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तेरा तमाशा, शुभान अल्लाह..

Bhola Tiwari Jan 25, 2020, 9:52 AM IST टॉप न्यूज़
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रमेश कुमार रिपु

रायपुर : मैम,अगर मुस्लिम ट्यूटर हो तो चलेगा क्या? उसने यही पूछा था। बात कुछ भी नहीं थी। उसका सवाल अपनी जगह ठीक ही था। कुछ लोग मुस्लिम ट्यूटर पसंद नहीं करते। उसने पसंद और नापंसद, सामने वाले की जानना चाहा। ताकि सब ठीक रहे। उसके सवाल का, धर्म से कोई संबंध नहीं है। जाति से भी कोई संबंध नहीं है। मन की एक शंका थी। पूछ लिया। कोई जुर्म तो नहीं किया। कल को कुछ, ऊंच नीच हो जाये,तो विवाद की स्थिति न हो। खबर न बने। सोचने वाली बात है कि कुछ हो गया तो, उनकी तारीफ करने वाली महिलायें और पुरूष उनकी फेस बुक में कहेंगे,अरे,आपको जब पता है कि मुसलमान जिस आजाद देश में रह रहे हैं, आजादी के लिए धरना दे रहे हैं। उन्हें किससे चाहिए आजादी? जाहिर सी बात है कि वो भारत को अपना मुल्क नहीं मानते। प्यार नहीं करते। हिन्दुस्तानियों को पसंद नहीं करते। हत्या,रेप,बम ब्लास्ट,मुंबई ब्लास्ट, संसद भवन,पुलवामा कांड न जाने कितने कांड। जान कर भी। तुम्हें दिल्ली में और कोई ट्यूटर नहीं मिला?

हर मुसलमान आतंकी नहीं होता,लेकिन मुस्लिम आतंकवादी है। हर रेपिस्ट मुस्लिम नहीं होता,लेकिन ज्यादातर रेप की घटनाओं में एक मुस्लिम जरूर होता है। छपाक फिल्म आई। उसमें अपराधी मुस्लिम था, लेकिन खलनायक के बतौर एक हिन्दू की चर्चा हुई, फ़िल्म रिलीज होने से पहले। क्यों? सच कहने से डर लगता है। सच दिखाने में डर लगता है। मुस्लिम से डर लगता है। ऐसा क्यों नहीं कहते।

हां बात हो रही थी कि मोहतरमा को अपने बच्चे के लिए एक ट्यूटर की जरूरत है। सामने वाले ने पूछ लिया मुस्लिम ट्यूटर चलेगा क्या? उनकी नजर में, उसने ऐसा पूछ कर अपराध कर लिया। उनका सारा प्यार, मुस्लिम कौम पर उतर आया। और गुस्सा, पूछने वाले पर। हो भी क्यों नहीं,कुछ दिनों पहले वो भी आजादी मांगने वालों के साथ थी। ऐसा बता रही थीं कि, सीएए और एनआरसी से उनकी नागरिकता खत्म हो जायेगी? सुप्रीम कोर्ट ने भी सीएए पर रोक से इंकार कर दिया है। सवाल यह है कि कौन मुसलमान,सच्चा मुसलमान है। वो जो आजाद मुल्क में रह कर आजादी मांग रहा है? जिसे यह नहीं पता है कि आजादी का मतलब क्या है। आजादी की मीठास क्या है? या फिर ऐसे लोग, जो कहते हैं कि कोई तुम्हारा नाम पूछे, तो रंगा बिल्ला बताना?

मैम, अगर मुस्लिम ट्यूटर हो तो चलेगा क्या? सवाल कुछ भी नहीं। लेकिन इसे सियासी रंग देकर बवाल खड़ा करने की सोच वालों ने, अपने गिरेबांन में झांक कर देखने की कोशिश नहीं की कि, इस एक वाक्य को तूल देकर वो जातिय युद्ध को हवा दे रही हैं। एक समाज को भड़का रही हैं। उस पर, अपनी इस पोस्ट पर कहती हैं,यह राजनीतिक पोस्ट नहीं है? एक सवाल पर, अपने गुस्से की नुमाइश एक पेज की, कर डालीं। और उम्मीद करती हैं कि कोई राजनीतिक टिपणी न करे। कमाल की राजनीति है। कमाल का मुस्लिम प्रेम है।

देश में कुछ नासमझ लोग गृह युद्ध की साजिश कर रहे हैं। खास कर पढ़े लिखे लोग। ऐसे में इनकी पोस्ट रंगा बिल्ला वाले की भाषा से कम नहीं है। संसद के दोनों सदनों में बिल पास होने के बाद, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से वो कानून हो जाता है। डर है कि कहीं संवैधानिक न हो जाये। और ऐसे में, आपको संसद से आजादी चाहिए? संविधान से आजादी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट से आजादी चाहिए? देश में आजादी चाहिए या फिर देश से आजादी चाहिए? मुस्लिम धर्म की कागज पर ट्यूटर की आड़ पर एक तमाशे की नुमाइश कर दीं। तमाशा कोई भी हो,देखने वालों को बड़ा अच्छा लगता है। लेकिन हर तमाशा, शुभान अल्लाह नहीं होता।

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