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बादशाह बनने के बाद भी जहांगीर नूरजहां को नहीं भूल पाया था...।

Bhola Tiwari May 27, 2020, 7:12 AM IST कॉलमलिस्ट
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली  :  मशहूर डच लेखक अपनी किताब "डिस्क्रिप्शन आँफ इंड़िया एंड फ्रैगमेंट आफ इंडियन हिस्ट्री" में लिखते हैं कि महान मुगल बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का इकलौता पुत्र जहांगीर जिन्हें उन्होंने बडे जतन से पाला था,एक पारसी लड़की के प्रेम में दीवाना हो गया था।दीवानगी इतनी ज्यादा थी कि अफीम की बडी डोज लेने के बाद भी उसे नींद नहीं आती थी।उस लडकी का नाम मेहरून्निसा था।मेहरून्निसा अकबर के दरबार में काम करने वाले गियास बेग की बेटी थी।वफादार गियास बेग के कामों से खुश होकर बादशाह अकबर ने उन्हें "ऐतिमातुद्दौला" की उपाधि दी थी।

जहाँगीर हर हाल में मेहरून्निसा से निकाह करना चाहते थे।उन्होंने अपनी माँ के द्वारा ये बात बादशाह-ए-हिंद तक पहुँचाई मगर अकबर तो बादशाह-ए-हिंद ठहरे, वो कैसे अपने पुत्र का निकाह मंत्री की पुत्री से करवाते।बादशाह के अलावा गियास बेग भी नहीं चाहते थे कि मेहरून्निसा का निकाह एक अफीमची से किया जाए।गियासुद्दीन ने आननफानन में मेहरून्निसा का निकाह अपने भतीजे अलीगुल से कर दोनों को बंगाल भेज दिया।

मेहरून्निसा की जुदाई ने उसे तोडकर रख दिया था और वो हमेशा नशे में डूबा रहता।ये वो समय था जब बादशाह अकबर बीमार रहने लगे थे।थोडे हीं दिनों में अकबर का इंतकाल हो गया और जहांगीर मुगल साम्राज्य के चौथे बादशाह बने।

डी-लायट अपनी किताब में लिखते हैं कि मरने से पहले बादशाह अकबर ने जहांगीर के हरम के सभी कनीज़ को बदल दिया था।उन्हें सूचना मिली थी कि हरम में जहांगीर के खिलाफ कोई बडी साजिश हो रही है जिसमें जहांगीर को अफीम का ज्यादा डोज देकर मारने की योजना बनाई जा रही है।डी-लायट ने ये जिक्र नहीं किया है कि ये साजिश किसने की थी।जहांगीर के महल में बादशाह अकबर के विश्वासपात्र लोगों ने अपना काम शुरू कर दिया।उन्होंने अफीम के लती जहांगीर की नशे की खुराक धीरे धीरे कम कर दी,जिससे वे स्वस्थ्य होने लगे थे।

बादशाह बनने के बाद भी वो मेहरून्निसा को भूल नहीं सके थे।उन्होंने मेहरून्निसा को कई पत्र लिखा,जिसमें उन्होंने आग्रह किया था कि वो अपने शौहर को तलाक देकर उनके पास आ जाएं,उन्हें बेगम का दर्जा दिया जाएगा।लेखक के अनुसार मेहरून्निसा अपने शौहर से बेहद प्यार करती थी, उन्होंने जहांगीर के पत्र का उत्तर देते हुए लिखा था एक एक बादशाह को इस प्रकार की बातों से बचना चाहिए।मैं अपने शौहर से बहुत प्यार करती हूँ और उम्र भर उनके हीं साथ रहूंगी।

जहांगीर समझ गया था कि उसे हासिल करने के लिए उसके शौहर को मारना होगा।जहांगीर ने अलीगुल को रास्ते से हटाने के लिए उसे शेर से निहत्थे लडवाया,मगर बहादुर अलीगुल ने शेर को मार डाला था।इस प्रयास के असफल होने के बाद जहांगीर ने बंगाल के गवर्नर कुतुबुद्दीन को लालच देकर अलीगुल की हत्या करा दी।

अलीगुल की हत्या के बाद जहांगीर ने मेहरुन्निसा के सामने निकाह करने की कई बार मिन्नतें की मगर वो जानती थी कि इस हत्या के पीछे कौन है।

मेहरून्निसा के इंकार के बाद जहांगीर ने राजदरबार में आना बंद कर दिया।तब बादशाह के मंत्रियों ने मेहरून्निसा के पास जाकर आग्रह किया कि वो निकाह के लिए तैयार हो जाएं, नहीं तो मुगल साम्राज्य का पतन निश्चित है।बताते हैं कि अपने रिश्तेदारों के कहने पर वो निकाह के लिए तैयार हो गई।साल 1611 में दोनों का निकाह हुआ।

डच लेखक अपनी किताब में लिखते हैं कि मेहरून्निसा से निकाह के बाद जहांगीर हर वक्त उसकी जुल्फों के साये में और शराब की मदहोशियों में डूबा रहता था।इसका नतीजा ये हुआ कि सत्ता की पूरी बागडोर मेहरून्निसा के हाथों में आ गई।अपनी लाडली बेगम से खुश होकर जहांगीर ने उसे नूरजहां की उपाधि से नवाजा।नूरजहां को राजनीतिक पैतरों की अच्छी समझ हो गई थी और उसने राजकाज को अच्छी तरह से संभाल लिया था।

डच लेखक ने अपनी किताब "डिस्क्रिप्शन आँफ इंडिया एंड फ्रैगमेंट आँफ इंडियन हिस्ट्री" में लिखा है कि साल 1627 में उनके हीं एक रक्षक ने शाहजहां के साथ मिलकर मुगल शहंशाह के खिलाफ बगावत कर दी।शाहजहां के आदेश के बाद जहांगीर और नूरजहां को गिरफ्तार कर कारागार में डाल दिया गया था।उनका अंतिम वक्त जेल में कैसे बीता इसका कोई जिक्र किताब में नहीं मिलता है।नूरजहां की मृत्यु सन् 1645 में हुई।लाहौर में जहांगीर के मकबरे के करीब हीं शहादरा में उनकी कब्र है।

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