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आर्यावर्त में बांग्लादेशियों की पहचान...

Bhola Tiwari Jan 25, 2020, 9:10 AM IST टॉप न्यूज़
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राजीव मित्तल

नई दिल्ली  : कपड़ों से अतांकियों की और पोहे से बांग्लादेशियों की पहचान पर जो बवाल मचा हुआ है वो जहिलता का परिचायक है..इसका मतलब हमें अपनी पुरातन संस्कृति का इत्तो भी ज्ञान नहीं है!! शर्मनाक..

रावण के दस सिर, राक्षसों, दैत्यों, दानवों के सिर पर झौआ जैसे बाल, आगे को निकला पेट, होठों के दोनो किनारों से निकले दांत, हाथ पैरों के नाखून दो दो गज लंबे, छप्पन इंच का मुखड़ा, रोहू मछली जितनी बड़ी बड़ी लाल लाल आंखें, मृत पशु की डिजाइन की हुई पौशाक, भोजन में बिना नमक मसाले का अस्सी किलो वाले जानवर का कच्चा मांस, पीने को बिना तड़के का लहू.. गले में दस पांच सिरों की माला..इन्हीं सब विशेषताओं के चलते आर्य सहोदरों ने सुपर्णखा को ठुकराया और और उसके नाक कान काटे..हिडिंबा को भी भीम ने तभी पत्नी बनाया जब वो आर्यन चोले में प्रकट भई, लेकिन अपनाया तब भी नहीं..उसकी सारी ज़िन्दगी मायके में कटी..यहां तक कि औलाद घटोत्कच को भी मायके में ही जना..बल्कि औलाद की औलाद बर्बरीक ने भी कभी ददिहाल नहीं जाना..

वहीं आर्य या आर्यों के यहां अवतार के रूप में जन्मे देव चाहे महलों में रहे हों या वनों में, हमेशा मेकअप किट थामे रहे..वर्षों के वनवास में दाढ़ी मूछ के नाम पर एक तिनका नहीं उगा..और वन प्रवास में भोजन के नाम पर अमरूद केला जैसे फलों का ही उपभोग किया..श्रीकृष्ण ने काफी वक्त वनों में बिताया लेकिन उन्होंने गाय के दूध से बने गुलगुलों के अलावा कभी कुछ नहीं खाया..भगवान विष्णु तो हमेशा क्षीर सागर में रहे लेकिन माता लक्ष्मी हमेशा उनके लिए पूरन पूरी जैसा खाद्य पदार्थ बनातीं..और तो और पांडवों तक ने बारह वर्ष के वनवास में सिर्फ खिचड़ी खाई..

यह ऐतिहासिक तथ्य है कि आर्यावर्त के आर्यों को बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मध्य एशिया, अफ्रीका, दक्षिणी भारत, पूर्वी भारत, उत्तर पूर्व के राज्य कभी नहीं भाए..आर्यावर्त का लगाव हमेशा यूरोपियों से रहा चाहे उन्होंने जितनी लूटपाट की हो, चाहे जितना खून निचोड़ा हो..इसी वजह से आज भी आर्य श्रेष्ठ हिटलर आराध्य है..

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