ब्रेकिंग न्यूज़
WHO की रिपोर्ट में खुलासा : ऐसे फैलता है कोरोना वायरस         पाकिस्तान : नाबालिग को अगवा कर पहले किया रेप, फिर धर्म-परिवर्तन करा रेपिस्ट से कराई शादी         इस दीए की रोशनी         अनलॉक्ड : खुली हवाओं में सांस ले रहे हैं जीव-जन्तु         सीएम योगी का फरमान : नर्सों से अश्लील हरकत करने वाले जमातियों पर NSA, अब पुलिस के पहरे में इलाज         जमात की करतूत : नर्सों के सामने नंगा होने वाले जमात के 6 लोगों पर FIR         आप इन्फेक्टेड हो गए हैं तो काफिरों को इन्फेक्ट कीजिए : आईएसआईएस          मैं, सरकारी सिस्टम के साथ हूँ         तबलीगी जमात से जुड़े 400 लोग कोरोना पॉजिटिव, 9000 क्वारनटीन : स्वास्थ्य मंत्रालय         BIG NEWS : झारखंड में कोरोना का दूसरा मरीज मिला         सेना की बड़ी तैयारी : युद्धपोत, प्लेन अलर्ट, सेना के 8,500 डॉक्टर भी तैयार         पाकिस्तान में ऐलान : तबलीगी जमात के लोगों से नहीं मिले मुल्क के लोग         सबके राम !         तबलीगी जमात का आतंकवादी संगठनों से अप्रत्यक्ष संबंध : तस्लीमा नसरीन         BIG NEWS : झारखंड के मंत्री पुत्र को आइसोलेशन वार्ड, होम क्वारेंटाइन में मंत्री         BIG NEWS : अब 15 वर्षों से राज्य में रहने वाला हर नागरिक जम्मू कश्मीर का स्थायी निवासी         11 जनवरी से 31मार्च- 80 दिन 1920 घंटे..          क्या है तबलीगी जमात और मरकज?         खतरे में प्रिंट मीडिया         तबलीगी जमात में शामिल धार्मिक प्रचारकों को ब्लैक लिस्ट करेगी सरकार         तबलीकी जमात का सालाना कार्यक्रम :  केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का फेल्योर हीं है !         बड़ी खबर : झारखंड में कोरोना का पहला पॉजिटिव केस, हिंदपीढ़ी में मलेसिया की युवती निकली संक्रमित, तब्‍लीगी जमात से जुड़ी है मलेशिया की महिला         क्या है तबलीकी जमात और मरकज?जिनके ऊपर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं...         हे राम-भरोसे ! हमसे उम्मीद मत रखना !         होशियार लोगों का वायरल बीहेवियर         लॉक डाउन को मंत्री जी ने किया अनलॉक, डीसी का आदेश पाकर गांव की ओर चल पड़ी बसें         पाकिस्तान में कोरोना : राशन सिर्फ मुसलमानों के लिए है, हिंदूओं को नहीं मिलेगा         चीन को खलनायक बनाकर अमेरिकीपरस्त प्रेस ने निकाली मीडिया की मैयत..         विएतनाम पर बीबीसी की रिपोर्ट : किस पर भरोसा करें!         पाकिस्तान में कोरोना : मास्क और ग्लव्स की जगह पॉलिथीन पहनकर इलाज कर रहे हैं डॉक्टर         राजकुमारी मारिया टेरेसा की कोरोना से मौत         टाटा ग्रुप ने 1500 करोड़,.अक्षय कुमार ने 25 करोड़ सहायता राशि का किया ऐलान, किन-किन हस्तियों ने दिया कितना दान         लॉकडाउन... मौत की राह में पलायन की अंतहीन पीड़ा         कोरोना को ‘इन्फोडेमिक’ बनाने से बचना होगा         कैराना बनता जा रहा है कोरोना          कोरोना से निपटने में PM मोदी ने की दान की अपील, भारी ट्रैफिक से वेबसाइट क्रैश         कोरोना : भारतीय रेल का अनोखा प्रयोग, ट्रेन की बोगियों को बनाया आइसोलेशन वार्ड         “मेड इन चाइना”: चीन के कोरोना टेस्ट किट ने स्पेन को दिया धोखा, सही जानकारी नहीं दे रहा है किट         बुजुर्गों को मौत परोसती पीढियां        

भारतीय पत्रकारिता को फफूंदी बनाने वाली पत्रकार यूनियनें..

Bhola Tiwari Feb 19, 2020, 7:18 AM IST टॉप न्यूज़
img


राजीव मित्तल

नई दिल्ली : दिल्ली नभाटा के दिनों में अपने को इस बात पे बहुत गर्व होता था कि अपन श्रमिक हैं और हमारी यूनियन का नाम था भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ..इसका ऑफिस कनॉट प्लेस में सुपर मार्केट के पास हुआ करता था .. यूनियन के हेड थे कोई राघवन, अपने समय के नामी पत्रकार..उस समय सरकार खबरों को ले कर कोई कानून बनाने के फेर में थी कि उसके खिलाफ सारे पत्रकार दिल्ली की सड़कों पर उतर आए..आखिरकार सरकार पीछे हटी और कांग्रेस के बड़े नेता अर्जुन सिंह ने पत्रकारों को शांत करने के लिए तीन दिवसीय सेमिनार कराया था..

लखनऊ आने के बाद श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के. विक्रमराव ने हथिया ली..तभी पता चला कि पत्रकारों की एक यूनियन और है जो श्रमजीवी न हो कर राष्ट्रीय है और जो दिल्ली के झंडेवालान से संचालित होती है..

दोनों यूनियनों में श्रमजीवी और राष्ट्रीय होने के अलावा कुछ फर्क और थे, मसलन- श्रमजीवी पत्रकार रम में सोडा मिला कर पीते, तो राष्ट्रीय यूनियन वाले व्हिस्की में गंगाजल टपका कर..श्रमजीवी बिरियानी खाते तो राष्ट्रीय बिना प्याज लहसुन का मुर्गा.. विक्रमराव अपनी यूनियन के अधिवेशन अक्सर समुद्र तटों वाले मलयाली शहरों में करते ताकि बिकनी पहने महिला पत्रकार के साथ समुद्र स्नान किया जा सके तो पत्रकारों की राष्ट्रीय यूनियन भगवे के नीचे संतरे छीलती.. विक्रमराव को अध्यक्ष बनाये रखने में दक्खिन भारत के चिलगोजों का बड़ा हाथ था, तो राष्ट्रीय पत्रकार यूनियन सरवाहक टाइप नेताओं के झुंड के हाथों में थी..एक बात और कि मीडिया संस्थान के मालिकों का तो श्रमिक के नाम से ही हाजमा बिगड़ता था, तो उन सभी को पत्रकारों की राष्ट्रीय यूनियन से उंसियत हुआ करती थी..

के. विक्रमराव ने उत्तरप्रदेश के कुछ सौ पत्रकारों के अलावा हज़ारों उन इंसानों को भी अपनी यूनियन का सदस्य बनवाया हुआ था, जो सब कुछ थे लेकिन पत्रकार नहीं थे..इस बात का अहसास तब हुआ जब अपन ने पूर्वी जर्मनी भेजे जाने का ऑफर ठुकरा कर विक्रम राव की सत्ता को चुनौती देते हुए काउंसलर का चुनाव लड़ा और मात्र पचास वोट पाए..

तो प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय पत्रकारिता का झंडा अच्युतानंद मिश्र बुलंद किये हुए थे, जो उस समय अमर उजाला को ब्यूरो चीफ हुआ करते थे और ब्राह्मण थे तो अमर उजाला के मालिकों के अलावा मुलायम सिंह यादव भी उनके पैर छूते थे..मिश्र जी का पत्रकारों की भलाई के लिए सबसे बड़ा काम था गोमतीनगर में पत्रकारों के लिए कॉलोनी बनवाना और पत्रकारों को बजाज चेतक दिलवाना..उनका उससे भी बड़ा काम था लालकृष्ण आडवाणी के सूचना मंत्री बनने के बाद बड़े पैमाने पर उगी संघी पत्रकारों की पौध की साज संवार करना..

बाकी तो विक्रमराव हर साल छंटे हुए पांच दस पत्रकारों को सोवियत संघ के टूटने से पहले तक पूर्वी यूरोप के देशों में साल छह महीने के लिए भिजवा देते तो अच्युतानंद बाबू के पत्रकारों के लिए चित्रकूट में नाना जी देशमुख का आश्रम था, जहां कुछ समय बिता कर पत्रकार अमेरिका निकल लेते और वहां से लौट कर एनजीओ खोल कर जनता की सेवा में लग जाते..राष्ट्रीय पत्रकार संघ का चंडीगढ़ में काफी दबदबा देखा..जहां ट्रिब्यून के राधेश्याम शर्मा, नंदकिशोर त्रिखा और किन्हीं खोसला जी ने कोई देशसेवा केंद चलाया हुआ था, जो अक्सर देवीलाल के सामने हाथ पसारे रहता था..

एनयूजे यानी राष्ट्रीय पत्रकार यूनियन का प्रभाव जनसत्ता खुलने के बाद काफी बढ़ गया था क्योंकि खुद प्रभाष जोशी और एक्सप्रेस के अरुण शौरी उसी लाइन के थे, तो मालिक रामनाथ गोयनका धुर इंदिरा-राजीव विरोधी.. उसी दौरान राजेन्द्र माथुर के निधन के बाद नवभारत टाइम्स दिल्ली में हिंदी-संस्कृत के प्रकांड और स्वपाकी ब्राह्मण विद्यानिवास मिश्र को मुख्य संपादक बना कर लाया गया.. चूंकि उन्हें पत्रकारिता में वही काम करना था जो ब्रह्म ऋषि वशिष्ठ ने राजा दशरथ के यहां किया था, तो वे सहयोगी के रूप में अच्युता बाबू को ले आये..विद्यानिवास जी उन पत्रकारों को कोई भाव नहीं देते थे जो मेज के नीचे झुक कर उनके पांव न छुए..

खैर, विद्यानिवास जी के रहते जैनियों ने तीन जगह लखनऊ, पटना और जयपुर में नवभारत टाइम्स बंद कर सैंकड़ों पत्रकारों को बेरोजगार कर दिया..और अपना काम कर दोनों मिश्रा भी निकल लिए....बोलो राम नाम सत्त है..मुर्दा साला मस्त है..

जारी..

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links