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नागरिकता...

Bhola Tiwari Jan 09, 2020, 8:16 AM IST टॉप न्यूज़
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कबीर संजय

नई दिल्ली : मेरी का मां को मेरा जनमदिन याद नहीं रहता था। बचपन में जब मैं उससे पूछा करता था अपने जनमदिन के बारे में। तो वह मुझे उस समय कि घटनाओं को याद करके मेरी उम्र बताती थी। वो कहती थी कि जिस साल ये सड़क बनी थी। उसी साल का तुम्हारा जनम है। दूसरी घटना जमीन अधिग्रहण की है। जिस समय तुम्हारी उम्र एक साल रही होगी, उसी समय इलाहाबाद विकास प्राधिकरण ने हमारी जमीन ले ली, खेत ले लिए। 

मेरा जनम उसे हमेशा ही ऐसी ही घटनाओं से याद रहा। आज की बात और है। आज बच्चों के फेसबुक पर पहले से मैसेज आ जाता है। वे जनमदिन की बधाई देते हैं तो मां भी मुझे उस दिन विशेष कर फोन करती है। जनमदिन की बधाई देती है। लेकिन, मैं सोचता हूं कि मेरी मां का जनमदिन क्या है। उसने किस दिन और किस साल जनम लिया। उसका जनमदिन कभी मना ही नहीं। कभी खयाल भी नहीं आया। उसे अपना जनमदिन याद नहीं। कहीं और लिखा नहीं। हम लोग अंदाजे से ही अपनी अम्मा की उम्र का पता लगाते हैं। मोटा-मोटी अंदाजा लगाते हैं कि इतनी उम्र तो होगी ही। इतने सारे भाई-बहन हैं। सबसे बड़े वाले भाई की उम्र इतनी है। तो मां की उम्र इतनी तो कम से कम होनी ही चाहिए। 

आज तक मुझसे कभी मेरी मां की जनमतिथि नहीं पूछी गई। मुझे याद भी नहीं। अम्मा को भी याद नहीं। अम्मा के बड़े भाईयों को भी याद नहीं। मां किसान परिवार में जन्मी थी। उसे पढ़ने का मौका नहीं मिला। तो उसके लिए कहीं किसी स्कूल के कागजात में फर्जी ही सही जनमदिन की तारीख नहीं लिखाई गई। 

सोचता हूं कि अब जब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनेगा और मुझसे मेरी मां की जनमतिथि पूछी जाएगी, तब मैं क्या जवाब दूंगा। कहां से लाऊंगा वो कागज जो साबित कर सकें कि वो किस तारीख को पैदा हुई थी। 

तो क्या मेरी मां की नागरिकता छीन ली जाएगी। वो इस देश की नागरिक नहीं रहेगी। 

भारत माता का नारा लगाने वाले क्या मेरी माता को देश-बदर कर देंगे। मेरी मां के लिए डिटेंशन सेंटर तैयार करने वालों का समर्थन मैं तो नहीं करने वाला। मैं समझता हूं कि मेरे जैसे लाखों करोड़ लोग हैं, जिन्हें अपने माता-पिता के बारे में ऐसी ही चिंता करने की जरूरत है। 

(फोटो मैक्सिम गोर्की के प्रसिद्ध उपन्यास मदर के कवर की है। यह किताब मेरी पसंदीदगी की लिस्ट में बहुत ऊपर है। इसलिए यहां पर लगाई है। )

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