ब्रेकिंग न्यूज़
मां लक्ष्मी का ऐसा मंदिर, जहां एक सिक्के से होती है हर इच्छा पूरी         इस शिवलिंग में हैं एक लाख छिद्र, यहां छुपा है पाताल का रास्ता         विपक्ष करता रहा हंगामा और मोदी सरकार ने राज्यसभा में भी पास कराए कृषि बिल, किसानों को कहीं भी फसल बेचने की आजादी         पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप         BIG NEWS : एक पत्रकार, चीनी महिला और नेपाली नागरिक गिरफ्तार, चीन को खुफिया जानकारी देने का आरोप         जम्मू कश्मीर में बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा : बिजली-पानी के बिलों पर एक साल तक 50 प्रतिशत की छूट का ऐलान         ऐसा मंदिर जहां चूहों को भोग लगाने से प्रसन्न होती है माता         यहां भोलेनाथ ने पांडवों को दिए शिवलिंग के रूप में दर्शन !         BIG NEWS : राजौरी में लश्कर-ए-तैयबा के 3 आतंकी गिरफ्तार, 1 लाख रुपये समेत AK-56 राइफल बरामद         BIG NEWS : आतंकी संगठन अल-कायदा मॉड्यूल का  भंडाफोड़, 9 आतंकी गिरफ्तार         BIG NEWS : पश्चिम बंगाल और केरल में एनआईए की छापेमारी, अल-कायदा के नौ आतंकी गिरफ्तार         BIG NEWS : दिशा सालियान के साथ चार लोगों ने कियारेप !         अनिल धस्माना को NTRO का बनाया गया अध्यक्ष         जहां शिवलिंग पर हर बारह साल में गिरती है बिजली         BIG NEWS : पाकिस्तान की नई चाल, गिलगित-बल्तिस्तान को प्रांत का दर्जा देकर चुनाव कराने की तैयारी         BIG NEWS : सहायक पुलिस कर्मियों पर लाठीचार्ज, कई घायल, आंसू गैस के गोले छोड़े         BIG NEWS : सर्दी के मौसम में लद्दाख में मोर्चाबंदी के लिए सेना पूरी तरह तैयार          “LAC पर चीन को भारत के साथ मिलकर सैनिकों की वापसी प्रक्रिया पर काम करना चाहिए” :  विदेश मंत्रालय प्रवक्ता         BIG NEWS : जम्मू कश्मीर पहुंचे सेनाध्यक्ष ने सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा, उपराज्यपाल से भी की मुलाकात         BIG NEWS : 'मैं भी मारा जाऊंगा'         एक ऐसा मंदिर जहां पार्वतीजी होम क्वारैंटाइन में और महादेव कर रहे हैं इंतजार         अदृश्य भक्त करता है रोज भगवान शिव की आराधना , कौन है वो ?         BIG NEWS : सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ठिकाना ढूंढ निकाला, भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद         BIG NEWS : “भारत बड़ा और कड़ा क़दम उठाने के लिए तैयार”: राजनाथ सिंह         BIG NEWS : श्रीनगर एनकाउंटर में तीन आतंकियों को मार गिराया         इलाहाबाद में एक मंदिर ऐसा, जहां लेटे हैं हनुमान जी         यहां भगवान शिव के पद चिन्ह है मौजूद         BIG NEWS : दोनों देशों की सेनाओं के बीच 20 दिन में तीन बार हुई फायरिंग         BIG NEWS : मॉस्को में विदेश मंत्रियों की मुलाकात से पहले पैंगोंग सो झील के किनारे चली थी 100-200 राउंड गोलियां- मीडिया रिपोर्ट         BIG NEWS : पाकिस्तानी सेना ने सुंदरबनी सेक्टर में की गोलाबारी, 1 जवान शहीद         CBI को दिशा सलियान की मौत की गुत्थी सुलझाने वाले कड़ी की तलाश !         हर साल बढ़ जाती है इस शिवलिंग की लंबाई, कहते हैं इसके नीचे छिपी है मणि         कलयुग में यहां बसते हैं भगवान विष्णु...         BIG NEWS : देश से बाहर प्याज निर्यात पर प्रतिबंध         BIG NEWS :  LAC पर हालात बिल्कुल अलग, हम हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार : राजनाथ सिंह         

पटना के घाट: यादें कुछ पुरानी

Bhola Tiwari Mar 23, 2020, 8:45 AM IST टॉप न्यूज़
img


अमरेंद्र किशोर

नई दिल्ली  : "मीर अशरफ ईस्ट इंडिया कंपनी के जमाने में अंग्रेजों के गुमास्ता थे-- शौक़ीन थे और फिरंगियों के ख़ास थे', कहते हैं पत्रकार अरुण सिंह। अरुण सिंह पटना के इतिहास को मुंहजुबानी सुनाते हैं। मीर अशरफ का काम था ईस्ट इंडिया कंपनी के बंगाल के इस इलाके में फिरंगियों की ओर से खरीद बिक्री के मामलों की देख रेख करते थे और साथ मे कंपनी के बहीखाता लिखने का भी काम करते थे।

अशरफ अशरफ की हवेली आज भी मौजूद दिखती है पटना के गंगा किनारे, जहाँ आज भी बादशाह नवाज रिज़वी ट्रेनिंग कॉलेज है। "यह कॉलेज साल 1909 अस्तित्व में आया और निजी प्रयासों से बना यह हिन्दुस्तान का पहला ऐसा शिक्षण संस्थान है जो सिर्फ कन्याओं की शिक्षा के लिए स्थापित किया गया था। आज इस ट्रेनिंग कॉलेज की इमारत और उससे जुड़ी अशरफ की हवेली पटना रिवर फ्रंट की हेरिटेज बिल्डिंग घोषित की गयी है। बादशाह नवाज रिज़वी ट्रेनिंग कॉलेज पुराने समय से अपनी भूत क़िस्साओं के लिए जाना जाता है। कहते हैं यहां दिन में आत्माएं भटकती हुई क्लास रूम में चली आती थीं। गंगा किनारे इमारतों में भूतों की बसाहट के एक से एक किस्से हैं। इसकी चर्चा फिर कभी करूँगा जब हम रौशन घाट और टेकारी हाउस की चर्चा के दौरान। बस इतना जान लीजिये कि टेकारी हाउस 1805 में बना। तब टेकारी के राजा थे मित्रजीत सिंह। 


रानी घाट-घघा घाट और गुल्बी घाट अपने बचपन से देखता रहा हूँ। क्योंकि यह महेन्द्रू मुहल्ला के करीब है, जहाँ हम रहते थे। यह घाट बचपन की यादों में बसा एक ख़ास अहमियत रखता है। क्योंकि हम जब भी वहां जाते तो उस गोल निशान को जरूर निहारते थे। कहते हैं यह खतरे का निशान है-- गंगा का पानी जैसे ही इस गोल चाँद को छूने लगता था किनारे की बस्तियां खाली करवाने का काम सरकार करवाती थी। तब के आर्किटेक्ट ने महात्मा बुद्ध की उस बात को ध्यान में रखा था कि 'पटना को तीन बातों का भय हर समय बना रहेगा-- पहला आग, दूसरा पानी और तीसरा दुश्मन-- क्योंकि पटना में पहले 84 दरवाजे थे, लकड़ियों के। इस लिए आग का भय था। पानी, क्योंकि पटना के उत्तरी छोर पर गंगा, पश्चिम में सोन और पूरब को घेरती हुई पुनपुन नदी बहती है। गंगा उस पार वैशाली गणराज्य था जिसके साथ मगध का पुराना वैमनस्य बेहद गहरा था।      

      

आईये रानी घाट जो बेहद पुरानी जगह है जहाँ पांच मंदिर आज भी हैं, जिनमें तीन शिवालय है, एक चित्रगुप्त मंदिर है और एक महावीर मंदिर भी है। घाट के जीर्णोद्धार की कहानी लोकश्रुतियों में आज भी चर्चित है कि रानी अहिल्या बाई ने पूरे घाट की मरम्मत करवाकर इसे खूबसूरत बनवाया था। अरुण सिंह कहते हैं कि संभवतः इसके बाद से उक्त घाट 'रानी घाट' के नाम से पुकारा जाने लगा। पति की मृत्यु के बाद उत्तर भारत में कई स्थानों पर घाट और मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार अहिल्याबाई ने कराया था। बचपन से सुनता आ रहा था कि रानी सुरंग के रास्ते घाट पर नहाने आती थी किन्तु न कोई सुरंग दिखा और न ही रानी के नहाने की कोई जगह अलग से तय थी। 

मसान घाट है गुलबी घाट। अंग्रेजों की डायरी में वर्तमान गुलबी घाट के बगल में मिस्टर गॉल्वी का मकान दर्शाया गया है। उस दौर में वैशाली, सारण और दानापुर की ओर से लोग उक्त घाट से पुराना पटना में प्रवेश करते थे। सख्त अंग्रेजी प्रशासक गॉल्वी आने-जाने वालों पर यहीं से नजर रखते थे। उन्हीं के नाम पर गुलबी घाट का नामकरण बाद में किया गया। वर्तमान में उक्त घाट दाह-संस्कार के लिए प्रसिद्ध है। इस घाट की बदहाली पर सचित्र विस्तार से लिखूंगा। फिलहाल चलें महेंद्रू घाट।

महेंद्रू घाट कब बना इसका कोई प्रमाण नहीं। महेंदू्र घाट पर अंग्रेजी शासन के पहले डच लोगों द्वारा व्यापार करने के प्रमाण हैं। पटना कॉलेज कैंपस और कलेक्ट्रेट के कई भवन डच व्यापारियों द्वारा ही बनाए गए थे। यहां से पहले रेलवे का स्टीमर चलता था जो इस ओर की सत्ता और उस पार के समाज का सम्पर्क सूत्र था। नदी के कटाव और पानी की गहराई के कारण घाट की प्रासंगिकता कम और ज्यादा होना सामान्य बात है। तो समय का रुख बदला, गंगा की करवट ने बहुत कुछ बदल दिया। गंगा दूर चली गईं। छोड़ गई अपने पीछे असभ्यों का लिजलिजा चरित्र, जिसे न जीने का सलीका आता है और न नदियों के मिजाज को समझने की तमीज। 

उन्हीं बदतमीज और बदमिजाजों में कुछ लोग गंगा के उद्धार का स्वांग रच रहे हैं।

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links