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नहीं रहे आँपरेशन मेघदूत के नायक लेफ्टिनेंट जनरल प्रेमनाथ हून

Bhola Tiwari Jan 07, 2020, 11:55 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नई दिल्ली : रणक्षेत्र में दूनिया की सबसे ऊँची चोटी मानेजाने वाली सियाचिन पर तिरंगा फहराने वाले लेफ्टिनेंट जनरल प्रेमनाथ हून का निधन 91 वर्ष की उम्र में पंचकूला के एक अस्पताल में हो गया।आपके नेतृत्व में हीं भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक आँपरेशन मेघदूत का संचालन किया था।आप देश के वास्तविक हीरो थे और आप मरकर भी अमर हैं।

ये बात पाकिस्तान के तानाशाह राष्ट्रपति जनरल जियाउल हक के समय की है।भारतीय गुप्तचर विभाग को ये सूचना मिली कि पाकिस्तान सरकार ने यूरोप में बर्फीले क्षेत्र में पहने जाने वाले खास तरह के कपडों और हथियार का बडा आर्डर दिया।गुप्तचर विभाग को थोडी और मशक्कत के बाद पता चला कि पाकिस्तानी फौज सियाचीन पर कब्जा करना चाहती है, जो सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है।पाकिस्तान के सैनिक राष्ट्रपति जनरल जियाउल हक की नजर 33 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके पर थी।आपको बता दें जब देश का बंटवारा हो रहा था तब भी इस बंजर क्षेत्र पर किसी का ध्यान नहीं गया।1972 के शिमला समझौते के वक्त भी सियाचिन को बेजान और इंसानों के रहने के लायक नहीं समझा गया था।शिमला समझौता के दस्तावेजों में सियाचिन में भारत-पाक के बीच सरहद कहाँ होगी, इसका जिक्र भी नहीं किया गया।चूँकि जनरल जिया फौजी थे और वे इस जगह के सामरिक महत्व को जानते थे, इस वजह से उन्होंने पर्वातारोही और सैनिकों को वहाँ भेजना शुरू किया।इस बात की खबर भारत को लगी हीं नहीं।

यूरोप के जिस कंपनी को पाकिस्तान ने सैनिकों के ड्रेस का आर्डर किया था वहां से ये बात भारतीय गुप्तचर एजेंसी राँ को पता लगी तब भारत चौकन्ना हुआ।

13 अप्रैल 1984 को भारतीय सेना ने आँपरेशन मेघदूत लांच किया।बताते हैं कि सैनिकों का मनोबल इतना ऊँचा था कि 12 अप्रैल को उन्हें बर्फ में पहने जाने वाले कपड़े और साजोसामान मिले और 13 अप्रैल को आँपरेशन का ऐलान कर दिया गया।दूनिया के सबसे ऊँचे मैदान-ए-जंग में सीधे टकराव की यह एक तरह से पहली घटना थी।इसे आँपरेशन मेघदूत नाम दिया गया और इसने भारत की सामरिक रणनीतिक जीत की नींव रखी।

आपको बता दें पाकिस्तानी सरहद से सियाचिन की ऊँचाई कम है मगर भारतीय की तरफ से ये ऊँचाई बेहद ज्यादा और मुश्किल है।खडी चढाई को पार कर भारत के वीर सैनिकों ने जनरल पीएन हून के नेतृत्व में सफलता प्राप्त की।जब ये आँपरेशन चल रहा था तब वहां का तापमान -60 से -70 डिग्री के पास था।

सियाचिन पर पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़कर भारतीय सैनिकों ने तिरंगा फहराया।दूनिया भर के मुश्किल लडाइयों में आँपरेशन मेघदूत का जिक्र होता है।

ये लडाई लेफ्टिनेंट जनरल पीएन हून के नेतृत्व में लडी गई थी।वीर सैनिक को विनम्र श्रद्धांजलि।आप हमेशा भारतीयों के दिल में बसे रहेंगे।

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