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आईपीएस वैभव कृष्ण को नेता-पत्रकार-पुलिस के सीडिंकेट के भ्रष्टाचार उजागर करने की सजा मिली

Bhola Tiwari Jan 10, 2020, 8:42 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली : गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी वैभव कृष्ण को उ.प्र की योगी आदित्यनाथ सरकार की सरकार ने निलंबित कर दिया है, उनपर आरोप है कि एक वायरल वीडियो में वे एक महिला के साथ आपत्तिजनक बात कर रहें हैं।उ.प्र सरकार ने उस वीडियो को जाँच के लिए गुजरात के अहमदाबाद स्थित फाँरेंसिक लैब में भेजा था।वहाँ की रिपोर्ट में ये कहा गया है कि वीडियो में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है,जबकि वैभव कृष्ण का कहना है कि उन्हें फसाने के लिए वीडियो को एडिट किया गया है।आपको बता दूं वीडियो के वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण ने स्वंय प्राथमिकी दर्ज कराई थी।सरकार ने इसकी जाँच मेरठ के एडीजी और आईजी को सौंपा था।

इसी दौरान वैभव कृष्ण ने संवाददाता सम्मेलन कर खुद हीं जानकारी दी थी और शासन को भेजी एक गोपनीय रिपोर्ट लीक कर दी थी।

उ.प्र सरकार को ये नागवार गुजरा,सरकार ने इसे अधिकारी आचरण नियमावली का उल्लंघन माना।एडीज और आईजी के रिपोर्ट के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है।इस पूरे मामले को जानने के लिए इसके तह में जाना जरूरी है।

ये अदावत तब शुरू हुई जब वैभव कृष्ण को गौतमबुद्ध नगर यानी नोयडा का एसएसपी बनाया गया था।उस समय वहां नेता-पत्रकार-आईपीएस अफसरों की सिंडिकेट खूब फल-फूल रहा था।जब ये बात वैभव कृष्ण को पता चला तो उन्होंने इनके खिलाफ अभियान शुरू कर दिया।विवाद तब गहरा गया जब पुलिस ने सिंडिकेट के कुछ पत्रकारों को भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।पत्रकार महोदय की थाने में खूब मजम्मत की गई तो उसने सिंडिकेट के लोगों के नाम का खुलासा कर दिया।इस सिंडिकेट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक स्थानीय नेता भी थे जो लखनऊ जाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग का काम देखते थे।पत्रकार से हीं पाँच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम का खुलासा हुआ था, जिसमें अजयपाल शर्मा, सुधीर सिंह,हिमांशु कुमार, राजुव नरायण मिश्रा तथा गणेश शाहा शामिल थे।वैभव कृष्ण ने सरकार को जो खत लिखा था उसमें इनका भी नाम था।खत को एक सोची समझी रणनीति के तहत वैभव कृष्ण ने स्वंय वायरल कर दिया था।खत के वायरल होने से पूरे प्रदेश और पुलिस महकमे में खलबली मच गई।मामला मुख्यमंत्री तक गया और डीजीपी ओमप्रकाश सिंह को प्रेसवार्ता कर सफाई देनी पड़ी थी।

वैभव कृष्ण ने जाँच में भी कहा कि इन अधिकारियों, पत्रकारों और एक नेता के खिलाफ मेरे पास पर्याप्त सबूत हैं।ये सभी ट्रांसफर-पोस्टिंग और रंगदारी का धंधा चलाते थे।मैंने बीते एक साल में संगठित अपराध और रंगदारी मांगने वाले रैकेट्स के खिलाफ कडा एक्शन लिया है, जिसके चलते अब वो मेरा नाम खराब करने के लिए साजिश रचकर ऐसा कर रहें हैं।मैंने खुद भी वायरल वीडियो को देखा है।आपराधिक तत्वों ने मेरी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर ऐसी साजिश रची है।

वैभव कृष्ण को निलंबित करने के बाद सरकार ने उन पाँच आईपीएस अधिकारियों को भी उनके जिले से हटा दिया है।शासन ने डीजी इंटेलिजेंस हितेश चंद्र अवस्थी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है, जो वैभव कृष्ण के गोपनीय पत्र में लगाए गए भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों की सिलसिलेवार जाँच करेगी और 15 दिनों में जाँच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।एसआईटी में आईजी एसटीएफ अमिताभ यश व उ.प्र जल निगम के प्रबंध निदेशक विकास गोठलवाल को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

एसआईटी की जाँच के दायरे में पाँचों आईपीएस अधिकारियों के अलावा मुख्य सचिव के मीडिया कार्यालय के निदेशक दिवाकर खरे,पीसीएस अधिकारी गुलशन कुमार व पीसीएस अधिकारी रजनीश की भूमिका भी होगी।समिति जाँच के लिए जरूरत के अनुरूप अन्य अधिकारियों का चयन भी करेगी।आपको बता दें पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता व भ्रष्टाचार के खिलाफ यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

नेता-पुलिस-पत्रकार के सिंडिकेट के भ्रष्टाचार की ये पहली घटना नहीं है।इस तरह की घटना देश में कई बार उजागर हो चुकी है।ये मामला संगठित अपराध का है जिसमें स्थानीय नेता से लेकर वरिष्ठ आईपीएस और पीसीएस अफसर जुड़ें हैं।मुख्य सचिव के मीड़िया कार्यालय के निदेशक दिखाकर खरे के खिलाफ अगर पुख्ता जाँच होती है तो बहुत से सफेदपोश जो पत्रकारिता की आड़ में दलाली कर रहें हैं, अकूत दौलत बना रहे हैं, सब उजागर हो जाएगा मगर ये सब सरकार की मंशा के ऊपर है।

राम राज्य लाने का दावा करनेवाली सरकार का सच अअब बाहर आ रहा है।मुख्यमंत्री और डीजीपी के नाक के नीचे इतना बडा रैकेट चल रहा था, इसकी जानकारी उन्हें क्यों नहीं हुई सवाल तो इस बात पर भी उठेगा।

मुख्यमंत्री और डीजीपी ईमानदार हैं इसमें किसी को शक नहीं है लेकिन मुख्यसचिव के मीडिया कार्यालय के निदेशक का इस मामले में नाम आना मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा को शर्मसार करता है।

वैभव कृष्ण विवादित शख्सियत रहें हैं, अखिलेश यादव सरकार ने भी उन्हें निलंबित किया था मगर इस बार उन्होंने शशक्त लाँबी पर हाथ डाला है।अब ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि एसआईटी जाँच में क्या निकलकर आता है।अश्लील वीडियो का वायरल होना एक अलग बात है और उनके द्वारा उठाया गया भ्रष्टाचार का मुद्दा अलहदा है।दोनों को जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है, ये वायरल वीडियो बिल्कुल सही है इसमें किसी को शंका नहीं है मगर उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो मुहिम शुरू की है वो अपने अंजाम तक पहुँचनी चाहिए।

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