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विस्तारवादी चीन हांगकांग पर फिर से शिकंजा कसने की तैयारी में, विरोध-प्रर्दशन शुरू

Bhola Tiwari May 23, 2020, 5:42 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली : बीजिंग में चल रही "नेशनल पीपल्स कांग्रेस" की बैठक के दौरान हांगकांग में कानून व्यवस्था सुधारने का एक मसौदा पेश किया गया।इस प्रस्ताव के मुताबिक चीन हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव के किसी भी मुद्दे के साथ बडी सख्ती से निपटेगा।चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक "नेशनल पीपुल्स कांग्रेस" में मसौदा प्रस्ताव पेश करनेवाले स्टैंडिंग कमेटी के उपाध्यक्ष वांग चेन का कहना है कि हांगकांग में बढ़ते राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और विकास हितो को प्रभावित किया है।ऐसे में खतरों सै अधिक सख्त तरीके से निपटने की जरूरत है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में रखे गए इस प्रस्ताव में वांग चेन ने मुख्यतः छह सूत्र दिए हैं।इसके मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा की सख्ती से हिफाजत, एक देश दो व्यवस्था के विधान को बनाए रखना और सुधारना, कानून के मुताबिक हांगकांग प्रशासन,बाहरी दखल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, हांगकांग वासियों के वैध अधिकारों व हितों की रक्षा।

जैसे हीं ये खबर हांगकांग पहुँचीं हांगकांग डाँलर का भाव गिर गया और हांगकांग के निवासियों ने चीन के खिलाफ जबरदस्त प्रर्दशन किया।लोग चीन सरकार के मुख्य दफ्तर के बाहर इकट्ठा हो गए और विरोध प्रर्दशन शुरू कर दिया।हांगकांग प्रर्दशनकारियों का कहना है कि नया कानून "एक देश,दो व्यवस्था" के सिद्धांत की कमर तोड़ने वाला है।यह हांगकांग पर सीधे कानून थोपने की कोशिश है।


आपको बता दें चीन,हांगकांग पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता है।हांगकांग ब्रिटेन का एक उपनिवेश था जिसे साल 1997 में चीन को स्वायत्तता की शर्त के साथ सौंपा गया था।"एक देश-दो व्यवस्था" की अवधारणा के साथ हांगकांग को अगले 50 साल के लिए अपनी स्वत्रंत्रता, सामाजिक पहचान, कानून और राजनीतिक व्यवस्था बनाए रखने की गारंटी दी गई थी।इसी के चलते हांगकांग में रहने वाले लोग खुद को चीन का हिस्सा नहीं मानते और खूलेआम सरकार की आलोचना करते हैं।हांगकांग की जनता सीधे तौर पर अपना नेता नहीं चुन सकती,जिस वजह से कैरी लैम जैसे चीनी समर्थक वहां की प्रशासक बन बैठी है।

गौरतलब है कि जब से ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन को स्वायत्तता की शर्त के साथ सौंपा है तब से चीन हांगकांग में अपनी मनमर्जी चलाना चाहता है।चीन ने हांगकांग में साल 2003 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने की नाकाम कोशिश की थी,जिसे वहां की जनता ने अपने दमदार विरोध-प्रर्दशन के कारण असफल कर दिया था।साल 2014 में ऐतिहासिक अंब्रेला आंदोलन हुआ,जिसमें चीन को मुँह की खानी पडी थी।साल 2015 में बहुत से किताब विक्रेता को जबरन गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था, आरोप ये मढा गया कि ये सारे किताब विक्रेता चीन के खिलाफ लिखी किताब को बेचते हैं।हांगकांग के बुद्धिजीवियों ने इसका माकूल जवाब दिया था मगर ये आंदोलन उतना परवान न चढ़ सका जितना अन्य आंदोलनों ने सुर्खियां बटोरी थीं।

साल 2019 में हांगकांग प्रशासन ने विवादित प्रत्यर्पण बिल को पेश किया।दरअसल इस बिल की आवश्यकता इसलिए पडी कि चान टोंग-काई नाम के एक युवक ने अपनी गर्भवती प्रेमिका की हत्या ताइवान में कर दी और भागकर हांगकांग आ गया।हांगकांग और ताइवान के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है।इस वजह से हांगकांग प्रशासन ने उस युवक को ताइवान भेजने से मना कर दिया।चीन समर्थित हांगकांग प्रशासन चाहता है कि एक ऐसा कानून बने,जिसमें चीन के उपनिवेश में कहीं कोई अपराध हो,अपराधी को चीन में सजा दी जाए।हांगकांग में इस विवादित कानून की खूब आलोचना हुई और प्रस्तावित कानून के आलोचकों का कहना है कि चीन में प्रत्यर्पण से कई लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जा सकेगा और उनपर अनुचित ढंग से मुकदमा दायर होगा।चीन इस कानून के माध्यम से अपने विरोधियों को गिरफ्तार कर अपने देश ले जाएगा और फिर उसका कोई पता नहीं चलेगा।

हांगकांग में प्रत्यर्पण कानून के विरोध में लाखों लोग सडकों पर उतर आए थे।प्रर्दशनकारियों के कडे विरोध के कारण अंतरराष्ट्रीय उडानों को रोकना पड़ा था।विभिन्न सड़कों को जाम कर हांगकांग की जनता ने चीनी समर्थक हांगकांग प्रशासन को पंगु बना दिया था, तब वहां की प्रशासक कैरी लैम ने घोषणा की थी कि विवादास्पद प्रत्यर्पण कानून को वापस लिया जा रहा है।

थोडे दिनों की शांति के बाद एक बार फिर चीन ने हांगकांग में एक विवादित कानून लाने का फैसला किया है।दरअसल चीन,हांगकांग पर अपनी पकड और मजबूत करना चाहता है ताकि वह वहां मनमानी कर सके।हांगकांग की कानून व्यवस्था पहले से हीं बेहद सुधरी है अब इस कानून को पास कर चीन हांगकांग को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में करना चाहता है।अब ये देखने वाली बात होगी कि इस बार भी चीन, हांगकांग में हार का मुँह देखता है या अपने मंसूबे में कामयाब हो जाता है।

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