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मौत का खौफ

Bhola Tiwari Mar 20, 2020, 5:41 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली  : तारीख 19 मार्च 2020 की रात,तिहाड़ जेल में बंद चार कैदियों के चेहरे पर खौफ फैला था।पिछली रात भी वे ठीक से सोये नहीं थे,आज तो सवाल हीं नहीं था क्योंकि आज की हीं रात कोर्ट ये फैसला देने वाला था कि उन्हें फाँसी आज की सुबह लगेगी या कुछ दिनों बाद।सजायाफ्ता चारो कैदियों ने खाना भी नहीं खाया था मगर उन्हें भूख कहाँ लग रही थी।वे तो बार-बार अपने किये कर्मों की माफी मांग रहे थे मगर जेल की खामोश दीवारों से उनकी आवाज टकराकर वापस आ जा रही थीं।बेबसी इतनी थी कि आँख से झर-झर आँसू गिर रहे थे मगर उन्हें पोछने वाला माँ का आँचल नदारद था।

साढ़े तीन बजे कोर्ट ने दोषियों की याचिका खारिज कर दी।अब मौत से कोई बचा नहीं सकता था, दोषियों के वकील एस.पी.सिंह भी नहीं।शायद नियती को यही मंजूर था।बैरक में हलचल होने लगी थी तब चारों ने समझ लिया कि अब उनका अंतिम समय आ गया है।जेल प्रशासन ने उन्हें आधिकारिक तौर पर सूचित किया कि सुबह साढ़े पांच बजे आप चारों को फाँसी दी जाएगी।तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों(पवन,मुकेश,अक्षय और विनय)को नया कपड़ा पहनने को दिया जो फाँसी से पहले की प्रक्रिया है मगर कोई पहनने के लिए तैयार नहीं था।प्रशासन के समझाने पर अक्षय और विनय ने स्वेच्छा से कपडा पहना,पवन और मुकेश को कपडा पहनाने के लिए जबरजस्ती की गई।चारो फाँसीघर की तरफ जा नहीं रहे थे,सिपाहियों द्वारा पकड़कर उन्हें फाँसीघर पहुँचाया गया।जब हाथ बांधने की बारी आई तो उनके सब्र का बाँध टूट गया और वे फूट-फूटकर रोने लगे।लीवर खींचने तक उनकी सिसकियों को सुना गया फिर मुँह पर काला कपडा पहनाकर उन्हें उनके पापों की सजा दे दी गई।

एकाएक भयावह सन्नाटा पसर गया, जो अभी जान की भीख मांग रहे थे,बेआवाज़ हो गए थे।

फांसी के आधे घंटे तक इन चारों का शव फाँसी के तख्ते पर लटका रहा।आधे घंटे के बाद तिहाड़ जेल के मेडिकल आँफिसर ने इनकी नब्ज की जाँच की और इन्हें मृत घोषित कर दिया।मौत की पुष्टि होने के बाद इनका पोस्टमार्टम कराया गया।जेल मैनुअल के मुताबिक पोस्टमार्टम के बाद हीं मृतक शरीर को उनके परिवार वालों को सौंपा जाता है।

एक छोटी सी नासमझी या आवेश में किया कार्य उन्हें आगे की जिंदगी से मरहूम कर दिया।इन चारों को निर्भया की निर्ममतापूर्वक हत्या और बलात्कार के मामले में फाँसी हुई है।यह बहुचर्चित केस सात सालों तक विभिन्न कोर्ट में चला मगर इसका भी वही अंजाम हुआ जो जघन्य अपराध का होता है।अंतिम परिणति मौत को गले लगाना था और हुआ भी यही।

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