ब्रेकिंग न्यूज़
पाकिस्तान में कोरोना : राशन सिर्फ मुसलमानों के लिए है, हिंदूओं को नहीं मिलेगा         चीन को खलनायक बनाकर अमेरिकीपरस्त प्रेस ने निकाली मीडिया की मैयत..         विएतनाम पर बीबीसी की रिपोर्ट : किस पर भरोसा करें!         पाकिस्तान में कोरोना : मास्क और ग्लव्स की जगह पॉलिथीन पहनकर इलाज कर रहे हैं डॉक्टर         राजकुमारी मारिया टेरेसा की कोरोना से मौत         टाटा ग्रुप ने 1500 करोड़,.अक्षय कुमार ने 25 करोड़ सहायता राशि का किया ऐलान, किन-किन हस्तियों ने दिया कितना दान         लॉकडाउन... मौत की राह में पलायन की अंतहीन पीड़ा         कोरोना को ‘इन्फोडेमिक’ बनाने से बचना होगा         कैराना बनता जा रहा है कोरोना          कोरोना से निपटने में PM मोदी ने की दान की अपील, भारी ट्रैफिक से वेबसाइट क्रैश         कोरोना : भारतीय रेल का अनोखा प्रयोग, ट्रेन की बोगियों को बनाया आइसोलेशन वार्ड         “मेड इन चाइना”: चीन के कोरोना टेस्ट किट ने स्पेन को दिया धोखा, सही जानकारी नहीं दे रहा है किट         बुजुर्गों को मौत परोसती पीढियां         पाकिस्तानी आर्मी कोरोना संक्रमित मरीजों को जबरन भेज रही पीओके और गिलगिट- बल्तिस्तान         कोरोना इफेक्ट : सस्ते लोन-EMI पर तीन महीने की छूट : RBI          कोरोना कोलाहल : डीसी आदेश के सामने नृत्य करते सत्ता के पैबंद          बनारस के कोइरीपुर में घास खा रहे मुसहर         चलो कुदरत की ओर...         अब, वतन लौट जाऊंगा...         मक्खियों के जरिए भी फैल सकता है कोरोना वायरसः मेडिकल मैगजीन "द लैंसट"         मोहल्ला क्लीनिक में कोरोना : सऊदी से लौटी तबरेज की बहन से डॉक्टर, उनकी पत्नी और बेटी को कोरोना संक्रमण         केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान : 3 महीने तक 5 किलो राशन, 1 किलो दाल और रसोई गैस सिलिंडर फ्री         कोरोना पर साजिश ! चीन को कटघरे में खड़ा करने के लिए खड़े हैं कई सवाल         कब होगी जनादेश से जड़ों की तलाश          कोरोना : मोदी सरकार 80 करोड़ लोगों को देगी ₹2 और ₹3 प्रति किलो गेहूँ-चावल         अंधविश्वास का वायरस..         मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ हुए क्वारंटाइन         "ग्लैमरस गर्ल आँफ पार्लियामेंट" कहा जाता था अद्वितीय सुंदरी तारकेश्वरी सिन्हा को         लॉकडाउन में मेडिकल स्टोर, राशन दुकान, पेट्रोल पंप, एलपीजी, एटीएम खुले रहेंगे         सभी सरकारी व प्राइवेट कंपनियों से कर्मचारियों की नौकरी बहाल रखने और वेतन नहीं घटाने के निर्देश         खुद को बचाने के लिए सूर्य मंदिर ने बदल ली थी दिशा         सभ्यता पर भारी, वामपंथी तानाशाही          "कोरोना वायरस" से भी खतरनाक था 1918 में फैला "स्पेनिश फ्लू",पाँच करोड लोग काल के गाल में समाए थे         21 दिन तक पूरा भारत बंद         आर्थिक इमरजेंसी लागू कर सकते हैं प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी !         कोरोना वायरस का साइड इफेक्ट : राज्य सभा चुनाव स्थगित         नदी जो कभी बहती थी : नमामि गंगे की हो चुकी है अकाल मौत         दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई : शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों को हटाया         शर्म मगर आती नहीं...         कोरोना वायरस और इम्युनिटी         स्थिति एक, एटीच्यूड दो          बड़ी खबर : सुरक्षाबलों ने आतंकी मॉड्यूल का किया खुलासा, हथियारों का जखीरा बरामद         पटना के मस्जिद में 12 विदेशी मुसलमान : घूम-घूम शहर में कर रहे थे इस्लाम का प्रचार        

कोरोना वायरस : आयु का गणित

Bhola Tiwari Mar 22, 2020, 7:49 AM IST टॉप न्यूज़
img


डॉ प्रवीण झा

(जाने-माने चिकित्सक नार्वे)

अब यह कोई छुपा रहस्य नहीं कि कोरोना एक ख़ास आयु-वर्ग को टारगेट कर रहा है। तमाम कॉन्सपिरेसी थ्योरी के पीछे भी यह कहानी है जब वे इस साँख्यिकी का हवाला देते हैं। यह इस मामले में विचित्र तो है कि अगर यह महामारी अपने चरम पर पहुँच जाती है तो संभवत: अस्सी वर्ष से ऊपर की बड़ी जनसंख्या खत्म हो चुकी होगी। ये प्रश्न भी उठ रहे हैं कि जर्मनी और स्कैंडिनैविया में मरीजों की संख्या के मुकाबले मृत्यु-दर क्यों कम है? इसका भी जवाब यहीं छुपा है।

अगर आँकड़े देखें जाएँ तो इन देशों के कोरोना मरीजों में लगभग तीन-चौथाई सत्तर वर्ष से कम उम्र के लोग हैं। और उन पर कोरोना का प्रभाव कुछ ख़ास नहीं पड़ रहा। वहीं इटली के मरीजों में लगभग सत्तर प्रतिशत लोगों की उम्र पचास से ऊपर है, तो सैकड़ों मर रहे हैं।

इस गणित के पीछे एक और वजह है कि जर्मनी और स्कैंडिनैविया बड़े पैमाने पर जाँच कर रही है। जर्मनी में तो ‘ड्राइव-थ्रू’ से कोरोना की जाँच हो रही है। ऐसा दक्षिण कोरिया में जरूर हुआ कि हल्के शक पर भी पकड़ कर जाँच करने लगे, लेकिन अन्य देश इस तरह की रणनीति नहीं अपना रहे। भारत के बजट पर तो यह मुमकिन ही नहीं, हमें भी यह समझना चाहिए। नॉर्वे में लगभग 45000 लोगों को जाँचने के बाद 2000 पॉजिटिव मिले। और मृत्यु हुए मात्र सात। यह ‘ओवर-टेस्टिंग’ है, जो एक अमीर देश ही एफॉर्ड कर सकता है; भले WHO कहती रहे।

लेकिन, एक बात जो स्पष्ट दिखने लगी है, वह ये कि सत्तर वर्ष से ऊपर के लोग अब पूरी तरह से सचेत हो गए हैं। और चूंकि इन देशों में वृद्ध अलग ही रहते हैं तो उनका अपने परिवार से संपर्क यूँ भी कम है। वहीं, ईरान में यह देखा गया कि स्वस्थ बेटे-बेटियों ने अपने अंदर पल रहे वायरस घर के बुजुर्गों को संक्रमित किए, और वे चल बसे। भारत में भी जो दूसरी मृत्यु हुई, वह यूरोप से लौटे बेटे ने अपनी बूढ़ी माँ को दिया था। हमारे समाज में बुज़ुर्ग अपने संतानों से अधिक संपर्क में हैं, कई निर्भर भी हैं, इसलिए उन तक बीमारी पहुँचनी सहज है। भले वे पूरे दिन घर में ही रहें, उनके संतान बाहर से वायरस ले आएँगे। युवा वायरस पाल कर भी स्वस्थ रहेंगे, लेकिन उनके घर के बुजुर्ग गंभीर हो जाएँगे।

इस पूरी भूमिका का ध्येय यह है कि हम जब ऑफिस से या बाहर से घर लौटें, तो निश्चिंत रह सकते हैं कि कोई गंभीर बीमारी नहीं होगी। लेकिन, आप यह ध्यान रखें कि घर में बुजुर्ग भी हैं, और उनके लिए यह जानलेवा हो सकता है। उनसे संपर्क से पहले, अपने कपड़े बदल कर, हाथ धोकर, वायरस-मुक्त हो जाएँ। तभी मिलें। यह बात कोरोना से इतर भी लागू होती है। 

उस संतान की मनोस्थिति सोचिए, जिसे मामूली छींक आयी, वह ठीक भी हो गया; लेकिन उसे मालूम पड़ा कि उसी की वजह से उसकी माँ की मृत्यु हो गयी। यह भला कौन चाहेगा?

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links