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जब गुजरात के छात्रों ने मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल को इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया था

Bhola Tiwari Jan 07, 2020, 7:31 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली : गुजरात में "नवनिर्माण आंदोलन" की शुरुआत एक छोटी सी घटना को लेकर शुरू हुई थी।गुजरात सरकार ने सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और अहमदाबाद के एलडी काँलेज के फूड बिल में 30% की वृद्धि कर दी।उन दिनों विभिन्न सरकारी हास्टलों में खाना 70/माह में मिलता था, बढ़े रेट की वजह से ये 100/माह हो गया।गरीब छात्र जो हाँस्टल में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, उन्हें अब परेशानी होने लगी थी।बहुत से गरीब छात्र हाँस्टल छोडने का मन बना रहे थे।एक दिन मेस में खाना खाते समय एक गरीब छात्र ने अपने दूसरे दोस्तों को कहा कि इस महीने के बाद मैं हाँस्टल में नहीं रह पाऊंगा, क्योंकि मेस का बिल उसकी पहुंच से बाहर हो गया है।मेस में हीं कुछ दबंग छात्रों ने ये फैसला लिया कि फूड बिल में वृद्धि के खिलाफ आंदोलन चलाया जाएगा और सरकार को फूड बिल में वृद्धि को हर हाल में रोकना होगा।

मीटिंग की अगली सुबह छात्र इंजीनियरिंग कॉलेज के गेट पर धरने पर बैठ गए।काँलेज के सभी छात्रों ने इस आंदोलन को खूब समर्थन दिया।धीरे धीरे ये चिंगारी आग बनकर पूरे गुजरात में फैल गई।छात्रों के आंदोलन से घबराई गुजरात सरकार ने इस आंदोलन को सख्ती से कुचलने की भी कोशिश की, मगर छात्रों पर जितना जुल्म होता आग और भड़क जाती थी।पहले ये छात्र आंदोलन था मगर बाद में समाज का हर तबका इससे जुड़ने लगा।

अहमदाबाद की यूनिवर्सिटी में हुई सीनेट की मीटिंग में ये तय किया गया कि अब विधायकों, सरकार, व्यापारियों और पुलिस दमन के खिलाफ एक बडा आंदोलन छेडा जाए।इस आंदोलन को नवनिर्माण आंदोलन का नाम दिया गया।

छात्रों ने सरकारी बसों पर कब्जा कर लिया, सरकारी संपत्तियों को तोडा जा रहा था।विशाल रैलियां निकाली जा रही थीं।आखिरकार पुलिस ने छात्रों पर फायरिंग कर दी तब ये आंदोलन और हिंसक हो गया।गुजरात के 52 ट्रेड यूनियन ने अपना सपोर्ट छात्रों को कर दिया तब ये आंदोलन निर्णायक मुकाम पर जा पहुंचा।गुजरात के 60 से अधिक शहरों में 26 जनवरी का कार्यक्रम कर्फ्यू में हुआ।आंदोलन में आम लोगों की सहभागिता का ये आलम था कि जो रैलियों में शामिल नहीं हो पाता वो अपने घरों की छत से थालियां बजाकर सरकार विरोधी नारे लगाता।रैलियों में चिमनभाई पटेल की अर्थियां निकाली जाती।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर चिमनभाई पटेल को इस्तीफा देना पडा।नए चुनाव कराए गए जिसमें कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई थी।61 छात्रों की मौत समेत 88 लोग इस आंदोलन में मारे गए थे।73 दिन चले आंदोलन में 8053 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और 184 पर मीसा लगाया गया।4342 टियरगैस के गोले छोड़े गए और पुलिस ने 1405 राउंड फायरिंग की थी।इतिहास गवाह है छात्रों के आंदोलन ने विश्व की मजबूत से मजबूत सत्ता को जड़ से उखाड़ फेंका है।

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