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जिन्ना तुम आज भी जिंदा हो

Bhola Tiwari Apr 28, 2019, 11:54 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव


बात जून 2005 की है,लालकृष्ण आडवाणी एक प्रतिनिधिमंडल को लेकर पाकिस्तान तफरी करने जाते हैं।खूब सैरसपाटा होता है, वहाँ तक तो सबकुछ ठीक था मगर भारत आने के दो दिन पहले वे कराची में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर घुमने चले जाते हैं।मजार के बाहर उपस्थित पाकिस्तान के पत्रकार जिन्ना के बारे में उनके विचार पुछते हैं तो आडवाणी जी मोहम्मद अली जिन्ना को "सेक्युलर" और "हिंदू-मुस्लिम एकता का दूत" करार देते हैं।

अनौपचारिक पत्रकार वार्ता समाप्त हो जाती है और आडवाणी अपने गंतव्य स्थान पर चले जाते हैं, तब तक कोई बवाल नहीं मचा।अगले दिन पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों में आडवाणी के दिये बयान प्रकाशित होते हैं और ये खबर अपने पीछे तूफान लेकर भारत आती है।

जिन्ना को सेक्युलर कहने पर बवाल मचना हीं था और मचा भी जमकर।दरअसल लालकृष्ण आडवाणी की छवि कट्टर हिंदूवादी नेता की थी,उनसे इस प्रकार के बयान की उम्मीद किसी को नहीं थी।बाजपेयी जी कभीकभी लीक से हटकर बयान दे दिया करते थे उनकी बात को लोग गंभीरता से नहीं लेते थे मगर अनुशासित आडवाणी के बयान ने सभी को नाखुश कर दिया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने दूतों के माध्यम से ये संदेश भिजवा दिया था कि वे अपने बयान से पीछे हट जाएँ और माफी मांग लें,नहीं तो उन्हें इस्तीफा देना होगा।आडवाणी ने माफी मांगने से साफ इंकार किया और अपना इस्तीफा दे दिया।

उन दिनों आडवाणी भाजपा के सबसे बड़े नेता थे,उनसे मिलने के लिए कई कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था मगर इस घटनाक्रम ने आडवाणी को पार्टी में बिल्कुल अलग थलग कर दिया था।संघ के डर से बहुत से नेता उनसे मिलने नहीं आते थे मगर बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा उन दिनों में भी हमेशा आडवाणी के साथ रहे और उनके विचारों का खुला समर्थन किया था।भाजपा ने 2009 में जब आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था तब आडवाणी की हीं कृपा से उन्हें पटना साहिब से टिकट मिला और वे जीत गए थे।आज आडवाणी के इस शिष्य ने छिंदवाड़ा में मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने ये भाषण दिया कि देश की आजादी और तरक्की में अन्य लोगों के साथ मोहम्मद अली जिन्ना का भी योगदान था।

थोडे हीं देर में उन्हें बयान बदलने पर मजबूर होना पडा और उन्होंने अपने बयान को सुधारते हुए कहा कि मैंने गलती से मोहम्मद अली जिन्ना का नाम ले लिया जबकि मुझे मौलाना आजाद कहना था।शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान पर उनके पुराने साथी उनपर टूट पडे और उन्हें बैकफुट पर आना पडा।कमान से निकली तीर और जबान से निकली बोल कभी वापस नहीं आती ये शत्रुघ्न सिन्हा को सोचना होगा।

भारत में देश विभाजन के लिए मोहम्मद अली जिन्ना को हीं कसूरवार ठहराया जाता है जबकि जिन्ना के इस फैसले में ब्रिटिश हुकूमत पूरी तरह जिन्ना के साथ थी।इस बंटवारे में दोनों तरफ से पाँच लाख लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था, हजारों बेगुनाह औरतों के साथ बलात्कार किया गया था।लगभग एक करोड़ के आसपास शर्णार्थियों की संख्या पहुंच गई थी।जिन्ना के नुमाइंदगी में हीं मुस्लिम लीग ने बंटवारे की नींव रखी थी।जिन्ना मुसलमानों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान चाहते थे और उनकी इच्छा ब्रिटिश हुकूमत ने देश को आजाद करके पूरी कर दी।भरे मन से हीं सही इस बंटवारे के ऐतिहासिक दस्तावेज पर महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मोहम्मद अली जिन्ना और बहुत से नेताओं के हस्ताक्षर अंकित हैं।

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