ब्रेकिंग न्यूज़
BIG NEWS : चीन को बड़ा झटका; DHL के बाद FedEX ने बंद की चीन से भारत आने वाली शिपमेंट सर्विस         BIG NEWS : ड्रैगन के खिलाफ एक्शन में भारत, कार्रवाई से चीन में भारी नुकसान की आहट         BIG NEWS : भारत की कृतिका पांडे को मिला राष्ट्रमंडल-20 लघुकथा सम्मान         वैसे ये स्लोगन लगा विज्ञापन है किनके लिए भैये..          BIG NEWS : चीन की चाल , LAC पर तैनात किये 20 हजार से ज्यादा सैनिक         BIG NEWS : सोपोर में आतंकियों की गोली का शिकार बना एक और मासूम         BIG NEWS : सोपोर में CRPF पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकी हमला, 2 जवान शहीद, तीन घायल         BIG NEWS : इमरान ने फिर रागा कश्मीर का अलाप, डोमिसाइल पॉलिसी को लेकर UNSC से लगाई गुहार         BIG NEWS : यूरोपीय संघ, यूएन और वियतनाम के बाद अब ब्रिटेन ने भी लगाया पाकिस्तान एयरलाइंस पर बैन         BIG NEWS : 'ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब' को बैन करने वाला चीन टिक-टॉक बैन पर तिलमिलाया         देश की सीमाओं में ताका झांकी....!         दीपिका कुमारी और अतनु दास ने एक दूसरे को पहनाई वरमाला, अब होंगे सात फेरे         चलो रे डोली उठाओ कहार...पीया मिलन की रुत आई....         अध्यक्ष बदलने की सियासत         BIG NEWS : पांडे गिरोह ने रामगढ़ एसपी को दिखाया ठेंगा, मोबाइल क्रेशर कंपनी से मांगी रंगदारी         BIG NEWS : जानिए किस देश के प्रधानमंत्री का PM मोदी ने किया जिक्र, जिनपर लगा था 13000 रुपये का जुर्माना         80 करोड़ गरीबों को अब नवंबर तक मिलेगा मुफ्त अनाज : PM         BIG NEWS : अनंतनाग एनकाउंटर में 2 और आतंकी ढेर         ...प्रियंका, एक दिन बिना बाउंसर रह लें तो पता चले बालाओं की असुरक्षा...         चाइनीज एप सूची देख याद आया...          BYE-BYE CHINA : Tik Tok समेत 59 चाइनीज ऐप पर लगाया बैन         BREAKING NEWS : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल शाम 4 बजे राष्ट्र के नाम संदेश देंगे         BIG NEWS : UPA सरकार का फरमान, पुलिस अधिकारियों का अपमान और आतंकियों का सम्मान         BIG NEWS : सैयद अली शाह गिलानी पर ग्रहण, हुर्रियत कांफ्रेंस से इस्तीफे की घोषणा         BIG NEWS : फ्रांस से जुलाई अंत तक 6 राफेल लड़ाकू विमान पहुंचेंगे भारत, IAF की बढ़ेगी और ताकत         BIG NEWS : कराची स्टॉक एक्सचेंज पर आतंकी हमला, 9 लोगों की मौत          BIG NEWS : अनंतनाग एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकी मार गिराए, सर्च ऑपरेशन जारी         BIG NEWS : टेरर रिक्रूटमेंट समेत आतंकी गतिविधियों में हिजबुल आतंकी की माँ भी शामिल, गिरफ्तार         BIG NEWS : भारत चीन टेंशन के बीच जम्मू कश्मीर में तेल कंपनियों दो महीने की एलपीजी आपूर्ति करने के आदेश         BIG NEWS : अमित शाह का राहुल गांधी को चुनौती, कहा... “चर्चा करनी है तो आइए संसद में हो जाएं 1962 से आज तक दो-दो हाथ”         लद्दाख में भारत की भूमि पर आंख उठाकर देखने वालों को मिला है करारा जवाब : PM MODI         आर्चरी क्‍वीन दीपिका कुमारी और अतनु दास की शादी की रस्में शुरू         BIG NEWS : अब भारत ने LAC पर तैनात किया मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम         नेपाली नेता गुड़ खाएंगे और गुलगुले से परहेज करेंगे          BIG NEWS : अपराधियों ने एएसआई को गोली मारी, जांच करने गई पुलिस पर अपराधियों ने किया हमला         BIG NEWS : संकट दरकिनार पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर खोलने का किया ऐलान        

कालापानी' क्या है, जिसे लेकर भारत से नाराज़ हो गया है नेपाल !

Bhola Tiwari May 31, 2020, 2:59 PM IST टॉप न्यूज़
img

● क्या है भारत नेपाल सीमा में काला पानी विवाद?

डॉ.डी.के.राव

नई दिल्ली : इन दिनों भारत और नेपाल के बीच स्थिति तनावपूर्ण हैं। भारत का पड़ोसी मित्र देश भारत से सीमा विवाद के चलते नाराज नजर आ रहा है। दरअसल भारत नेपाल के बीच का यह सीमा विवाद पुराना है परन्तु मामले में ताज़गी तब आई जब 02 नवम्बर 2019 को भारत द्वारा जम्मू कश्मीर और लद्दाख के केंद्रीय राज्य बनाने के बाद भारत का नया मानचित्र जारी किया गया। नए नक्शे के जारी होने के बाद नेपाल विदेश मंत्रालय ने भारत द्वारा कालापानी क्षेत्र को भारत का हिस्सा दिखाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि कालापानी नेपाल का अंग है। हालांकि नेपाल एक लेंड लॉक कंट्री है लेंड लाँक कंट्री से तात्पर्य यह है कि इस देश की सीमाएँ चारों और से स्थलीय भूभाग से घिरी हो नेपाल एक बफ़र देश भी है बफ़र देश उसे कहते हैं जो दो बड़े देशों के मध्य में हो जैसे नेपाल के एक तरफ भारत जैसा विशाल देश है तो दूसरी चीन है। हालांकि इतिहास खंगालने पर यह पता चलता है,नेपाल कभी गुलाम नही रहा। कालांतर में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासन के समय जमीनी विवाद को लेकर कुछ झड़प हुआ भी था, तो उस समय नेपाल के महाराज ने कुछ सन्धि शर्तों पर इस विवाद को समाप्त भी कर दिया। नेपाल की लगभग 85% आबादी हिन्दू परम्परा को मानते हैं और नेपाल में कोई स्वतंत्रता दिवस नही मनाया जाता है, कारण नेपाल कभी किसी देश का गुलाम नही रहा। 

आखिर कहाँ है कालापानी !

 कालापानी भारत नेपाल सीमा में स्थित 35 वर्ग किलोमीटर मे छोटा सा क्षेत्र है। यह कालीगंगा का उद्गम स्थल भी है। कालापानी की सीमा तीन देशों को छूती है,जैसे अभी आप ने कुछ महीने पहले देखा था भारत-चीन डोकलाम विवाद। जिस प्रकार डोकलाम की सीमा ट्रेंगुलर है जो भारत-भूटान-चीन के बीच है, उसी प्रकार भारत, नेपाल और चीन जो इसे ट्राईंजंक्शन बना देता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे राजनैतिक रूप से भारत और चीन के लिए महत्वपूर्ण बना देती है। नेपाल का दावा है कि कालापानी उसके जिले दारचूला का हिस्सा है, वहीं भारत इसे पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा मानता है। कालापानी को लेकर नेपाल में पहले भी आवाज़ें उठती रही है, परन्तु राजनैतिक रूप से यह पहली बार है कि नेपाल ने इस विवाद में आक्रमक रूप अपनाया है। इतिहास के आईने में जब देखते हैं, तो पता यह चलता है कि, मुगल साम्राज्य के पतन के बाद भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी का शासन था, तो उस समय सन1816 ई.में गोरखा और ब्रिटिश सेना के बीच युद्ध हुआ इस युद्ध को देखते हुए बाद में नेपाल के राजा और ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच सुगौली संधि हुई। अब आपके मन में प्रश्न होगा कि सुगौली कहाँ पर स्थित है,तो वर्णित है कि सुगौली बिहार के चंपारन ज़िले में है। वही अंग्रेज और गोरखाओं के बीच संधि हुई थी। संधि की शर्तें इस प्रकार थीं।


1-कुमायूँ और गढ़वाल का क्षेत्र अंग्रेजों को वापस किया जाए।

2-अवध अर्थात तराई का क्षेत्र भी अंग्रेजों को वापस किया जाए।

3-व सिक्किम भी वापस किया जाए।

इस प्रकार नेपाल की सीमा में बदलाव हो गया। जिसमें काली नदी को नेपाल भारत की सीमा के रूप में अपनाया गया। इस संधि से नेपाल के कुछ हिस्से अंग्रेजी शासन (भारत)का हिस्सा बन गए। नेपाल इसी संधि का दावा ठोकते हुए कालापानी को अपना हिस्सा बताता है। इस संधि में 'काली नदी' की स्पष्टता ना होने के कारण ही यह विवाद का विषय बन गया। दरअसल काली नदी के उद्गम में बहुत सी छोटी छोटी नदियाँ मिलती हैं और यह बता पाना मुश्किल है कि कहाँ से इसे काली नदी कहा जाए। 1870 में हुए सर्वे में जो धारा लीपूलेख पास से बहती है उसे काली नदी कहा गया है। इस आधार पर कालापानी पर भारत अपना अधिकार बताता रहा है। यही नहीं, 1830 के प्रशासनिक दस्तावेजों में भी कालापानी को भारत के अल्मोड़ा जिले का हिस्सा बताया गया है। और यह दस्तावेज आज भी ब्रिटेन में रखा गया है।

हालांकि कालांतर तथ्यों के आधार पर 1962 में भारत चीन युद्ध के वक्त से ही भारतीय सेना की पोस्ट कालापानी में तैनात है। भारतीय सेना ने कालापानी में अपनी सैन्य मजबूती के कारण कालापानी से चीनी सेना को घुसने नहीं दिया था। उसके बाद से ही इस क्षेत्र में भारत तिब्बत सीमा बल तैनात रहता है।  

हालांकि नेपाल की राजनीति में 90 के दशक से ही कुछ नेता कालापानी को लेकर तथा अपनी राजनीति चटकाने के लिए पहले भी आवाज़ उठाते रहे हैं, परन्तु राजनैतिक रूप से यह पहली बार है कि नेपाल ने इस विवाद में आक्रमक रूप अपनाया है। नेपाल में कालापानी को लेकर आन्दोलन और भारत का विरोध 1997-1998 में शुरू हुआ।1997-1998 में इस आन्दोलन का कारण घरेलू राजनीति ही रही, जिसमें नेपाल के नेताओं ने कालापानी का मुद्दा पकड़कर लोगों में भारत के खिलाफ आवाज पैदा की और एक आंदोलन खड़ा किया। नेपाल के राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना था कि 1961 में नेपाल द्वारा जनगणना में कालापानी को भी जोड़ा गया था जिसका भारत ने विरोध नहीं किया, जो भारत का पक्ष कमजोर करता है। परन्तु यह भी सत्य है कि 1961 से 1997 तक नेपाल ने भी भारत की सैन्य तैनाती का विरोध नहीं किया था। और ना आज तक किसी भी प्रकार की आपत्ति जताई थी लेकिन 2 मई को चीन के एक सरकारी न्यूज़ चैनल CGTN ने माउंट एवरेस्ट को चीन का हिस्सा बता दिया था। नेपाल माउंट एवरेस्ट को अपने सिर का ताज मानता है। चीन की इस हरकत के बाद भी नेपाल ने कोई विरोध नहीं किया। लेकिन जब 8 मई को भारत ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में नेपाल सीमा के बहुत करीब लिपुलेख पास को कैलाश मानसरोवर यात्रा के रूट से जोड़ने वाली एक सड़क का उद्घाटन किया तो नेपाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और यह दावा कर दिया कि भारत ने उसके इलाके में यह सड़क बनाई है। चीन के द्वारा पूरे माउंट एवरेस्ट पर अपना दावा किये जाने पर भी नेपाल को कोई आपत्ति नहीं हुई। किंतु भारत ने अपनी ही सीमा के अंदर एक सड़क बना ली तो नेपाल को यह बात पसंद नहीं आई। अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों के जानकारों ने लिखा कि नेपाल यह सब कुछ चीन के इशारे पर कर रहा है। लेकिन चीन, नेपाल को भारत के खिलाफ क्यों उकसा रहा है? इस कोरोना के संकट काल में भी चीन की इस हरकत का कारण यह है कि भारत और नेपाल की सीमा करीब-करीब 1690 किलोमीटर लंबी है। इसके 98% से 99 % हिस्से पर कोई विवाद नहीं है। लेकिन लिपुलेख पास और काला पानी जैसे कुछ इलाकों में भारत और नेपाल के बीच विवाद की स्थिति तब विशेष बनी जब भारत ने पिथौरागढ़ से लेकर लिपुलेख तक जो नई सड़क बनाई है उससे कैलाश मानसरोवर के यात्रियों के समय की बचत होगी और यह यात्रा बहुत छोटी हो जाएगी। पहले यात्रियों को लिपुलेख तक पहुंचने के लिए लगभग 80 किलोमीटर कठिन रास्तों पर पैदल चलना पड़ता था जिसमें करीब 5 दिनों का समय लगता था। लेकिन इसी रूट पर बनी ये नई सड़क करीब 74.6 किलोमीटर लंबी है और यात्री यहां तक अपनी गाड़ियों से आ सकते हैं।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा जो पहले दो या तीन हफ्तों में पूरी होती थी अब एक हफ्ते में पूरी की जा सकती है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर जाने के दो रास्ते और हैं पहला रास्ता सिक्किम के नाथुला पास से होकर तिब्बत तक जाता है, दूसरा रास्ता नेपाल की राजधानी काठमांडू से होकर निकलता है और यह दोनों रास्ते पिथौरागढ़ वाले रास्ते के मुकाबले बहुत लंबे हैं। पिथौरागढ़ वाले नये रूट का 85% हिस्सा भारत की सीमा में ही है किंतु बाकी के दोनों रूट से यात्रा करने पर यात्रा का 80 से 85% हिस्सा चीन की सीमा में तय करना पड़ता है। चीन,तिब्बत को अपना हिस्सा मानता है और इसीलिए कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को चीन का वीजा लेना पड़ता है जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। लिपुलेख पास रणनीतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के पिथौरागढ़ को तिब्बत से जोड़ता है। इसी लिपुलेख पास के जरिए लंबे समय से भारत और तिब्बत के बीच व्यापार होता रहा है। लेकिन अब इस इलाके में भारत द्वारा सड़क बनाए जाने से नेपाल को आपत्ति हो रही है। हैरानी की बात यह है कि भारत इस सड़क पर वर्ष 2008 से काम कर रहा है, किंतु पिछले 12 वर्षों में नेपाल ने कभी भी इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति नहीं जताई। 2018 में कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की इजाजत दी और 2 साल में सड़क का निर्माण पूरा हो गया। यह काम बहुत ही कठिन था क्योंकि सड़क के रास्ते में बड़े-बड़े पहाड़ थे और इन पहाड़ों को काटने के लिए जो मशीनें लगाई गई थीं, उन्हें भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से एअरलिफ्ट किया गया था। जब यह निर्माण चल रहा था तब न चीन कुछ बोला और ना ही नेपाल।लेकिन अब नेपाल ने इस इलाके पर अचानक अपना दावा ठोक दिया है।क्योंकि कहीं न कहीं नेपाल चीन के इशारे पर यह कार्य कर रहा है,चूँकि चीन अपनी विस्तारवादी नीति के चलते और भारत के निर्णय पीओके को जम्मू एवम कश्मीर में मिलाने जो की भारत का हिस्सा है,इसलिए चीन झुंझला गया है,जल गया है,और उसको यह डर सता रहा है,की भारत पीओके लेने के बाद आक्साई चीन का काबिज क्षेत्र भी कहीं ना ले ले।इसीलिए नेपाल को ऊपर से मख्खन लगा रहा है,और अंदर से बुरी तरह दबाब बनाकर उकसा रहा है,ताकि भारत और नेपाल के रिश्तों में खटास पैदा हो या पाकिस्तान और चीन की तरह नेपाल भी भारत का कट्टर विरोधी हो जाए। बहरहाल भारत और नेपाल केवल पड़ोसी देश नहीं, बल्कि दोनों देशों की मित्रता जगजाहिर है। हमारे नेपाल के साथ यह मैत्री सम्बन्ध आपसी मेल मिलाप और सम्बन्ध का ही नतीजा है। सांस्कृतिक समानता और सौहार्द दोनों देशों को एक दूसरे के करीब लाया है। दोनों देशों के बीच मैत्री संबंध दोनों देशों के लिए ही महत्वपूर्ण है।आपसी सहयोग से ही भारत और नेपाल साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत और नेपाल के बीच गहरा धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध है फिर भी नेपाल आज कोरोना वायरस के दौर में लगता है अपना पाला बदल रहा है।

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links