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क्या है तबलीकी जमात और मरकज?जिनके ऊपर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं...

Bhola Tiwari Mar 31, 2020, 1:24 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली  : दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज से अब तक कुल 860 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पतालों में पहुँचाया गया है।इसमें सैकड़ों विदेशी हैं जो मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान के नागरिक हैं।ये सभी विदेशी नागरिकों ने 01 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था।ये जलसा खत्म होने के बाद देश भर में अपने धर्म के प्रचार के लिए रूके थे।इसी बीच लाँकडाउन हो गई और वे निजामुद्दीन स्थित मरकज में फंस गए, ऐसा वहाँ के मौलाना का कहना है।जबकि दिल्ली सरकार ने मरकज के मौलाना पर केस दर्ज करवाया है।मरकज के प्रवक्ता ने दिल्ली पुलिस को बताया कि विदेशी मेहमान तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लेकर अपने देश को जाना चाहते थे मगर लाँकडाउन की वजह से उन्हें यहां रूकना पडा।उन्होंने भारत सरकार को लिखे पत्र को भी जारी किया है।

दिल्ली सरकार का कहना है कि हजरत निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के हेडक्वार्टर में सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रखा गया और इतने लोग वहां इकठ्ठा हैं।इस बात को सरकार से छुपाया गया।अब कौन सही है और कौन गलत इसका फैसला तो जाँच के बाद हीं होगा मगर वहाँ लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण बहुत तेजी से फैला है ये तेलंगाना के छह लोगों की मृत्यु से स्पष्ट हो चुका है।ये सभी मार्च में होने वाले तब्लीग-ए-जमात का हिस्सा थे।कश्मीर में भी एक मौत यहाँ शिरकत किए श्रद्धालु की हुई है और उसने अपने परिवार को भी संक्रमित कर दिया है।अंडमान से आए लोगों ने वहाँ जाकर दस लोगों को संक्रमित कर दिया है।पुलिस ने बताया है कि मरकज में तकरीबन 1400 लोग रूके थे और सबके नाम और पते लिये जा रहे हैं।


अब ये प्रश्न उठता है कि आखिर क्या है जमात?आपको बता दें तबलीगी का मतलब होता है अल्लाह की कही बातों का प्रचार करनेवाला।वही जमात का अर्थ होता है समूह।मतलब अल्लाह की बातों का प्रचार करनेवाला समूह।मरकज का मतलब होता है मीटिंग के लिए जगह।दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के हेडक्वार्टर में इकठ्ठा होने वाले ये वही व्यक्ति थे जिन्हें जलसे के बाद विभिन्न देशों, शहरो,कस्बों, गाँवों में जाकर परंपरागत इस्लाम का प्रचार करना था।इसी बीच लाँकडाउन ने उन्हें वहां रहने को मजबूर किया था।

1927 में इस आंदोलन की शुरुआत मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने हरियाणा के नूंह जिले के कांधवली गाँव से शुरू की थी।इस आंदोलन को शुरुआत करने की आवश्यकता तब महसूस की गई जब उस समय आर्यसमाज की ओर से "घर वापसी" का अभियान चलाया जा रहा है।गौरतलब है कि मुगल काल में लाखों की संख्या में हिंदुओं ने भयवश या किसी लालच के कारण इस्लाम कबूल कर लिया था मगर उनकी बहुत सी आदतें, रितिवाज और धार्मिक पद्धति हिंदुओं की हीं थी।आर्यसमाज की नजर ऐसे हिंदू से मुस्लिम बने लोगों पर थी।उन्होंने इसके लिए जबरदस्त अभियान चलाया था और बहुत जगह वे कामयाब भी हो रहे थे।शुद्धिकरण अभियान की सफलता को देखकर सन् 1927 में तबलीगी जमात की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य लोगों को परंपरागत इस्लाम की बातों को बताना था,जिससे वो अपने धर्म के प्रति जुडाव महसूस कर सकें।


बताते हैं कि तबलीगी जमात ने अपनी तकरीरों और तर्कों से उस पलायन को थाम लिया था जो आर्यसमाज चाहता था।मौलाना मुहम्मद इल्यास कांधलवी की मृत्यु (13 जुलाई 1944) तक इस जमात ने भारत के कई हिस्सों में अपने मरकज स्थापित कर लिये थे।तबलीकी जमात के अनुसार पूरे विश्व में उसके पंद्रह करोड अनुयायी हैं और लगभग 213 मूल्कों में उनकी शाखाएं काम कर रही है।

इस जमात का सबसे बड़ा जलसा हर साल बांग्लादेश में आयोजित होता है।इसके अलावा भारत और पाकिस्तान में भी इस जमात का एक सालाना जलसा आयोजित होता है।इस जलसों में दुनिया भर से बडी संख्या में मुसलमान शिरकत करते हैं।

आपको बता दें तबलीकी जमात कई बार खुफिया एजेंसियों की रडार पर आ गई है।उस पर आरोप लगे हैं कि पलवल में बन रही एक मस्जिद में आतंकी हाफिज सईद के फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन का पैसा लगा है।सरकार ने 2018 में इसकी जाँच शुरू कर दी थी।दारूल उलूम देवबंद से तबलीकी जमात की तनातनी जगजाहिर है।दारूल उलूम देवबंद ने उसपर आरोप लगाए हैं कि वे इस्लाम की गलत व्याख्या कर रहा है, जिससे उसकी छवि पर आंच आ रही है।देवबंद ने जमात के भारत में सदर मौलाना साद पर इस्लामिक शरियत के गलत मायने बताने और अल्लाह के पैगम्बरों का अपमान का आरोप लगाया है।उन्होंने ये भी कहा था कि मौलाना साद गुमराह हो गए हैं और उनको बिना किसी देरी के तौबा करनी चाहिए।

आपका ध्यान मैं 17 नवंबर 2011 के विकिलीक्स खुलासे पर दिलाना चाहूंगा, जिसमें कहा गया था कि तबलीकी जमात की मदद से भारत में अलकायदा के नेटवर्क से जुड़े लोगों द्वारा रूपया और वीजा हासिल किया जा रहा है।हलांकि जमात के उलेमाओं ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि जमात सिर्फ धर्म के प्रचार के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाती है।

18 जनवरी 2016 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हरियाणा के मेवात स्थित नूहु से अलकायदा के एक संदिग्ध आतंकवादी को गिरफ्तार किया था।ये संदिग्ध तबलीकी जमात में शामिल होने झारखंड से मेवात पहुँचा था।

आज फिर तबलीकी जमात विवाद में है और उसपर लापरवाही और जानबूझकर जानकारी छूपाने के आरोप लग रहें हैं।लगता है विवादों से जमात का चोलीदामन का साथ हो गया है।

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