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क्यों रहे.. ? सत्ता से बाहर निवर्तमान सांसद हाल - ए राजमहल लोकसभा

Bhola Tiwari Apr 23, 2019, 5:56 PM IST टॉप न्यूज़
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ए. के. शर्मा पाकुड़  


 राजमहल ! इसकी पहचान पहाड़ी ऋखलाऔं से अचछादित गंगा किनारे बसा प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी समाज की अलौकिक प्रेम इनकी पहचान है राजमहल लोक सभा क्षेत्र में लोक सभा चुनाव को लेकर सरगर्मी धीरे धीरे परवान पर चढ़ने लगा है। ऐसा माना जा रहा है कि नामांकन प्रकिया खत्म होने के साथ ही चुनावी तापमान सर चढ़ कर बोलने लगेगा । अ ज जा के लिए सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र में अबतक हुए चुनावी नतीजों पर गौर किया जाय तो वर्ष 1984 में हुए चुनाव के बाद एक भी निवतमान सांसद नहीं हुए जो लगातार यहां से दुसरी बार निवाचित हो पायें हो । आंकड़े बतातें है कि वर्ष1989 के आम चुनाव में इस क्षेत्र से झामुमों प्रत्याशी साइमन मरांडी 32 फीसदी वोट लाकर विजयी हुए थे। जो आज तक का सबसे ऊँचा मत प्रतिशत रहा है । 21फीसदी मत लाकर इस क्षेत्र से वर्ष 1991में सिमोन मरांडी सांसद चुने गये थे । इसी प्रकार वर्ष 1996 में 26 फीसद वोट लाकर थॉमस हांसदा ,वर्ष 1998 में 20 फीसदी वोट लाकर सोम मरांडी, वर्ष1999 में 26 फीसदी वोट लाकर पुनः थॉमस हांसदा ,2004 में 21फीसदी वोट हेमलाल मुर्मू ,2009 में14 फीसदी वोट लाकर देवीधन बेसरा तथा 2014 में 28 फीसदी वोट प्राप्त झामुमों के विजय कुमार हांसदा को यहां से सांसद चुने जाने का मतदाताओं ने मौका दिया है । एकमात्र वर्ष 1962 से लेकर 1971 तक ईश्वर मरांडी कांग्रेस के खाते में रहा । इसके बाद लगातार निवर्तमान सांसद दोबारा सीट हासिल करने में विफल रहे। राजनीतिक पंडितों का मानना है राष्ट्रीय मुद्दा और लोकल मुद्दा एवं वादे कर पुरा न करना, माना जा रहा है आदिवासी बहुलक क्षेत्र रहने के कारण आदिवासी मतदाता की संख्या ज्यादा है, आदिवासी मतदाता हर उम्मीदवार पर विश्वास कर जीत हासिल दिलाई, लेकिन विकास की किरण कोसों दूर रहने के कारण निवर्तमान सांसद वापस सत्ता में न आए। कांग्रेस की सीट क्षेत्रीय पार्टी के गठबंधन के कारण लगातार दो दशक से सत्ता से बाहर है। यह देखना यहां दिलचस्प होगा । 2019 लोकसभा चुनाव में सत्ता की बागडोर किससे मिलेगा यह तो समय बतायेगा?

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