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कभी खुशी कभी गम का मिला जुला रुप है बायपोलर डिसआर्डर

Bhola Tiwari Feb 14, 2020, 8:20 AM IST राष्ट्रीय
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एसडी ओझा

नई दिल्ली  : बायपोलर डिसआर्डर एक मानसिक वीमारी है । इस वीमारी में पीड़ित कभी हफ्तों खुश रहता है और कभी हफ्तों उदास रहता है । जब अवसाद गहरा हो या अतिरंजित खुशी हो तो इस वीमारी को बायपोलर डिसआर्डर कहा जाता है । इसके होने के बहुत से कारण होते हैं- 

1) यह अनुवांशिक भी होता है । अगर माता पिता में से किसी को भी यह वीमारी हो तो संतान में भी यह वीमारी आ सकती है ।

2) मस्तिष्क में होने वाले भौतिक बदलाव की वजह से भी यह होता है ।

3) नशा करने वालों को भी यह वीमारी हो सकती है ।

4) नकारात्मकता भी इसके लिए उत्तरदायी है ।

5) इसके अतिरिक्त कुछ अज्ञात कारण भी होते हैं ।

बायपोलर डिसआर्डर सौ में से किसी एक को होती है । इस वीमारी में मूड स्विंग करता रहता है । कभी खुशी होती है तो रोगी ऊर्जा से लवरेज हो जाता है । कभी गम का आगमन होता है तो आदमी गहरे अवसाद में चला जाता है । मूड में परिवर्तन साल में कुछ बार या हफ्ते में कई बार हो सकता है । ऊर्जा से लवरेज होने पर रोगी रचनात्मक कार्यों में लग जाता है, वहीं दुःखी होने पर कुछ लोगों को मतिभ्रम भी हो जाता है ।

बायपोलर डिसआर्डर में मिनिया या हाइपर मिनिया भी हो सकता है । रोगी हिंसक हो जाता है । उसे अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ जाती है । ऐसी हालत में बहुत गम्भीर स्थिति बन जाती है । रोगी असाधारण रुप से उत्साहित, उत्तेजित या चिड़चिड़ा हो सकता है । ऐसे में निम्न लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं -

1) नींद में कमी हो सकती है ।

2) रोगी बेवजह बातें करने लग सकता है ।

3) वह अत्यधिक व्याकुलता महसूस करने लगता है ।

4) वह सोचने में अपना समय गुजारने लगता है ।

5) उसे निर्णय लेने में परेशानी होने लगती है ।

बायपोलर डिसआर्डर से पीड़ित व्यक्ति अपने को रोगी नहीं मानता । वह अपने को सामान्य मानता है । उसे पता नहीं होता कि उसकी वजह से घर के लोग परेशान हो रहे हैं । इसलिए वह मानसिक चिकित्सक के पास जाने से कतराता है ।

इस वीमारी में अपने आप सुधार नहीं होता । इसमें दवाइयां लेनी पड़तीं हैं । मनोवैज्ञानिक काउसिंलिंग करानी पड़ती है । बावजूद इसके यह पूरी तरह से ठीक नहीं होता । केवल लक्षणों को नियंत्रण करने में सहूलियत रहती है । ताउम्र दवाई खानी पड़ती है । 

बायपोलर डिसआर्डर और अवसाद का गहरा सम्बंध है । जब अवसाद हद से ज्यादा बढ़ जाय तो रोगी में आत्म हत्या की प्रवृति आ जाती है । वह हिंसक भी हो सकता है । ऐसे में कुछ परहेज बताए गये हैं, जिससे रोगी अपना बचाव कर सकता है -

1) दवाई हमेशा खानी पड़ेगी ।

2) खुद में सकरात्मक सोच डेवलपमेंट करनी होगी ।

3) नशीली चीजों से दूरी बनाकर रखनी होगी ।

4) नियमित व्यायाम, योग व ध्यान करना होगा ।

5) किसी भी तरह की नकारात्मकता से बचें ।

बायपोलर डिसआर्डर के रोगी को प्यार से हैण्डल करें । ऐसे रोगी मार पीट की नहीं बल्कि स्नेह की भाषा समझते हैं ।

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