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क्या यही प्यार है ? - 'लव आज कल' (*** स्टार )

Bhola Tiwari Feb 14, 2020, 11:36 AM IST मनोरंजन
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गायत्री साहू

मुंबई  : इंसान को जब भी करियर और प्यार के बीच चुनाव करना पड़ता है तो यह चुनाव दिल को हिला डालने वाला होता है। यदि वह प्यार को चुनता है तब भी सालों बाद उसकी जिंदगी तकलीफदेह हो जाती है और यदि करियर को चुनता है तब भी सच्चे प्यार की कसक उसे चैन नहीं देती अर्थात व्यक्ति अपनी जिंदगी में संतुष्ट नहीं हो पाता, उसका चंचल मन सदा उसे व्यथित करता है। जीवन में समझौता कर यदि आगे बढ़ भी जायें तो टिस उसका पीछा नहीं छोड़ती। जीवन में सब को सब मिले ये जरूरी नहीं पर जो मिले उसमें ही खुश रहना ही जिंदगी है रोने वाले सब कुछ पा कर भी आँसू बहाते रह जाते हैं।

निर्देशक इम्तियाज अली की फ़िल्म 'लव आज कल' की कहानी वर्तमान समय के युवा वर्ग और आज से बीस साल पहले के युवाओं की प्यार के प्रति सोच को उजागर करती है।

जुई चौहान (सारा अली खान) एक आज़ाद खयालों की लड़की है जिसका पूरा फोकस अपने करियर पर है। वह रिलेशनशिप रखना चाहती है पर कमिटमेंट से डरती है, उसकी इस सोच के पीछे उसकी माँ, जो तलाकशुदा गृहणी है उसकी जिंदगी का असर है। माँ नहीं चाहती कि उसकी बेटी उसी की तरह अपना करियर छोड़ घर गृहस्थी में रमे और दूसरों पर पैसों की मोहताज रहे। जुई की जिंदगी में वीर (कार्तिक आर्यन) आता है लेकिन वह उसके सच्चे प्यार को ध्यान नहीं देती। वह बस टाइमपास करना चाहती है और किसी रिश्ते में बंधना नहीं चाहती। उन दोनों को देख कैफे मालिक रघुविन्दर उर्फ राज (रणदीप हुड्डा) उन्हें आपस में मिलाने की कोशिश करता है। वह जुई को अपनी प्रेमिका लीना के बारे में बताता है कि वह किस तरह उसका दीवाना था। उसकी प्रेम कहानी सुन जुई को भी वीर के सच्चे प्यार का अहसास होता है वह अपना करियर छोड़ उसके पास जाती है। जिंदगी बहुत खुशनुमा हो जाती है लेकिन एक दिन जुई को रघु का लीना के प्रति प्यार की सच्चाई पता चलती है तो उसे बहुत दुख होता है। तभी वीर भी उसे अपने परिवार से मिलाकर सदा के लिए प्रेम बन्धन में बंधना चाहता है। अपनी माँ की जिंदगी, अपना करियर और रघु का प्रेम में धोखे की कहानी से आहत जुई कुछ समझ नहीं पाती और अपने मन के अंतर्द्वंद्व में सिमट जाती है और वीर से दूरी बनाकर पुनः अपने करियर की तरफ मुख करती है। कामयाबी की ऊंचाइयों को छूने के बाद भी उसे सुकून नहीं मिलता और वह रघु के पास जाती है। रघु उसे अपने अतीत की गलतियों से अवगत कराता है और जुई फिर नए उधेड़बुन में उलझ जाती है। क्या जुई प्यार या करियर में एक का चुनाव कर पाती है? क्या जुई का प्यार सच्चा था या महज एक लगाव? क्या रघु के जीवन की सच्चाई जुई में बदलाव लाती है? प्यार की इन उधेड़बुन को जानने के लिए यह फ़िल्म देखना काफी रोमांचक व दिलचस्प रहेगा।

अभिनय के मामले में देखा जाए तो सारा अली खान फ़िल्म की हीरो से कम नहीं है। सारा का अभिनय बेहतरीन है और कार्तिक आर्यन की मासूमियत का लड़कियां फिदा हो सकते हैं। उनका अभिनय ध्यानाकर्षित करती है। रणदीप हुड्डा की अदाकारी उम्दा है। आरुषि शर्मा ने अपना किरदार बखूबी निभाया है अस्सी के दशक के लड़की की छवि में वो खरी उतरी है। फ़िल्म का सबसे सकारात्मक पहलू इन कलाकारों का अभिनय है।

निर्माता और निर्देशक इम्तियाज अली ने अपनी पिछली फिल्मों की ही तरह प्रेम के रूप को दिखाया है। उनका टारगेट हमेशा युवा दर्शकों पर रहता है। आज के संस्कार विहीन पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण करने वाले युवा जीवन को बखूबी पेश किया है। फ़िल्म की कहानी का प्रथम हिस्सा मजेदार है लेकिन दूसरा हिस्सा धीमा नज़र आता है। फ़िल्म की कथा वर्तमान और अतीत की प्रेम को व्यक्त करते हुए दर्शकों को संशय में डाल देती है।

फ़िल्म के गाने कर्णप्रिय है और युवावर्ग में अपनी जगह बना चुका है। फ़िल्म की कहानी, फिल्मांकन और दृश्य युवाओं को मंत्रमुग्ध कर सकता है।

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