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"एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट"(एपीआई) के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर है भारत

Bhola Tiwari Feb 24, 2020, 11:32 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली  : हम विकास के बड़े-बड़े दावे भले से करते हैं मगर बहुत सी महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए हम पूरी तरह चीन पर आश्रित हैं।दवा बनाने के लिए कच्चा माल "ए.पी.आई" भारत चीन से आयात करता है।आप यह सुनकर हैरान रह जाएंगे कि दवा बनाने का 85% कच्चा माल(एपीआई)भारत चीन से आयात करता है।भारत में इसका प्रोडक्शन बहुत कम है और उसकी गुणवत्ता चीन के आस-पास भी नहीं टिकती।भारत में जो "एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट" तैयार होता है उसके लिए भी कुछ महत्वपूर्ण चीजें चीन से हीं आयात की जाती है।

परेशान करनेवाली बात ये है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण चीन से एपीआई का आयात बिल्कुल बंद है।चीन ने इस महामारी को रोकने के लिए कडे कदम उठाएं हैं जिनमें चीनी वस्तुओं का आयात पूर्णतया प्रतिबंधित कर दिया गया है जो सही भी है।आयात प्रतिबंधित करने से चीन की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है।चीन का वुहान शहर जहाँ से दूनिया के बहुत से देशों को सामान निर्यात किया जाता था, उस शहर को लाँकडाउन कर दिया गया है।चीनी खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हुबेई शहर से कोई भी माल बाहर नहीं जा रहा है।नागरिकों को घर से बाहर जाने की मनाही है, इस वजह से सिनेमाघर, माँल,रेस्टोरेंट, शाँपिंग काँम्पलेक्स बंद पड़े हैं।काम के बंद होने की वजह से उत्पादन और बिक्री में कमी आई है और कंपनियों के पास नगद नहीं आ रही है।इसका सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।

भारत चीन से कच्चा माल आयात कर दवाएं बनाता है और लगभग बीस देशों को निर्यात कर अरबों रुपये कमाता है।आज कच्चे माल की किल्लत के कारण भारत भी लाचार है और अनुमान लगाया जा रहा है कि दो महीने के बाद अगर चीन से कच्चे माल का आयात नहीं हुआ तो भारत में दवाओं की कमी हो जाएगी और उनकी कीमत बेकाबू हो सकती हैं।

आपको याद होगा 2014 में जब भारत और चीन में तनाव अपने चरम पे था तब भी चीन द्वारा ए.पी.आई निर्यात में आनाकानी की गई थी तब भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया था।टास्क फोर्स ने ये सुझाव दिया था कि सरकार हर हाल में एपीआई का प्रोडक्शन बढ़ाए,जिससे चीन पर निर्भरता को कम किया जा सके।

संबंधों को सुधरने पर टास्क फोर्स के सुझाव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।आज फिर वही समस्या मुँह बाए सामने खडी है और हमें सामाधान दिख नहीं रहा है।अब चिंता जताई जा रही है कि अगर चीन से एपीआई का आयात लंबे समय तक बंद रहा तो भारत के साथ दूनिया भर में दवाओं की किल्लत हो सकती है।साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को भी बडा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भारत के वैज्ञानिकों को सस्ते कच्चे माल की खोज करने की सख्त जरूरत है।भारत-चीन संबंध हमेशा तलवार की नोक पर टिके रहें हैं, कब क्या हो जाए कोई कह नहीं सकता।भारत को इस दिशा में शोध की जरूरत है जो मानवता के कल्याण में भी मील का पत्थर साबित हो सके।किसी भी देश की निर्भरता अगर किसी चीज के लिए दूसरे देश पर अगर 75-80% होगी तो समस्या होगी हीं।

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