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अमेरिका की हरकत ने डुबोया भारत को, पेट्रोल की कीमतें अब आसमान पर पहुँचेंगी!

Bhola Tiwari Jan 06, 2020, 4:04 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव 

नई दिल्ली : आधी रात को इराक के बगदाद हवाई अड्डे से बाहर आते वक्त मेजर जनरल कासिम सुलेमानी जो ईरान की कुद्स फोर्स का प्रमुख था की कार पर अमेरिकी सैनिक ड्रोन से हमला करते हैं और उसकी कार को भारी गोलाबारूद से उड़ा दिया जाता है। सुलेमानी के साथ आठ और लोग मारे जाते हैं जो ईरान के महत्वपूर्ण पद पर थे। सुलेमानी के साथ अल मुहादिस भी मारा गया, जो एक काफिले के साथ बगदाद एयरपोर्ट पर सुलेमानी को रिसीव करने पहुँचा था। सुलेमानी का विमान लेबनान या सीरिया से आया था। ड्रोन हमले में जनरल सुलेमानी के शरीर के चिथडे उड़ गए और उनके खंडित शव की पहचान उनके अंगुली में अंगुठी के साथ की गई।

आपरेशन को अंजाम देने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक ट्वीट किया जिसमें केवल अमेरिकी झंडा था। बाद में पेंटागन के अधिकारियों ने ईरान के सबसे शक्तिशाली जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने की पुष्टि की। ईरान सरकार ने भी सुलेमानी की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि इसका बदला लिया जाएगा। कुद्स फोर्स के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को ईरान के सुप्रीम लीड़र आयातोल्लाह अली खुमैनी ने “अमर शहीद” का खिताब दिया और कहा कि जनरल की शहादत का बदला लिया जाएगा।

अब प्रश्न उठता है कि कौन है जनरल कासिम सुलेमानी जिसके पीछे अमेरिका लगभग तीस सालों से पड़ा था और उसकी मौत से ईरान इतना गमजदा क्यों है? कासिम सुलेमानी का जन्म ईरान के सुदूर दक्षिणपूर्व इलाके के एक गरीब परिवार में हुआ था। बीस साल की उम्र में वे ईरान की महत्वपूर्ण इस्लामिक रिवाँल्यूशनरी गार्ड में शामिल हुए फिर इन्होंने पटल कर नहीं देखा। अपनी चतुराई और लगन से वे लगातार आगे बढ़ते चले गए। ईरान सरकार ने रिवाँल्यूशनरी गार्ड का गठन देश की सुरक्षा और विचारधारा को कड़ाई से लागू करने के लिए किया था। पड़ोसी इराक के साथ 1980 और 1988 में हुए युद्ध के दौरान रिवाँल्यूशनरी गार्ड के पास राजनीतिक और आर्थिक शक्तियां भी आईं। इराक में हुए खूनी संघर्ष ने सुलेमानी को आगे बढ़ने में काफी मदद पहुँचाई। वे अपने रणकौशल से लगातार दुश्मनों को कुचलते रहे और आगे बढ़ते रहे। वर्ष 1990 के दशक के आखिरी सालों में उन्हें कुद्स गार्ड का चीफ बना दिया गया। कासिम सुलेमानी ने लेबनान में हिजबुल्लाह को बढावा दिया और ये आरोप उनपर कई बार लगे।

 इराक में जनरल सुलेमानी की अहम भूमिका थी। बगदाद को इस्लामिक स्टेट के आतंक से बचाने के लिए उनके ही नेतृत्व में ईरान समर्थक फोर्स का गठन हुआ था, जिसका नाम पापुलर मोबिलाइजेशन फोर्स था। सुलेमानी अमेरिका के कितने पूराने दुश्मन थे इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि 1980 के दशक में ईरान और इराक के बीच खूनी जंग में उनकी भूमिका अहम थी। इस युद्ध में अमेरिका ने सद्दाम हुसैन का खूलकर साथ दिया था क्योंकि अमेरिका की नजर में ईरान उस समय उसका सबसे बड़ा शत्रु था। ईरानी क्रांति से पहले वहाँ अमेरिका का हीं दबदबा था।

हालांकि जनरल सुलेमानी को मरने को लेकर कई बार अफवाहें फैली हैं। इसमें 2006 के हवाई जहाज दुर्घटना में उत्तर-पश्चिमी ईरान में अन्य सैन्य अधिकारियों की मौत और 2012 में दमिश्क में बमबारी के बाद सीरियाई राष्ट्रपति बशर असद के शीर्ष सहयोगियों की हत्या शामिल थी। कुछ दिनों पहले लोगों की भीड़ ने इराक स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला कर दिया था। इसके लिए अमेरिका ने इराक पर निशाना साधा था। अमेरिका के पास पक्की खबर थी कि इस हमले के पीछे कासिम सुलेमानी का दिमाग है। अमरीकी रक्षा विभाग की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि “सुलेमानी बीते 27 दिसंबर समेत, कई महीनों से इराक स्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों पर हमलों को अंजाम देने में शामिल रहे हैं। इसके अलावा बीते हफ्ते अमरीकी दूतावास पर हुए हमलों को भी उन्होंने अपनी स्वीकृति दी थी। यह एयर स्ट्राइक भविष्य में ईरानी हमले की योजनाओं को रोकने के उद्देश्य से किया गया। अमरीका, चाहे जहाँ भी हो, अपने नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही को करना जारी रखेगा।”

मध्यपूर्व की घटनाओं पर कडी नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि बौखलाहट में ईरान कुछ भी कर सकता है, जिससे स्थिति और बिगड़ेगी। अब अमेरिका के अलावा इजरायल भी हमले की जद में रहेगा। विशेषज्ञों ने अंदेशा जताया है कि इजरायल पर कोई भी कार्रवाई का मतलब वो एक के बदले दस हमले करेगा और फिर अरब-इजरायल युद्ध होने में देर नहीं लगेगी। इससे तृतीय विश्वयुद्ध के छिड़ जाने की आशंका है। कासिम सुलेमानी की मौत ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड़ के दाम कुछ हीं मिनटों में 3 डाँलर से बढ़कर 68 डाँलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। ऐसे में मंहगे क्रूड़ आँयल का असर घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। पिछले एक हफ्ते में पेट्रोल के दाम करीब एक प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशी बाजारों से खरीदता है। ऐसे महंगा क्रूड़ ऑयल अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का खामियाजा भारत को भी भुगतना होगा। क्रूड़ आँयल की कमी से दाम बढ़ेंगे। ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी नोमुरा के अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में 10 डाँलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के राजकोषीय घाटे और करंट अकाउंट बैलेंस पर असर होता है।

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