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नेपाल से लापता बच्चा रामगढ़ से मिला, नेपाल भेजा गया 10 वर्षीय बालक

Bhola Tiwari Feb 10, 2020, 7:55 PM IST टॉप न्यूज़
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जितेन्द्र कुमार

रामगढ़ : नेपाल देश से पिछले 2 वर्षों से लापता एक बच्चा रामगढ़ से मिला है। रामगढ़ डीसी संदीप सिंह ने सोमवार को इस 10 वर्षीय बच्चे को नेपाल एंबेसी से आए अधिकारियों को सौंपा है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह बताया कि नेपाल जिले से पिछले 2 वर्षों से लापता 10 वर्षीय रामू पून मगर रामगढ़ में वात्सल्यधाम में रह रहा था। डीसी ने बताया कि पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में उन्हें यह पता चला कि रामू पून मगर एक नेपाली बच्चा है। उन्होंने उसी वक्त राज्य के गृह मंत्रालय की मदद से दिल्ली में नेपाल एंबेसी को इस बात की सूचना दी। नेपाली एंबेसी की मदद से नेपाल में जब यह सूचना भेजी गई, तो पता चला कि रामू पून मगर नेपाल देश के प्रदेश नंबर 5 के दांग जिले के घोराही का रहने वाला है। रामू के पिता मित्र लाल पून और माता शोभा क्षेत्री है। वाह 2 साल पहले अचानक लापता हो गया था।


बिहार से बस पकड़कर रांची आया था बच्चा

रामगढ़ डीसी ने बताया कि रामू पूनम अगर पिछले वर्ष चाइल्ड वेलफेयर कमिटी को लावारिस हालत में रांची में मिला था। 29 अप्रैल 2019 को सीडब्ल्यूसी के द्वारा इस बच्चे की देखभाल के लिए वात्सल्यधाम रामगढ़ को सुपुर्द किया गया। तब से यह बच्चा रामगढ़ वात्सल्यधाम में ही रह रहा था। इस की शिक्षा दीक्षा के लिए शहर के छावनी परिषद स्कूल में नामांकन भी कराया गया था। चाइल्ड वेलफेयर कमिटी ने जब उसकी छानबीन की थी तो उस बच्चे ने बताया था कि वह मानव तस्करी करने वाले लोगों के चंगुल में फंस गया था। वहीं से मुक्त होने के लिए उसने भागने का प्रयास किया। इसी दौरान उसने जो बस पकड़ी वह उसे बिहार ले आई। बिहार से वह ट्रेन पकड़कर रांची आ गया था। रांची रेलवे स्टेशन पर मौजूद चाइल्ड हेल्पलाइन ने ही उसे सीडब्ल्यूसी को सौंपा था।

मानव तस्करी गिरोह की वजह से अपने परिवार से 2 साल दूर रहा रामू

रामू जब 8 साल का था तब वह मानव तस्करी गिरोह के चंगुल में फस गया था। उन्हीं लोगों की वजह से वह अपने परिवार से 2 साल दूर रहा। अक्सर भारत और नेपाल की सीमा पर मानव तस्करी की सूचनाएं आती रहती हैं। यहां लोग नेपाली बच्चों को उठाकर भारत में ले आते हैं। ऐसे कई मामले नेपाल और भारत के विभिन्न थानों में दर्ज भी हैं। ऐसे गिरोह से बचने के लिए बच्चे कई हथकंडे अपनाते हैं। कई बार वे ऐसी गाड़ी पकड़ लेते हैं, जो उन्हें दूसरे देश में पहुंचा देती है। उन बच्चों को ढूंढ पाना भी काफी मुश्किल हो पाता है। रामगढ़ डीसी संदीप सिंह ने कहा कि कहीं भी अगर किसी को दूसरे देश का कोई बच्चा नजर आता है, तो वह तत्काल इस बात की सूचना संबंधित थाने या जिला प्रशासन के अधिकारी को दें। आम जनता की सजगता की वजह से वह बच्चा अपने परिवार के पास पहुंच सकता है। डीसी ने कहा कि ऐसा कई बार हुआ है जब कोई बच्चा वात्सल्यधाम तक पहुंचता है, तो उसके परिवार से मिलाने के लिए प्रशासन भी काफी प्रयास करता है। भारत के दूसरे प्रदेशों के बच्चों को यहां से उनके परिवार तक पहुंचाने की पहल कई बार हुई है। कई बार आधार कार्ड भी जिला प्रशासन के इस प्रयास में अहम कड़ी साबित हुआ है। मामला जब विदेशी बच्चों का हो तो वहां हमारी संवेदनशीलता और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में मानव तस्कर गिरोह काफी सक्रिय रहते हैं। उन्हें यह पता होता है कि एक बार अगर बॉर्डर पार कर लिया गया, तो फिर उस बच्चे को वापस ले जाना लगभग नामुमकिन है। रामू पुन मगर उस 1% बच्चों में शामिल है, जो दूसरे देश से लौटकर अपने परिवार से मिलने जा रहा है।

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