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तबलीगी जमात में शामिल धार्मिक प्रचारकों को ब्लैक लिस्ट करेगी सरकार

Bhola Tiwari Mar 31, 2020, 9:01 PM IST टॉप न्यूज़
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● तबलीगी जमात मैं शामिल धार्मिक प्रचारकों ने वीजा नियम का किया उल्लंघन

● मिशनरी वीजा के बजाय टूरिस्ट वीजा पर भारत पहुंचे धार्मिक प्रचारक


सिद्धार्थ सौरभ

नई दिल्ली : दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र से 24 कोरोना पॉज़िटिव मरीजों के सामने आने और 350 से अधिक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद देश में हड़कंप है। अब केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय ने यहां हुए कार्यक्रम के विषय में बारीकी से छानबीन शुरू कर दी है। केंद्र सरकार तबलीगी जमात में शामिल धार्मिक प्रचारकों को ब्लैक लिस्ट करेगी। 

इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि इन लोगों ने वीजा नियमों का उल्लंघन किया है। ये सभी लोग टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आए थे और इनके द्वारा अथॉरिटी को किसी जमात में शामिल होने की जानकारी नहीं दी गई थी। ऐसे में इस वीज़ा नियमों का उल्लंघन माना गया है।

अब सवाल उठता है कि आखिर तबलीगी जमात में विदेशी टूरिस्ट वीजा के साथ कैसे शामिल हो गए? यह भी ध्यान देने वाली बात है कि दिल्ली में कुछ ही दिन पूर्व हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए थे और फिर उन दंगों के बाद तबलिगी जैसा एक कट्टरपंथी संगठन एक जलसा आयोजित करता है जिसमें विदेशी मजहबी आका बनकर आते हैं और शामिल होते हैं। किसने इन सभी विदेशियों को ‘सम्मेलन’ के लिए यहाँ आने का वीजा दिया? आखिर खुफिया एजेंसी क्या कर रही थीं?


गौरतलब है कि किसी भी प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने के के लिए, 3 जगह से मंजूरी लेनी पड़ती है, पुलिस, गृह मंत्रालय (आईबी) और विदेश मंत्रालय। इतनी बड़ी चूक कई प्रश्नों को खड़ा करते हैं। एक भवन में 1000 से अधिक लोग जमा हो जाते हैं और पुलिस ने नींद से जागना भी उचित नहीं समझा ? आखिर उस क्षेत्र के क्षेत्र के डीएम क्या कर रहे थे? विधायक और एमपी का क्या कोई कर्तव्य नहीं था?


चौंकाने वाली बात यह है कि अब इस सम्मेलन में 1830 लोगों के होने की खबर आ रही है जो अन्य राज्यों में भी जा चुके हैं। इन सभी का पता लगाना मुश्किल है और यह सोचने वाली बात है कि यह सभी कोरोना वायरस लेकर घूम रहे थे और न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर चुके होंगे।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऐसे में अब पुलिस-प्रशासन इनकी तलाश में जुटी है, ताकि लोगों को क्वारनटीन किया जा सके। 

दरअसल, राजधानी दिल्ली में धारा-144 लागू होने के बावजूद दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित तबलीगी जमात के सेंटर मरकज में 1600 से अधिक लोग एकत्रित हुए थे, अब इन्हीं में 24 को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है और 300 से अधिक लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।


यही नहीं इस कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौटे 10 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जिसमें से 9 भारतीय और एक विदेशी नागरिक है। इसमें से 6 तो तेलंगाना के थे। जलसे से लौटे 60 वर्षीय व्यक्ति की बीते हफ्ते कश्मीर में मौत के बाद खतरे की घंटी बज गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को देखें तो दिल्ली सरकार ने 13 मार्च को दिल्ली में खेल समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन 13-15 मार्च के बीच 8000 लोगों के साथ निज़ामुद्दीन में जलसा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके बाद दिल्ली सरकार 16 मार्च को सभी सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, धार्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों को प्रतिबंधित करती है। लेकिन यही सरकार सीधे 29 मार्च को जागती है जब निजामुद्दीन से कोरोना के मरीज पूरे देश में फैल जाते हैं।


इस दौरान वहां जांच में सैकड़ों कोरोना संदिग्ध पाए गए। 204 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करवाया गया, जिनमें से 6 लोगों में रविवार को संक्रमण में पुष्टि हुई। इसके बाद 28 मार्च को एसीपी लाजपतनगर ने आयोजकों को फिर से नोटिस भेजा। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि दिल्ली सरकार को भी जानकारी दी गई थी। बावजूद दिल्ली सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

दक्षिण-पूर्व जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि यह सूचना पहले ही दिल्ली सरकार और एसडीएम को दे दी गई थी। बताया जा रहा है कि संबंधित एजेंसियों की टीमों ने मौका मुआयना भी किया और डॉक्टरों की टीम भी भेजी गई थीं, परंतु सब खानापूर्ति की गई थी। पूरे देश के लोगों को इस बात का डर सता रहा है कि ये सभी लोग देश में घूम घूम कर कोरोना बांटे और देश को कोरोना के तीसरे स्टेज में ना धकेल दें।

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