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गठबंधन के चक्कर में प्रियंका की कट गई बनारस वाली पतंग

Bhola Tiwari Apr 28, 2019, 11:34 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव



एनडीटीवी इंडिया के बाबा यानी मनोरंजन भारती अपने प्रोग्राम में ये बता रहे थे कि उन्हें विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि प्रियंका गांधी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगी।हो सकता है उनके सूत्र सच के काफी करीब पहुँच गए हों लेकिन ये बिना मायावती के रजामंदी के संभव न था और मायावती इसके लिए तैयार नहीं हुईं।अखिलेश यादव दबीजुबान में प्रियंका का समर्थन करना चाहते थे मगर मायावती इसके लिए तैयार नहीं हुईं और फिर प्रियंका को मोदी के सामने लड़ने का विचार त्यागना पड़ा।प्रियंका बहुत चतुर हैं वो बेवजह शहादत देने को तैयार नहीं हुईं और होना भी नहीं चाहिए क्योंकि नरेंद्र मोदी के सामने प्रियंका की हार तो तय थी मगर वो सम्मानजनक हार चाहतीं थीं।

मायावती जानती हैं कि प्रियंका गांधी प्रदेश की राजनीति में अपने आप को स्थापित करने के लिए बैचेन हैं और इसके लिए वह संसदीय चुनाव में नरेंद्र मोदी के सामने चुनाव लड़ने की जोखिम उठाने को भी तैयार है।गठबंधन के सपोर्ट करने पर वह नरेंद्र मोदी से थोडा हीं पीछे रहेंगीं और वह हार कर भी सिकंदर बन जाएंगी।मायावती उन्हें शहीद नहीं बनने देना चाहतीं हैं क्योंकि फिर वो गले में फंसी हड्डी की तरह हो जाएंगी जिसे न निगलते बनेगा और न हीं उगलते।सभी जानते हैं कि प्रियंका गांधी में लोग इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं और भारतीय जनमानस कब पलटी मार दे किसी को नहीं मालूम।वैसे आपको बता दें प्रियंका गांधी की नजर आगामी विधानसभा चुनाव पर है और इसके लिए वो लोकसभा चुनाव के बाद से हीं प्रयास शुरू कर देंगी, बहुत से जगहों में तो उन्होंने संगठन खड़ा भी कर दिया है।ये तो तय मानिए आगामी विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष की काफी गुंजाइश है और गठबंधन इतनी आसानी से कांग्रेस को खारिज नहीं कर पाएगा।

अगर गठबंधन सहयोग कर देता तो प्रियंका गांधी वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव अवश्य लड़ जातीं इसमें कोई दोराय नहीं है।बिना गठबंधन के सहयोग के इस चुनाव में मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ना राजनीतिक आत्महत्या होती जो कोई नहीं चाहेगा।राजनीति में प्रियंका गांधी का भविष्य बेहद उज्जवल है इसमें किसी को संदेश नहीं केवल भक्तों को छोड़कर।मैं तो मानता हूँ प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी से हर मामले में बेहतर हैं और कुछ हीं दिनों में वो राजनीति की पटल पर छा सकतीं हैं।अखिलेश यादव बेहद उदार और सुसंस्कृत हैं मगर मायावती जानतीं हैं कि प्रियंका की शहादत गठबंधन को काफी भारी पडेगी, यही वजह है जिसके कारण मायावती ने प्रियंका को सपोर्ट नहीं किया और वे सारी तैयारी के बावजूद वाराणसी से चुनाव नहीं लड़ सकीं।

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