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निर्भया केस : अपनी मां के कहने पर लड़ा केस : एपी सिंह

Bhola Tiwari Mar 20, 2020, 10:47 AM IST टॉप न्यूज़
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● एक माह इधर थी एक माह उधर थी।  मेरी मां ने कहा कि तुम्हारा काम वकालत करना है, यह तुम्हारा पेशा है, तुम लड़ो। इसी दिन के लिए मैंने तुम्हें वकील बनाया है। आखिरकार तब मैंने केस लड़ने का या फैसला


सिद्धार्थ सौरभ

नई दिल्ली : 2012 निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषियों को फांसी के साथ ही सात साल पुराना इंतजार खत्म हो गया है। सात साल तीन महीने बाद निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया। इस दौरान सबसे ज्यादा कोई चर्चा में रहा तो वह हैं इन दोषियों के वकील एपी सिंह। दरअसल, एपी सिंह के कानूनी दांव पेच के चलते ही निर्भया के चारों दोषी कई साल फांसी से बचते रहे। 

एपी सिंह ने बताया कि वह इस केस को अपनी मां के कहने पर लड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि 2012 में जब वह एक दिन कोर्ट से लौटे तो उनकी मां ने उन्हें बताया कि बेटा एक महिला अपने चार महीने के बेटे के साथ घर पर आई थी। वह काफी परेशान थी। तुम उनका केस लड़ लो। इसके बाद जब उन्होंने कागज देखे और पड़ताल की तो पता चला कि यह तो निर्भया दुष्कर्म का आरोपी अक्षय है। तब उन्होंने अपनी मां से कहा कि मां यह तो बहुत बवाली केस है। पूरा देश इनकी फांसी की मांग कर रहा है। उन्होंने बताया कि तब तो निर्भया की मौत भी नहीं हुई थी। इसके बाद उनकी मां ने कहा कि तुम्हारा काम वकालत करना है, यह तुम्हारा पेशा है, तुम लड़ो। इसी दिन के लिए मैंने तुम्हें वकील बनाया है। आखिरकार उन्होंने यह केस लड़ने का फैसला किया।


 गौरतलब है कि एपी सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वो कई सालों से दिल्ली में ही रहकर वकालत कर रहे हैं। यहां पर वह अपने पूरे परिवार के साथ रहते हैं। जब कोई भी वकील निर्भया के दोषियों का केस लड़ने के लिए आगे नहीं आ रहा था तो एपी सिंह ने आगे बढ़कर यह केस अपने हाथ में लिया और 7 साल तक दोषियों के पक्ष में कानूनी लड़ाई लड़ते रहे।

निर्भया मामले में दोषियों का केस लड़ने के दौरान वह कई बार निचली अदालत से लेकर दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक से फटकार खा चुके हैं। यहां तक कि उन पर इस मामले में हजारों रुपये का फाइन भी लग चुका है। वहीं, एपी सिंह का मानना है कि यह वकालत के पेशे का एक हिस्सा है। एपी सिंह ने लखनऊ विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट होने के साथ डॉक्टरेट की डिग्री भी ली है। कुल मिलाकर वह बेहद पढ़े-लिखे वकीलों में शुमार होते हैं।


एपी सिंह ने 1997 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की थी। वह चर्चा में तब आए जब अपने वकालत के करियर में वह पहली बार वर्ष, 2012 में साकेत कोर्ट में निर्भया के दोषियों की ओर से पेश हुए थे।

एपी सिंह बताते हैं कि अक्षय को जब दुष्कर्म के आरोप में पकड़ गया था, तब उसके तीन महीने का बच्चा था। ऐसे में उसके ऊपर दया आई और उन्होंने अपनी मां के कहने पर यह केस लड़ने का फैसला किया।

उन्‍होंने बताया कि चार दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर की पत्‍नी अपने पति से मिलने के लिए बिहार से तिहाड़ जेल पहुंची थी। इसी दौरान किसी ने उसे मेरा मोबाइल नंबर दिया था। वह मेरे घर आई और मेरी मां से मिली।

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