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नहीं रहे मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक....

Bhola Tiwari Feb 26, 2020, 8:16 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली : मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक का 91 साल की उम्र में निधन हो गया।मिस्र के सरकारी टीवी ने ये जानकारी दी है।मोहम्मद सादात की हत्या के बाद हुस्नी मुबारक मिस्र के राष्ट्रपति बने थे।मुबारक ने लगातार तीस सालों तक मिस्र में शासन किया।मुबारक को "अरब स्प्रिंग" के कारण 11 फरवरी,2011 को इस्तीफा देना पड़ा था।एक मजबूत राष्ट्रपति जिन्होंने तीन दशक तक मिस्र पर एकछत्र राज किया,देश में चले 18 दिनों के आंदोलन के बाद घुटने टेकने पड़े थे।मुबारक को आंदोलन के दौरान प्रर्दशनकारियों की हत्या का दोषी पाया गया था, लेकिन बाद में उनकी सजा को माफ कर दिया गया और मार्च 2017 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था।जेल में रहने के दौरान हीं मुबारक गंभीर रूप से बीमार हो गए थे और मरने तक वे गंभीर बीमारियों से जूझते रहे।मिस्र के एक पत्रकार के अनुसार उनके अग्नाशय में कैंसर था और उसी के सर्जरी के दौरान उनके प्राण पखेरू हो गए।

हुस्नी मुबारक मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति अनवर सादात के मंत्रिमंडल में उप-राष्ट्रपति के पद पर थे और सादात की हत्या के समय वे उनकी बगल में हीं बैठे थे मगर संयोगवश या साजिशों की वजह से वे बच गए।सादात की हत्या के बाद वे राष्ट्रपति बने मगर बहुत से लोगों का मानना था कि सादात की हत्या के षड्यंत्र में मुबारक भी शामिल थे मगर कभी भी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी,होती भी कैसे जिसपर इलजाम था वही शासक बन बैठा था।

06 अक्टूबर,1981 राष्ट्रपति अनवर सादात को एक सैनिक परेड़ की सलामी लेनी थी।परेड़ के दौरान मिस्र सेना के रिंग लीड़र लेफ्टिनेंट खालेद इस्लामबोली जो इजरायल और मिस्र की दोस्ती से अनवर सादात पर बेहद खफा था उसने राष्ट्रपति सादात के ऊपर मशीनगन से हमला किया और चंद सेकंड में ही उनके शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया।अंधाधुंध फायरिंग में भी अनवर सादात के बगल में बैठे उप-राष्ट्रपति मुबारक को एक खरोंच तक नहीं आई,लेकिन सादात के एडीसी जनरल हसन आलम,उनके निजी फोटोग्राफर और बिशप सामवील मारे गए।

अनवर सादात के मौत के चंद घंटों बाद मिस्र के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने टीवी और रेड़ियो पर एलान किया,"मिस्र, अरब देशों और पूरी दूनिया को ये बताते हुए मेरी जुबान कांप रही है कि हमारे हीरो और योद्धा अनवर-अल-सादात हमारे बीच अब नहीं हैं।"

अनवर सादात की मौत के बाद उनकी बेवा जेहान सादात ने एक साक्षात्कार में कहा था कि,'जब से मेरे पति इसराइल गए थे,हर बार,हर दिन,हर मिनट जब भी वो किसी वजह से यि किसी बैठक में भाग लेने बाहर जाते थे,मुझे यही अंदेशा रहता था कि सुरक्षित वापस नहीं आ पाएंगे और उन्हें मार दिया जाएगा।"

अनवर सादात की मौत के बाद हुस्नी मुबारक राष्ट्रपति बने और उन्होंने तीन दशक तक मिस्र में शासन किया।मुबारक ने भी अपने गुरू सादात की तरह इसराइल से दोस्ती जारी रखी मगर एक सीमा तक।वे जानते थे कि देश के 80% मुसलमान इजरायल से दोस्ती पसंद नहीं करते हैं।आपको बता दें ट्यूनीशिया से सत्ता विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत हुई और जल्द ही ये विरोध-प्रर्दशन अरब के अन्य क्षेत्रों में भी फैल गए।मिस्र भी इससे अछूता नहीं रहा, वहां हुस्नी मुबारक सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए और 18 दिनों के बाद राष्ट्रपति मुबारक को इस्तीफा देना पड़ा था।मिस्र के निवासियों का कहना था कि इतने लंबे शासन करने के बावजूद मुबारक ने मिस्र की प्रगति के लिए कुछ नहीं किया।मुबारक सरकार भ्रष्टाचार को रोकने में नाकाम रही थी,अर्थव्यवस्था भी खस्तेहाल थी।बेरोजगार नौकरी के लिए सड़कों पर उतर आए थे।अरब स्प्रिंग के समय मिस्र में भयंकर सत्ता विरोधी आंदोलन हुए और हुस्नी मुबारक को मजबूरन राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।कुछ हीं दिनों बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।जेल में उन्हें कई गंभीर किस्म की बीमारियों ने जकड लिया और वे मृत्यु तक इससे जुझते रहे।

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