ब्रेकिंग न्यूज़
अनब्याही माताएं : नरमुंड दरवाजे पर टांगकर जश्न मनाया करते थे....         ताकि भाईचार हमेशा बनी रहे!          अब शत्रुघ्न सिन्हा पाकिस्तान के राष्ट्रपति से मिलकर कश्मीर मुद्दे पर सुर में सुर मिलाया         सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों को मार गिराया, सर्च ऑपरेशन जारी         खून बेच कर हेरोइन का धुआं उड़ाते हैं गढ़वा के युवा         कब होगी जनादेश से जड़ों की तलाश          'नसबंदी का टारगेट', विवाद के बाद कमलनाथ सरकार ने वापस लिया सर्कुलर         पीढ़ियॉं तो पूछेंगी ही कि गाजी का अर्थ क्या होता है?         मातृ सदन की गंगा !         ओवैसी की सभा में महिला ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए         एक बार फिर चर्चा में हैं सामाजिक कार्यकर्ता "तीस्ता सीतलवाड़",शाहीनबाग में उन्हें औरतों को सिखाते हुए देखा गया         कनपुरिया गंगा, कनपुरिया गुटखा, डबल हाथरस का मिष्ठान और हरजाई माशूका सी साबरमती एक्सप्रेस..         शाहीन बाग में वार्ता विफल : जिस दिन नागरिकता कानून हटाने का एलान होगा, हम उस दिन रास्ता खाली कर देंगे         फ्रांस में विदेशी इमामों और मुस्लिम टीचर्स पर प्रतिबंध         'राष्ट्रवाद' शब्द में हिटलर की झलक, भारत कर सकता है दुनिया की अगुवाई : मोहन भागवत         आतंकवाद के खिलाफ चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ा         दिमाग में गोबर, देह पर गेरुआ!          त्राल में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया         CAA-NRC-NPR के समर्थन में रिटायर्ड जज और ब्यूरोक्रेट्स ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र         अनब्याही माँ : चपला के बहाने इतिहास को देखा          भारतीय पत्रकारिता को फफूंदी बनाने वाली पत्रकार यूनियनें..         ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था         ..विधायक बंधू तिर्की और प्रदीप यादव आज विधिवत कांग्रेस के हुए         मरता क्या नहीं करता !          14 साल बाद बाबूलाल मरांडी की घर वापसी, जोरदार स्वागत         जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी भाजपा में हुए शामिल, अमित शाह ने माला पहनाकर स्वागत किया         भारत में महिला...भारत की जेलों में महिला....          अनब्याही माताएं : प्राण उसके साथ हर पल है,यादों में, ख्वाबों में         कराची में हिंदू लड़की को इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग         बेतला राष्ट्रीय उद्यान में गर्भवती मादा बाघ की मौत !अफसरों में हड़कंप         बिहार की राजनीति में हलचल : शरद यादव की सक्रियता से लालू बेचैन          सीएम गहलोत की इच्छा, प्रियंका की हो राज्यसभा में एंट्री !         अनब्याही माताएं : गीता बिहार नहीं जायेगी          तेंतीस करोड़ देवी-देवताओं के देश में यही होना है...        

कौन कम है यहाँ, सब के सब आदिवासियों से अपना मतलब निकाल रहे हैं...

Bhola Tiwari Feb 11, 2020, 7:35 AM IST टॉप न्यूज़
img


अमरेंद्र किशोर

नई दिल्ली  : राष्ट्रीय स्तर पर इन मिशनरियें का विरोध हिंदूवादी ताकतें करती हैं उनकी दलील है कि इन मिशनरियों ने वनपुत्रों की सामाजिक सांस्कृतिक निरंतरता और उनकी गति की जीवंतता को बेहद नुकसान पहुंचाया है। उन्हें ईसाईयत के रंगों से नहलाकर उनकी प्रतिरोध्-स्वायत्तता और सामुदायिकता के नाम पर हिंसक बनाया है। लिहाजा, आदिवासियों के हिंसाचार ने पूरी राज-व्यवस्था का नुकसान किया है। सच भी है कि विकास ने आदिवासियों से सब कुछ छीना है। उनसे उनका आदिवासीपन भी छीना। अन्यथा इन वनवासियों के पूर्वजों ने धूल की तरह उड़ती जा रही जमीन, परंपरा, संस्कृति एवं विरासत की रक्षा के लिए बलिदान होने की कला एवं चेतना दी। 

लोकमानस की धरणा है कि इन मिशनरियों ने आदिवासियों को देशज जनतंत्रा की अवधरणा देकर जल-जंगल-जमीन के लिए अड़ना और लड़ना सिखाया । इससे आगे सांस्कृतिक चेतना के नाम पर उनमें समानता, सामुदायिकता एवं संपत्ति पर सामूहिक एवं स्त्री -पुरुष समानाध्किार के लिए सजग होने की शैली दी। इसलिए आदिवासी कोयलकारो सिंचाई परियोजना का विरोध् करते हैं। प्रचार है कि यह विरोध् स्वतः स्फूर्त है। मगर सवाल यह भी है कि इन परियोजना के जो डूब क्षेत्र हैं, उन इलाकों के गांवों में कितने मूल वाशिंदे आज आदि धर्मानुरागी हैं। सच देखिये, उन गांवों में प्रभु यीशु के यशोगान गूंजते हैं। कोयल-कारो बांध् बनने से करीब एक सौ गांव डूब जायेंगे। साथ में भयंकर पलायन होगा। उनकी संघनित आबादी विस्थापन की मार में बिखर जायेगी। इस बिखराव में आस्थाएं टूटेंगी। सवाल और शंका लाजिमी है जो वनवासी अपने धर्म के नहीं हुए, अपनी संस्कृति से रूठ गये वे बिखरकर कब तक यीशुवादी रह पायेंगे। यही सवाल मिशनरियों को बेचैन कर देता है।

यह मान्य है कि प्रत्येक पीढ़ी अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से प्राप्त भौतिक संपदा, पूंजी तथा उत्पादन शत्तिफयों को दोहन करती है। इस तरह एक ओर पूरी तरह बदली परिस्थितियों में परंपरागत क्रियाशीलता जारी रहती है तो दूसरी ओर पूर्णतः परिवर्तित क्रियाशीलता पुरानी परिस्थितियों को संशोध्ति कर देती है। मगर वर्तमान का परिवर्तन कहीं ज्यादा अराजक है। परिस्थितियां अपेक्षाकृत भयावह है। देश भर में मूल वाशिंदों को ईसाइयत में रंगकर उनके धर्म की मूल भावना को सलीब पर लटकाने की साजिश चल रही है। मगर जमीन-जंगल एवं जजबात पर समाजत्व की प्रेरणा बार-बार मूल वाशिंदों की अंर्तआत्मा को झकझोरती है। उनके देशज बोध् से उभरे कई सवाल उन चेहरों को घेर लेते हैं, जो मानवीय होने का दम भरते हैं। अपूर्व मानवीयता के बुर्ज से उभरे सवाल कुनैन-कंबल एवं बाइबल बांटने वाले उन ध्र्माचारियों से ही नहीं है। जिनकी हरकतों पर पादरी से नृविज्ञानी बने बेरियर एलविन ने घोर आपत्ति दर्ज की थी। बल्कि आदिवासियों के पैर धोते उन हिंदूवादियों से भी है, जो घर वापसी की गुहार लगाते हैं। 

मानवाधिकार के संदर्भ में उन मूल वाशिंदों को लाल आतंक के हरकारों का सहयोगी बनाना उतना ही बड़ा गुनाह है कि जितना उनहें संगठित कर झारऽंड के गुमला जिले में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसाचारी बनाना। उड़ीसा में दलित आदिवासी टकराव से लेकर गुजरात में विश्व हिंदू परिषद की ईसाई विरोधी हिंसा और उससे भी कहीं ज्यादा आगे बढ़कर आयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने के क्रम में विहिप के प्रदर्शन में मध्य भारत एवं उड़ीसा, झारखंड और आँध्रप्रदेश के आदिवासियों को लामबंद किया जाना। 

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links