुरूवर रविंद्रनाथ टैगोर की मशहूर कविता "एकला चलो रे" की राह पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव         पत्रकारिता में पद्मश्रियों और राज्यसभा की सांसदी के कलुष...         विकास का मॉडल देखना हो तो चीन को देखिए...        

मकबूल बट्ट को फाँसी

Bhola Tiwari May 03, 2019, 5:26 AM IST टॉप न्यूज़
img

 

एस डी ओझा

मकबूल बट्ट का जन्म तब हुआ था , जब भारत पाक का बँटवारा नहीं हुआ था । बंटवारे के समय उसकी आयु सिर्फ 10 साल की थी । बड़ा होकर उसने पेशावर यूनिवर्सिटी से इतिहास और पोलिटकल साईंस में मास्टर डिग्री की । वह कश्मीर के बंटवारे के सख्त खिलाफ था । वह चाहता था कि अखण्ड कश्मीर न तो भारत में रहे और न पाकिस्तान के । वह कश्मीर को एक अलग आजाद देश के रुप में देखना चाहता था । वह कुछ दिनों के लिए बर्मिंघम चला गया । वहीं पर उसने एक अलगाववादी संगठन "जे के एल एफ " बनाया । वह फिर 1966 में भारत के कब्जे वाले कश्मीर में आ गया , जहां उसकी पुलिस से भयंकर मुठभेड़ हुई । इस मुठभेड़ में मकबूल बट्ट का साथी औरंगजेब मारा गया । वहीं भारतीय क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी अमर चंद भी मारे गये ।

मकबूल बट्ट को अरेस्ट कर लिया गया । अदालत में मकबूल बट्ट ने अपना गुनाह कबूल कर लिया । उसे फाँसी की सजा सुनाई गयी । उसे श्रीनगर के जेल में रखा गया । बात 1968 की है जब मकबूल बट्ट ने अपने दो साथियों की मदद से सुरंग खोदी और जेल से फरार हो गया । वह सीधे पाकिस्तान जा पहुँचा । 1971 में भारतीय हवाई जहाज एफ - 27 (गंगा ) का अपहरण कर लिया गया , जिसे जबरन लाहौर ले जाया गया । वहां क्रू मेम्बर और यात्रियों को उतार कर जहाज में आग लगा दी गयी । इस कांड का मास्टर माइंड मकबूल बट्ट निकला । भारत की पहल पर पाकिस्तान ने मकबूल बट्ट को गिरफ्तार कर लिया , पर उसे भारत को सौंपने से इंकार कर दिया । जांच चली । पाकिस्तान ने इस कांड को 2 फरवरी 1971 को भारतीय खुफिया विभाग का एक सुनियोजित ड्रामा करार दिया । इस बात पर नाराज हो भारत ने पाकिस्तान को अपने ऊपर से उड़ने पर रोक लगा दी । जो हवाई गलियारा पाकिस्तान को मिला था वह बंद हो गया । अब पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान में सम्पर्क सूत्र बहुत लम्बे दायरे से होकर गुजरने लगा । यह रोक दिसम्बर '71 की लड़ाई में भारत के बहुत काम आया था ।

मकबूल बट्ट को पाकिस्तान ने 1974 में रिहा कर दिया । गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की तरफ भागता है ।मकबूल बट्ट के दिन भी पूरे हो गये थे । वह रिहा होकर भारत चला आया । यहां पहले से हाई अलर्ट जारी था । मकबूल बट्ट पकड़ा गया । उसे फाँसी की सजा पहले ही मिली थी । उसे तिहाड़ जेल में रखा गया । मकबूल बट्ट ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की । दया याचिका राष्ट्रपति के पास अभी विचाराधीन पड़ी थी । जे के एल एफ के लोगों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए बर्मिंघम में भारतीय डिप्लोमेंट रविन्द्र महात्रे का अपहरण कर लिया । इस अपहरण से जब भारत सरकार नहीं झुकी तो उन लोगों ने रविन्द्र महात्रे की 6 फरवरी 1984 को हत्या कर दी । अब पानी सर के ऊपर से गुजर गया था । 

राष्ट्रपति ने मकबूल बट्ट की दया याचिका खारिज कर दी ।11 फरवरी 1984 को मकबूल बट्ट को फाँसी दे दी गई । उसे तिहाड़ जेल के अंदर ही दफना दिया गया । जे के एल एफ ने एक और वीभत्स खेल खेला । मकबूल बट्ट के फांसी होने के पाँच साल बाद जज नील कंठ की हत्या कर दी । ये वही जज थे जिन्होंने मकबूल बट्ट को फाँसी की सजा सुनाई थी । कोर्ट सबूत मांगता है । उसी सबूत के आधार पर जज फैसला सुनाता है । वैसे भी मकबूल बट्ट ने अदालत में अपना जुर्म मान लिया था । फिर एक निरीह जज को मारने का क्या तुक था ?  


आजकल इसी जे के एल एफ का मुखिया यासीन मलिक हैं ।

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links