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केजरीवाल माँडल अपनाकर हीं सफलता प्राप्त कर सकतीं हैं ममता बनर्जी

Bhola Tiwari Feb 16, 2020, 7:23 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली  : ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल फतह करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रणनीति पर चलना सबसे मारक होगा,अगर वास्तव में उन्होंने वहां विकास कार्य किये हैं तो।दिल्ली में केजरीवाल ने दिखा दिया है कि जो कोई भी काम करेगा जनता उसके साथ रहेगी चाहे उसके खिलाफ कितना भी दुष्प्रचार क्यों नहीं किया जाए।भाजपा ने चुनाव के समय वोटों के ध्रुवीकरण के लाख प्रयास किए मगर दिल्ली की शिक्षित जनता ने केजरीवाल के कामों पर वोट किया न कि भाजपा के छद्म हिंदुत्व पर।ममता बनर्जी को भी यही रणनीति अपनानी होगी।मुझे उम्मीद है कि प्रशांत किशोर(पी.के) ममता बनर्जी को यही सलाह देंगे।ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपने गुस्से को कंट्रोल में रखना होगा क्योंकि आज भी जनमानस प्रधानमंत्री की कुर्सी पर निर्विवाद रूप से नरेंद्र मोदी को हीं पसंद करते हैं और उनकी कटु आलोचना बर्दाश्त नहीं करते।केजरीवाल को भाजपा नेताओं ने खूब भड़काया कि वे मोदी की आलोचना करें मगर केजरीवाल ने मोदी के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोला।इस तरह दिल्ली का बनिया गुजरात के बनिये पर भारी पडा।

पश्चिम बंगाल में भाजपा की अनुवांशिक संगठनों ने पिछले कुछ सालों में अच्छी पैठ बना ली है।पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की आशातीत सफलता के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद की कडी मेहनत है।इन हिंदूवादी संगठनों ने पश्चिम बंगाल के बहुत से पिछड़े इलाकों में मजबूत पैठ बना ली है।पश्चिम बंगाल के एक पिछड़़े इलाके जंगमहल क्षेत्र में भाजपा ने काफी दबदबा कायम कर रखा है।उसके काट के रूप में ममता बनर्जी माओवादी समर्थित लालगढ़ आंदोलन का लोकप्रिय चेहरा रहे छत्रधर महतो को आगे कर चुनाव लड़ सकती है।जंगमहल इलाके में छत्रधर महतो का अच्छा खासा दबदबा है और वो पिछडी जाती से आते हैं।उस इलाके में महतो 35% हैं जो छत्रधर को अपना नेता मानते हैं।जंगमहल क्षेत्र में पुरूलिया, बांकुरा और पश्चिमी मिदनापुर के वन क्षेत्र वाले इलाके आते हैं जिसके अंतर्गत छह लोकसभा की सीटें आती हैं।इलाके के लगभग बीस विधानसभा क्षेत्र में इनका प्रभाव है।छत्रधर महतों के संबंध ममता बनर्जी से बहुत बेहतर हैं और उन्हीं के प्रयास से महतों की रिहाई भी हुई है।

आपको बता दें वर्ष 2009 में पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबनी इलाके में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य व केन्द्रीय इस्पात मंत्री रामविलास पासवान के काफिले पर माओवादियों ने हमला किया था।हमले के बाद माओवादियों की धर-पकड़ के नाम पर पुलिस ने आदिवासी इलाकों में अभियान शुरू किया था।पुलिस के कथित अत्याचार के विरोध में छत्रधर महतो ने "पुलिस संत्रास विरोध जनसाधारण कमेटी" के नाम से संगठन बनाया था।छत्रधर की अगुवाई में आदिवासियों ने पुलिस के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन चलाया,जिसे लालगढ़ आंदोलन भी कहा जाता है।इस आंदोलन में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने खुलकर छत्रधर महतो और आदिवासियों का साथ दिया।वे लालगढ़ गई और पीड़ित परिवार से बात भी कीं।उसी समय छत्रधर महतो को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था।दस साल के बाद ममता बनर्जी के प्रयास के बाद उनकी रिहाई संभव हो पाई है और उन्होंने जेल से रिहा होते हीं ममता बनर्जी को शुक्रिया भी कहा।

आपको याद होगा पिछले साल ममता बनर्जी तृणमूल के एक धरने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्तर चौबीस परगना जिले के नैहाटी जा रहीं थीं।इससे पहले मेदिनीपुर जिले में ममता के काफिले के गुजरते समय जय श्रीराम का नारा लगाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।इससे उनकी छवि हिंदू विरोधी बन गई और भाजपा लोगों को ये समझाने में सफल रही कि ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रहीं हैं।लोकसभा चुनाव में भाजपा की सफलता के पीछे यही सारे मुद्दे हैं और आगे भी रहेंगे।ममता बनर्जी को हिंदू विरोधी छवि जो भाजपा ने आम जनमानस में बना दी है,को बदलना होगा नहीं तो विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल करना बेहद कठिन हो सकता है।

आदिवासियों को लुभाने के लिए जंगमहल क्षेत्र में ममता सरकार ने बहुत से योजनाओं पर काम करना शुरू किया है और उस क्षेत्र के विकास के लिए खजाना खोल दिया गया है।छत्रधर महतों के साथ आने से तृणमूल कांग्रेस को लाभ तो होगा इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।

लोकसभा चुनाव के समय ममता बनर्जी ने खुलकर ये आरोप लगाए थे कि भाजपा के वोटर वो हैं जो दूसरे प्रदेशों से आकर यहाँ बसे हैं।ये सही भी है कि बिहार, यूपी के कई लाख लोग बंगाल में आकर बसे हैं और उन्होंने भाजपा का खुला समर्थन किया है।ममता बनर्जी को इस अच्छी खासी आबादी को मनाना होगा नहीं तो लोकसभा चुनाव के परिणाम ममता के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।संतुलित आक्रमकता सही है ज्यादा सभी को नाराज कर देती है ये ममता को समझना होगा। 

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