ब्रेकिंग न्यूज़
युद्ध की तैयारी में चीन !         BIG NEWS : रांची के रिम्स में जब पोस्टमार्टम से पहले जिंदा हुआ मुर्दा         अमेरिका ने चीन की 33 कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट, ड्रैगन भी कर सकता है पलटवार         BIG NEWS : भारत अड़ंगा ना डालें, गलवान घाटी चीन का इलाका         BIG NEWS : भारत की आक्रामक नीति से घबराया बाजवा बोल पड़ा "कश्मीर मसले पर पाकिस्तान फेल"         BIG NEWS : डोकलाम के बाद भारत और चीन की सेनाओं के बीच हो सकती है सबसे बड़ी सैन्य तनातनी         BIG NEWS : झारखंड के 23वें जिला खूंटी में पहुंचा कोरोना, सोमवार को राज्य में 28 नए मामले         BIG NEWS : कश्मीर के नाम पर पाकिस्तानी ने इंग्लैंड के गुरुद्वारा में किया हमला         BIG NEWS : बंद पड़े अभिजीत पावर प्लांट में किसने लगाई आग! लाखों का नुकसान          BIG NEWS : इंडिया और इज़राइल मिलकर खोजेंगे कोविड-19 का इलाज         CBSE : अपने स्कूल में ही परीक्षा देंगे छात्र, अब देशभर में 15000 केंद्रों पर होगी परीक्षा         BIG NEWS : कुलगाम एनकाउंटर में कमांडर आदिल वानी समेत दो आतंकी ढेर         BIG NEWS : लद्दाख बॉर्डर पर भारत ने तंबू गाड़ा, चीन से भिड़ने को तैयार         ममता बनर्जी को इतना गुस्सा क्यों आता है, कहा आप "मेरा सिर काट लीजिए"         GOOD NEWS ! रांची से घरेलू उड़ानें आज से हुईं शुरू, हवाई यात्रा करने से पहले जान लें नए नियम         .... उनके जड़ों की दुनिया अब भी वही हैं         आतंकियों को बचाने के लिए सुरक्षाबलों पर पत्थरबाज़ी, जवाबी कार्रवाई में कई घायल         BIG NEWS : पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर तौफीक उमर को कोरोना, अब पाकिस्तान में 54 हजार के पार         महाराष्ट्र में खुल सकते है 15 जून से स्कूल , शिक्षा मंत्री ने दिए संकेत         BIG NEWS : सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के टॉप आतंकी सहयोगी वसीम गनी समेत 4 आतंकी को किया गिरफ्तार         आतंकी साजिश नाकाम : सुरक्षाबलों ने पुलवामा में आईईडी बम बरामद         BREAKING: नहीं रहे कांग्रेस के विधायक राजेंद्र सिंह         पानी रे पानी : मंत्री जी, ये आप की राजधानी रांची है..।         BIG NEWS : कल दो महीने बाद नौ फ्लाइट आएंगी रांची, एयरपोर्ट पर हर यात्री का होगा टेस्ट         BIG NEWS : भाजपा के ताइवान प्रेम से चिढ़ा ड्रैगन, चीन ने दर्ज कराई आपत्ति         सिर्फ विरोध से विकास का रास्ता नहीं बनता....         सीमा पर चीन ने बढ़ाई सैन्य ताकत, मशीनें सहित 100 टेंट लगाए, भारतीय सेना ने भी सैनिक बढ़ाए         BIG NEWS : केजरीवाल सरकार ने सिक्किम को बताया अलग राष्ट्र         महिला पर महिलाओं द्वारा हिंसा.... कश्मकश में प्रशासन !         BIG NEWS : वैष्णों देवी धाम में रोज़ाना 500 मुस्लिमों की सहरी-इफ्तारी की व्यवस्था         विस्तारवादी चीन हांगकांग पर फिर से शिकंजा कसने की तैयारी में, विरोध-प्रर्दशन शुरू         BIG NEWS : स्पेशल ट्रेन की चेन पुलिंग कर 17 मजदूर रास्ते में ही उतरे         भक्ति का मोदी काल ---         अम्फान कहर के कई चेहरे, एरियल व्यू देख पीएम मोदी..!         महिला को अर्द्धनग्न कर घुमाया गया !         टिड्डा सारी हरियाली चट कर जाएगा...         'बनिया सामाजिक तस्कर, उस पर वरदहस्त ब्राह्मणों का'         इतिहास जो हमें पढ़ाया नहीं गया...        

बड़ी बेशर्मी से शर्मसार होने का रोग लगा देश को...

Bhola Tiwari Jan 15, 2020, 1:03 PM IST टॉप न्यूज़
img


राजीव मित्तल

नई दिल्ली : इस देश में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम जैसे पच्चीसों कांड रोज होते रहें, लेकिन चैनल हो या अख़बार, फुटेज - आप आम चूसते हैं या काट कर खाते हैं - पूछते अक्षय कुमार को मिलेगी..घनघोर संवेदनहीनता इस सरकार की विशेष देन है.. 

दर्जनों बच्चियों के यौन शोषण में सरकारी तंत्र का शामिल होने का मामला कितना गंभीर है- एक आज़ाद देश के इस निहायत गलीच मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में 25 जिला अधिकारी और 71 अफसरों के शामिल होने में सीबीआई की जांच रिपोर्ट और उस पर सुप्रीम कोर्ट के अनुदेश को किस अख़बार या चैनल ने महत्व दिया.. इतने बड़े पैमाने पर अफसरों की संलग्नता बेहद शर्मनाक है.. जाहिर है कि बच्चियों के यौन शौषण के इस इतिहास में दर्ज होने वाले मामले को सरकार, नेता, अफसर और पैसे वालों का पूरा संरक्षण प्राप्त था..

बेशर्मी और क्रूरता का महावृतान्त--मुजफ्फरपुर के बाद देवरिया फिर प्रतापगढ़, हरदोई............शोषण के तंतु सब ओर इंसानियत को विषैले पंजों से जकड़े हुए हैं.. इस विषय पर कुछ भी असरदार ढंग से लिखना या बोलना लगभग असम्भव लगता है..मामले की भयावहता से तो कलम शर्मसार है ही, संकट यह भी है कि घंटों सोचने पर भी ऐसा कोई शब्द नहीं मिलता, जो इस सियासत की बेशर्मी को उघाड़ सके.. संवेदनशीलता, अफसोस, अपराध-बोध जैसे कोई भाव कहीं नहीं..घोर आपराधिक कृत्यों के जिम्मेदार लोगों को बगल में बिठाकर चेहरे में मुस्कान लिए लोग बेशर्मी से शर्मसार हो रहे हैं..अपने निर्दोष होने की निर्लज्ज कथा गढ़ कर इसे राजनीतिक प्रपंच बता रहे हैं..

बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार हों या बिहार समाज कल्याण विभाग की अध्यक्षा मंजू वर्मा, या मुजफ्फरपुर कांड का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर या इस तरह के कांड में शामिल सरकारी अमला - सब पर बेशर्मी की परत चढ़ी हुई है..


बच्चियों के यौन शौषण के अंतःसूत्र तो शासन-प्रशासन और समाज की रग-रग से जुड़े हुए हैं और इनकी जड़ों की तलाश करनी होगी दिमाग के भीतर, बहुत भीतर जा कर..काश कोई अर्थ मूवर जेसीबी मशीन मनुष्य के भीतरी जगत में खुदाई करके उसमें दफन संवेदनों की लाश को निकाल पाती तो आपराधिक चुप्पियों में कुछ दरार पड़ती..मानने को मजबूर हूँ कि धर्म, साहित्य और कलाएँ मनुष्य रचने में असफल रहे..इस तरह की घटनाओं के सिलसिलों ने उनकी अपर्याप्तता साबित कर दी है..

मुजफ्फरपुर का बालिका आश्रय गृह, देवरिया का माँ विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण समाज सेवा संस्थान.......आसरा लाचार बच्चों के लिए। ‘माँ’ शब्द बोध जगाता है कि बच्चों के लालन-पालन-विकास की यह सेवा मातृत्व की भावना के साथ की जा रही होगी.. जैसे मदर टेरेसा थी सब की माँ, गाँधी देश भर के बापू..इन आश्रय-स्थलों के नाम देख कर लगता था कि सामर्थ्य भर माँ होने, संरक्षक होने का यह सराहनीय उपक्रम है कि कम से कम इन निवास-स्थलों तक पहुँची 30-40-50-300 बच्चियों के ही अभिभावकत्व का बीड़ा उठा लिया जाए.. सहज करुणावश किए जाने वाले ऐसे कामों की आड़ में ऐसा वीभत्स कृत्य? उनके साथ जिनकी सुरक्षा के लिए आप जिम्मेदार हैं? और ये जिम्म्दारी आपने खुद ली थी..तो क्या इस अमानवीय हवस के लिए? वह भी पूर्ण व्यवस्थित, नियोजित ढंग से..आपको पूरा भरोसा था न अपनी कुटिल, हिंसक बुद्धि पर और प्रशासन के अंग-प्रत्यंग की लोभ, भ्रष्ट प्रवृत्ति पर? 


अंततः आपका भरोसा जीत गया, बच्चों का विश्वास हार गया और हार गई मानवता.. कच्ची मासूमियत अपने पालक को खुदा मान कर अपना सारा भरोसा, सब कुछ उसे समर्पित कर देती है..उस भरोसे को तार-तार करने का साहस तो बड़े-बड़े अपराधियों में भी नहीं होता जो बचपन से अपराधों की गोद में ही पले-बढ़े होते हैं.. ‘आश्रय’, ‘माँ’, ‘संरक्षण’ ‘पालना गृह’ जैसे शब्दों का भी बलात्कार किया है इन लोगों ने..उस भरोसे का बलात्कार किया है जिसे पैदा करने के लिए कई विराट जिंदगियों ने लम्बे समय तक खुद को खपाया है.. तब जा कर परिवार के बाहर वृहत्तर परिवार के रूप में ये संस्थाएँ समाज में अपनी मान्यता बनाती हैं.. समाज इन्हें आदर की निगाहों से देखता है कि हम तो बस खुद के जाए एक-दो बच्चों को पालने में चुक जाते हैं.. ये लोग बड़े लोग हैं जो बेसहारा बच्चों का दायित्व लेते हैं.. किसी आपदा अथवा दुर्घटना या अपराध के शिकार लोगों के लिए इन घरों का ही सहारा होता है.. सुरक्षा के दावे के भीतर छिपी हिंसा खौफनाक है और इसके दूरगामी व्यापक परिणाम होंगे..

ऐसी हिंसा, ऐसा लोभ अचानक नहीं घटित हो सकता.. हिंसा की जड़ें बहुत गहरी हैं..जाति, धर्म, देश.......के नाम पर हिंसा के प्रशिक्षण की लम्बी परम्परा है..सवर्ण जाति के लोग निम्न जाति या अपने से अलग सम्प्रदाय के लोगों के साथ क्रूर से क्रूर व्यवहार हिंसा को जायज मान कर करते रहे हैं..


पुनर्वास के नाम पर पूँजी कमाने और बड़े-बड़े सरकारी ठेकों के लिए नेताओं और रसूखदार लोगों को साधने के लिए इन बच्चियों को कच्चे माल की तरह प्रयोग किया गया.. इन तथाकथित सभ्य, प्रतिष्ठित सफेदपोश लोगों के सुख प्राप्त करने के तरीके इतने अधिक विकृत हैं कि हैवानियत की हर सीमा इन्होंने पार कर दी. बच्चियों को नींद की गोली खिला कर नींद में कुकर्म करना, उनके साथ जोर-दबरदस्ती करना, मारना-पीटना, उनसे तरह-तरह के काम कराना, नंगा रहने के लिए मजबूर करना, बिना खिड़की के कमरों में अमानवीय परिस्थितियों में उन्हें काल कोठरी की दशा में रखना..

आरोपियों के तार मुम्बई, कलकत्ता, दिल्ली के रेड लाइट एरिया से जुड़े थे। इस वीभत्स कांड के उद्घाटित न होने पर भविष्य में इन बच्चियों का जो हश्र होता, उसका तो अनुमान ही सिहरा देने वाला है..इन दुष्कर्मों को शुरु करने के बाद ठाकुर और मधु ने साजिशन पत्रकार के तौर पर मान्यता अर्जित की..फिर ठाकुर अपने पिता के अखबार प्रातःकमल के सम्पादक-प्रकाशक हो गए.. पत्रकारिता का सहारा लिया तो था इसकी आड़ में अमानवीय कार्य-व्यापार चलाने के लिए मंत्रालय से मोटी राशि उगाहने का भी जरिया यह बना..अखबार का दफ्तर ठाकुर के आवासीय परिसर और आश्रय गृह के अंदर ही स्थित है..बाहर तो लड़कियों को ले जाया जाता ही था..अखबार के दफ्तर के भीतर भी हर सुविधा से लैश एक सुइट था..इसमें बड़ी मात्रा में कंडोम, नींद की दवाइयाँ और कई आपत्तिजनक चीजें बरामद हुई हैं। मानव होने के नाते गरिमापूर्ण ढंग से जीने के दूसरों के मानवाधिकारों की धज्जियाँ उड़ाने वाले ठाकुर ने गिरफ्तारी के बाद भी लम्बा समय अस्तपताल में काटा और जेल में है भी तो विशिष्ट सुरक्षा सुविधा से लैस होकर.जेल के बाहर के लोगों से सम्पर्क भी बनाए हुए है..ठाकुर के अतिरिक्त भी मधु और आश्रयगृह के कर्मचारियों समेत कई गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं लेकिन अपराध बोध की कहीं कोई छाया किसी के चेहरे पर नहीं है..आसाराम बापू को भी जब सजा सुनाई गई तब भी अपराध-भाव का लेशमात्र उनमें नहीं दिखा.. ब्रजेश ठाकुर की पत्नी और बेटी जिस तरह उन्हें डिफेंड कर रही हैं लगता ही नहीं कि इतने बड़े दुष्कर्म की कोई काली छाया उनके चेहरे में है.. स्त्री होने के नाते स्त्री की पीड़ा इन्हें अधिक समझ आनी चाहिए थी..

मीडिया को फटकार लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि लड़कियों की गरिमा और गोपनीयता पर आँच न आए और संवेदनशील तरीके से उनसे और उनके बारे में बात की जाए... मीडिया से एक शिकायत यह भी है- इस खबर की पृष्ठभूमि में घुटनों में मुँह ढापे शर्मिंदा लड़की दिखाई जाती है..किसी लड़की ने शर्मिंदगी का कोई काम नहीं किया..इतनी प्रताड़नाएँ झेलने के बाद भी जिस साहस से, जिस जीवनी शक्ति से सब बरदाश्त कर वे आगे बढ़ रही हैं। ये जुझारू लड़कियाँ सरवाइवर्स हैं.. शर्मिंदगी की मुद्रा में अपराधियों को दिखाया जाए..अपराधियों के चेहरों में अब भी निर्लज्जता और निर्दोष दिखने के लिए की गई तिकड़मों के तंतु दिखते हैं... इनके चेहरों पर शर्मिंदगी और अफसोस जैसे अपराध भाव चस्पां कर खबर की पृष्ठभूमि में दिखाया जाना, मानवीय बोध जगाने में छोटी सी भूमिका निभा पाए शायद...

मुजफ्फरपुर के कुछ समय बाद देवरिया का समाज कल्याण केंद्र भी इसी तरह का यातनागृह साबित हुआ। बालिका संरक्षण गृह, पालना गृह की संरक्षिका गायत्री त्रिपाठी और उनकी बेटी कंचनलता ने स्त्री होते हुए भी लड़कियों पर जो कहर ढाए हैं, वे रूह कँपा देने वाले हैं..इस संरक्षण गृह में सरकारी मानकों का पालन नहीं हो रहा था इसलिए जून 2017 में इसकी मान्यता निरस्त कर दी गई थी..फिर भी इसे बंद नहीं किया गया.विकृत गतिविधियाँ जारी रहीं...नोटिस मिलने पर गायत्री अपने ऊपर पेट्रोल डाल कर खुद को जला डालने की धमकी देती थी। ऐसी तुच्छ कुटिलताओं से संस्था की गतिविधियाँ जारी रखी गईं..उन्हें पूरा भरोसा था कि ऐय्याशी और पूँजी से राजनीतिक घेरेबंदी करके फैसला अपने पक्ष में करवा लेंगी। वहाँ भी बच्चियों के साथ उपरोक्त तरह के घृणित कर्म होते थे.. दड़बेनुमा घर में रखा जाता था

.ग्राहकों के पास गोरखपुर भेजा जाता था..7-8 लड़कियाँ अब तक गायब हैं..नाम रिकॉर्ड में हैं पर लड़कियाँ कहीं नहीं मिल रही हैं...उनकी खोज जारी है। बच्चियों की गवाही के अनुसार पहले भी अवैध तरीकों से बच्चे विदेश बेचे जा चुके हैं..ताजा खबर के अनुसार जिले की बाल कल्याण समिति के सदस्य प्रोबेशन कार्यालय को अभिलेख नहीं उपलब्ध करवा रहे हैं..चाबी सौंप कर गायब हो गए हैं.. कैसे पूरा का पूरा परिवार मिलीभगत से ऐसे दुराचार करता है

...आदमियत से गिरने के बाद आपस में भी एक-दूसरे के लिए भरोसा, इज्जत और प्रेम की भावना कैसे बच सकती है..

ये कुगतिविधियाँ द्वीप में नहीं आवासीय परिसर में समाज के बीचोंबीच घटित हुई हैं..बाहुबलियों की दबंगई इस कदर बढ़ गई है कि कोई कुछ कहता नहीं या समाज एक-दूसरे से इतना कट चुका है कि किसी को कुछ न पता चलता है न मतलब रहता है? कितनी पीड़ा दायक है यह चुप्पी.. इस घटनाक्रम से किसी भी भूमिका से जुड़े लोग समाज के प्रतिष्ठित लोग हैं.. जिन गतिविधियों में वह लिप्त हैं या तटस्थ हैं, ये लोग मानवतारहित लोग हैं और अनुमान किया जा सकता है कि इनके घरों के भीतर भी मानवीय आचरण नहीं होता होगा...समाज का कोई हिस्सा निरापद नहीं लगता अब। पता नहीं परदों के भीतर कितनी सड़ांध छिपी हो..

ये दिल चीरने वाली खबरें प्रतापगढ़, हरदोई...जगह-जगह से आए जा रही हैं..छोटी बच्चियों, अंध-मूक-बधिर, दिव्यांग लड़कियों के साथ दुराचार बेरोकटोक जारी है..इस प्रचंड समय में कोमल और प्रतिरोध की ताकत से रहित कमजोर लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है.. प्रकृति हो या मनुष्य- हर नर्म, नाजुक, कोमल, सुंदर सृष्टि को रौंदा जा रहा है..जो जहाँ जिस स्तर तक पहुँचा हुआ है..उससे नीचे वास करने वाले अस्तित्वों को अपनी उठान के लिए खाद की तरह इस्तेमाल कर रहा है। जब हर ऊँची आवाज अपने से नीची आवाज को रौंद डालना चाहती है..ऐसे समय में इस मुद्दे पर विपक्ष द्वारा किए गए शक्ति-प्रदर्शन में राजनीति ही नजर आ रही है नीति नहीं..

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links