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एक ऐसा भी देश जिसने हाथियों के मारने के लाइसेंस बेच दिए

Bhola Tiwari Feb 10, 2020, 7:06 AM IST टॉप न्यूज़
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कबीर संजय

नई दिल्ली  : आपने बोत्सवाना का नाम सुना है। अफ्रीका में है ये देश। इसने अपने सत्तर हाथियों को ट्राफी हंटिंग के लिए मारने का लाइसेंस अभी-अभी बेच दिया है। लाइसेंस खरीदने वाले अब हाथियों के झुंड में से अपने पसंदीदा हाथी को मारकर उसके दांत को अपने ड्राइंगरूम में सजाने के लिए रख सकेंगे। 

हाथीदांत की सबसे ज्यादा जरूरत हाथियों को है। उससे ज्यादा और कोई हाथीदांत के महत्व को नहीं समझ सकता। लेकिन, हाथीदांत के लिए सदियों से ही हाथियों को मारा जाता रहा है। हाथियों की आबादी कम होने और कई जगहों पर समाप्त प्राय स्थिति में पहुंच जाने के पीछे इसे एक बड़ा कारण माना जाता है। पर्यावास का समाप्त होना तो बड़ा कारण है ही। 

अफ्रीकी हाथी आकार में सबसे बड़े होते हैं। हमारे यहां के हाथियों से बिलकुल अलग इन्हें पहचाना जा सकता है। हमारे यहां के हाथियों के सिर में जहां एक मांग सी निकली रहती है, वहीं अफ्रीकी हाथी का माथा ऊंचा और चपटा होता है। इसके दांतों का आकार भी बड़ा होता है। 

बोत्सवाना में हाथियों की बड़ी आबादी रहती है। यहां के सवाना और जंगलों में एक लाख 30 हजार हाथी घूमते हैं। सरकार ने इनके शिकार पर प्रतिबंध लगाया हुआ था। लेकिन, यह प्रतिबंध पिछले साल हटा लिया गया। इसके साथ ही अब ट्राफी हंटिंग के लिए सत्तर हाथियों को मारने का लाइसेंस भी जारी कर दिया गया। बहाना तो यह है कि इन्हें मारने से मिलने वाले पैसे को वन्यजीवों के संरक्षण में ही खर्च किया जाएगा। लेकिन, यह तर्क कितना खोखला है कि वन्यपशुओं को मारने से मिलने वाले पैसे में वन्यपशुओं के लिए जीवन खरीदा जा रहा है। 

हाथी एक खास किस्म के सामाजिक प्राणी होते हैं। बच्चे अपने बड़ों से सीखते हैं। ट्राफी हंटिंग में जाहिर है सबसे अच्छे और बड़े आकार के हाथियों को मारने की कोशिश की जाएगी। ऐसे में बच्चे अपने बड़ों के अनुभवों से सीखने से वंचित हो जाएंगे। ऐसे में हाथियों की अगली पीढ़ी को कितना ज्यादा नुकसान होगा, इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। 

पहले भी अलग-अलग देशों में इस तरह की ट्राफी हंटिंग की जाती रही है। हाल ही में पाकिस्तान में मरखोर और विशेष प्रजाति के बस्टर्ड को मारने के लिए भी ऐसी ही नीलामी का आयोजन किया गया था। इस प्रकार की नीलामी में सबसे ज्यादा कीमत चुकाने वाला व्यक्ति उक्त जीव की हत्या का अधिकार पा जाता है। 

मैं सोचता हूं कि किसी वन्यजीव की मौत का अधिकार बेचने और खरीदने वालों की मानसिकता क्या होती होगी। 

(बोत्सवाना के हाथियों की सांकेतिक तस्वीर इंटरनेट से साभार)

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